Thursday, 3 December 2015

Genetic and Metabolic diseases in newborns babies

Genetic and Metabolic diseases in newborns babies
अब न्युबॉर्न में जेनेटिक और मेटाबॉलिक बीमरियों को पहचानना आसान

आजकल बच्चों में दुर्लभ और वंशानुगत बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चों में करीब सात हजार दुर्लभ बीमारियां होती हैं। इनमें से 80 परसेंट जेनेटिक होती हैं। पचास परसेंट बीमारियों के लक्षण न्यू बॉर्न को देखने से मालूम चल पाते हैं। समय पर बीमारी मालूम चलने पर इलाज संभव हो सकता है, लेकिन ट्रीटमेंट में देरी होनी से बच्चे का सही इलाज़ नहीं हो पाता। 

जेनेटिक और मेटेबॉलिक डिसऑर्डर पहचानने के लिए अब ब्लड की एक बूंद से बच्चे की बीमारी को डायग्नोस किया जा सकता है। यह न्यूबॉर्न बेबी के स्क्रीनिंग टेस्ट से संभव हो पा रहा है। 

न्यूबॉर्न की एड़ी से ब्लड की एक ड्रॉप लेकर ये टेस्ट किया जाता है, ब्लड की एक बूंद से उसकी बीमारीयों की स्क्रीनिंग की जाती है। पहले 4 से 6 साल की उम्र में इन बीमारियों की पहचान हो पाती थी। ट्रीटमेंट में देरी से ऐसे केसेज अक्सर बिगड़ जाते थे। अब इनकी पहचान और इलाज सही समय पर हो पाता है जिससे बच्चों की quality ऑफ लाइफ बेहतर हो जाती है। 

डॉ. अशोक गुप्ता, पीडियाट्रिशियन, अधीक्षक, जेकेलोन हॉस्पिटल

ब्रेन स्ट्रोक - Brain Stroke in Hindi

ब्रेन स्ट्रोक Understand Brain Stroke in Hindi

ब्रेन स्ट्रोक के बाद एक ही पल में ठीक-ठाक व्यक्ति समान्य कार्य करने में विफल हो जाता है। ब्लड सप्लाई में रुकावट के कारण स्ट्रोक आता है। ब्लड वैसल के फ़्लो में ब्लड क्लॉट के कारण और कई बार ब्लड वैसल प्रभावित होने से भी स्ट्रोक आ सकता है। चूंकि खून ही दिमाग को जरूरी न्यूट्रीयंट्स सप्लाई करता है, जिससे दिमाग महत्वपूर्ण फंक्शन आसानी से कर सके।

खून की सप्लाई में कुछ सैकंड के लिए रुकावट आने से न्यूरॉन्स खत्म होने लगते हैं। इसलिए स्ट्रोक में हर लम्हा अहम होता है। 

स्ट्रोक के लक्षण में यह शामिल हैं- सुस्ती आना, कमजोरी महसूस होना और शरीर के हिस्से में पैरालसिस आना। इनके अलावा कंफ्यूजन, बिना कारण सिर में तेज दर्द होना, बोलने में परेशानी आना, चलने में दिक्कत, बैलेंस खोना इस बीमारी के बाकी लक्षण है। स्ट्रोक को फास्ट (एफ–फेस, ए-आर्म, एस-स्पीच, टी-टाइम) से जाना जाता है। सीटी स्कैन और एमआरआई से स्ट्रोक के कारण और किस्म का पता चलता है। स्ट्रोक के कारण और किस्म का पता चलता है। स्ट्रोक के 4-5 घंटे में मरीज को क्लॉट खत्म करने वाली दवा और सही इलाज दिया जाए तो मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।

कई बार लोग स्ट्रोक के लक्षण को समझने और समय पर अस्पताल पहुंचने में विफल होते हैं। जो रिस्क फैक्टर हृदय रोग के है, वहीं स्ट्रोक के हैं। हाई ब्लड प्रैशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज़, सर्कुलेशन प्रॉबल्म, फिजिकल एक्टिविटी न होना और मोटापा कुछ कारण हैं। 

सही खान-पान, व्यायाम करना, हैल्थ इश्यू को चैक में रखने से स्ट्रोक टल सकता है।

डॉ. जेडी मुखर्जी न्यूरोलाजिस्ट, मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली।

Weight Loss tips in winter season

Winter Season diet plan to lose weight
सर्दी में आसानी से कम करना चाहते हैं वजन, तो ये खाएं

माना जाता है कि गर्मी के अपेक्षा सर्दी में वजन कम करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। जबकि सर्दी की कुछ खास चीजें खाने से कैलोरी बर्न करना आसान बन जाता है। आमतौर पर सर्दी के दिनों में भूख अधिक लगती है, लेकिन इन्हे खाने से बार-बार भूख भी नहीं लगती और शरीर को जरूरी पौष्टिक तत्व भी मिलते हैं। जानिए इनके बारे में...

आलू: इसमें होता है विटामिन–सी और बी6 स्टार्च से भरपूर इस सब्जी में कई न्यूट्रियंट्स भी पाए जाते हैं। इसमें विटामिन-सी और विटामिन-बी6 भारी मात्रा में पाए जाते हैं। मीडियम साइज का आलू खाने से शरीर की 25 से 29 फीसदी जरूरत पूरी हो जाती है। इसमें फोलेट भी पाया जाता है। आलू का छिलका फाइबर का अच्छा सोर्स है। इसे खाने से ब्लड शुगर संतुलित रहता है।

अनार: एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है अनार का जूस एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा सोर्स है। रोज एक कप इसका जूस पीने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं, अनार का जूस शरीर में खून के प्रवाह को बेहतर बनाता है। इसी वझ से हृदय और रक्त संबंधित बीमारियों की आशंका कम होने लगती है।

ओट्मील: इसे खाने से लंबे समय तक रहती है ताकत नाश्ते में ओट्मील खाइए। इसमें न्यूट्रियंट्स और फ़ायटोकैमिकल्स भारी मात्रा में पाए जाते है। इसे खाने के बाद शरीर में लंबे समय तक ताकत बनी रहती है। शोध के अनुसार जो नाश्ते में ओट्मील खाते हैं, वे दोपहर के खाने में एक-तिहाई कैलोरी कम खाते है। इसमें जिंक और सॉल्यूबल फाइबर पर्याप्त मात्रा में होते हैं। कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में करगार होता है।

अमरूद: एक सर्विंग में मात्र 60 कैलोरीज़ इस फल का स्वाद स्ट्रोबेरी से मिलता-जुलता है। ऑरेंज की तुलना में इस फल में पांच गुना ज्यादा विटामिन-सी होता है। इसके बीज खाने से शरीर को फाइबर कंटेंट मिलता है। इसमें कई दूसरे न्यूट्रियंट जैसे पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम आदि होते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी एक सर्विंग में सिर्फ 60 कैलोरीज़ होती है। यही इसे बेस्ट स्लिमिंग फूड बनाता है।

स्ट्रॉबेरी: पेट रखता है सुरक्षित एक कप स्ट्रॉबेरी में मात्र 50 कैलोरीज़ और 2 ग्राम तक फाइबर होता है। जिन लोगों के शरीर में विटामिन-सी की कमी है तो रोज एक कप स्ट्रॉबेरी खाएं। इससे शरीर की 160 फीसदी जरूरत पूरी होगी। शराब के सेवन से पेट को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स और फिनोलिक कम्पाउंड पाए जाते हैं। अच्छी बात यह है कि स्ट्रॉबेरी पूरे वर्ष उपलब्ध होती है।

ब्रोकली / पत्ता गोभी: विटामिन-सी का अच्छा स्त्रोत इन दोनों प्रकार की सब्जियों में विटामिन-सी भारी मात्रा में होता है। इसे खाने से इम्यून सिस्टम की फंक्शनिंग बेहतर बनती है। बाजार में फ्रेश सब्जी नहीं मिल रही तो कोई बात नहीं। सुपरमार्केट में फ़्रोजन फूड भी उतने ही फायदेमंद होते हैं।



What Is Sleep Apnea in Hindi | Cause symptoms treatment

What Is Sleep Apnea and its cause symptoms treatment  

स्लीप एप्निया आम समस्या है, जिसमें कई बार सोते वक्त व्यक्ति की सांस की नली आंशिक या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है। करीब 5 फीसदी पुरुष और 3 फीसदी महिलाएं स्लीप एप्निया से पीड़ित होते हैं। इससे दिन भर नींद आने से रकचाप बढने जैसी समस्याओं के साथ दिल के रोग व डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।

स्लीप एप्निया और खर्राटे, दोनों एक जैसी समस्याएं लगती हैं, लेकिन उनमें फर्क है, जब सोते वक्त जीभ की मांसपेशियां एवं ऊपरी श्वसन नली विश्राम करने लगती हैं तो इस वजह से उस नली में आंशिक या पूर्ण रूप से व्यवधान पैदा होने लगता है। खर्राटे की स्थिति में श्वास नली थोड़ी संकीर्ण हो जाती है, जिस वजह से उसमें काफी कंपन पैदा होता है, जिससे खर्राटे की आवाज निकलने लगती है। 

स्लीप एप्निया में भी श्वासनली संकीर्ण या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है, इस वजह से थोड़ी ही देर में नींद खुल जाती है, जिसे एराउजल या जागरण कहा जाता है, क्योंकि व्यक्ति का मस्तिष्क इस स्थिति को भांपकर नींद तोड़ देता है ताकि कंठनली की मांसपेशियां पुनः नियंत्रित हो जाए और श्वास नली को खोल सके। नींद में पॉज़, एप्निया कहलाता है, जो कुछ सेकंड से लेकर कई मिनटों का हो सकता है। यह एक घंटे में पांच बार तक हो सकता है।

स्लीप एप्निया के सामान्य लक्षण: ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे लेना, थकान, दिन के वक्त अनिंद्रा, सांस लेने के लिए चौंककर या घबराकर जागना। स्लीप एप्निया से पीड़ित व्यक्ति को शायद ही यह अहसास होता है कि उसे सोते वक्त सांस लेने में दिक्कत आती है। इसका पता तो दूसरों को लगता है, जब वे इसे होते हुए देखते हैं, अनिंद्रा, एकाग्रता और याददाश्त की दिक्कतें, नंपुसकता या कमजोरी, मूड में बदलाव या चिड़चिड़ापन, रात के वक्त बार-बार पेशाब आने की समस्या, सुबह जागने पर सिरदर्द आदि इसके लक्षण हैं।

खतरा इन्हे अधिक: अधिक वजन या मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों के अलावा डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, हार्ट फ़ेल्योर, एट्रियल फ़िब्रिलेशन (दिल में सुराख) जैसी समस्यों से पीड़ित मरीजों को स्लीप एप्निया की भी जांच करानी चाहिए। यदि किसी के परिवार में ओएसए या खर्राटे की समस्या है, उन्हे इसका खतरा होता है। जिन व्यक्तियों का निचला जबड़ा छोटा और ऊपरी श्वासनली संकीर्ण हो, गले का घेरा अधिक हो, जिनका ट्रॉन्सिल बढ़ा हुआ हो या नाक बंद हो, उन्हे भी स्लीप एप्निया हो सकता है। जो सोते वक्त नींद की गोलियां, दर्द निवारक दवाएं, नशीली दवा तथा अल्कोहल का सेवन करते हैं, उन्हे भी स्लीप एप्निया का खतरा रहता है, क्योंकि ये दवाएं व पदार्थ गले को शिथिल कर उसका घेरा बढ़ा देते हैं।

मैनोपॉज के बाद महिलाओं में: स्लीप एप्निया से महिलाओं में हाइपोथायराइड की समस्या (थायरॉइड हार्मोन कम होना), एक्रोमेगली (ग्रोथ हार्मोन का उच्च स्तर), डिस्ट्रोफ़िज़ आदि जैसे स्नायु रोग आदि की आशंका हो सकती है।

स्लीप एप्निया का इलाज नहीं कराने पर हाइपरटेंशन, स्ट्रोक और हार्ट फ़ेल्योर, का खतरा दोगुना हो जाता है। टाइप 2 डायबिटीज़ मेलिटस का खतरा बढ़ सकता है और स्लीप एप्निया का इलाज नहीं करवाने वाले व्यक्तियों में पांच गुना अधिक अवसाद और याददाश्त खोने की समस्या आम होती है।

इलाज के विकल्प: यदि आप मॉडरेट या गंभीर स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं या आपकी स्वयं-सहायता रणनीतियां अपनाने और लाइफस्टाइल में बदलाव की कोशिशों को कामयाबी नहीं मिल पाई है तो किसी डॉक्टर से संपर्क करें। आमतौर पर इलाज की शुरुआत व्यवहार संबंधी थैरेपी से शुरू होती है। अल्कोहल और नींद की गोलियां जैसी चीजों से बचने को कहा जाता है, चूंकि पीठ के बल सोने से यह तकलीफ हो सकती है, इसलिए करवट बदलकर सोने को कहा जाता है।

ब्रिदिंग डिवाइसेज स्लीप एप्निया के इलाज का अच्छा साधन है। आंशिक से लेकर गंभीर स्लीप एप्निया के लिए पॉज़िटिव एयरफ़्लो प्रेशर (सीपीएपी) सबसे सामान्य इलाज है। इसमें प्रेशराइज्ड एयर के जरिये सोते समय रोगी के एयरवे खुले रखे जाते हैं। रोगी प्लास्टिक का फेशियल मास्क पहने होता है, जो नालियों के जरिये पास में रखी सीपीएपी मशीन से जुड़ा होता है। कुछ लोगों को नाक व त्वचा में जलन की समस्या होती है। इलाज का अंतिम विकल्प सर्जरी है, यह हर रोगी के लिए अलग प्रकार की हो सकती है।

Facts - सीपीएपी को आम बोलचाल में सीपैप कहते है। इस डिवाइस को ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर कॉलिन सुलिवन ने 1981 में बनवाया था।

डॉ. हिमांशु गर्ग
डायरेक्टर, स्लीप केयर सॉल्यूशंस, गुड़गांव