गर्भावस्था के दौरान सावधानियां और देखभाल
बदलती लाइफ स्टाइल और एक्सरसाइज नहीं करने से महिलाओं में मोटापा बढ़ रहा है। वहीं सोलह से तीस साल की उम्र में पिसीओडी यानी पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के केसों में इजाफा हो रहा है। गर्ल्स का हॉर्मोन स्तर बिगड़ने से ओबेस हों रही हैं। इससे उनका शारीरिक विकास उम्र के मुताबिक नहीं हों पा रहा हैं।
एडोलसेंस ऐज़ में पीसीओडी सामान्य समस्या बन चुकी है। इसकी मुख्य वजह गर्ल्स का लंबे समय तक बैठे रहना और जंक फूड खाने से उनका पीरियड साइकिल बिगड़ रहा है। इससे आगे चलकर कंसीव करना भी मुश्किल हों जाता है। सोलह से तीस साल की उम्र में इस बीमारी के केस ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इससे बचने के लिए वजन मेंटेन करना चाहिए। साथ ही हैल्दी डाइट व एक्सरसाइज़ पर फोकस करना चाहिए।
प्रेग्नेंसी में ओबेस से बचें
ओबेस महिलाओं में प्रेग्नेंसी को लेकर परेसानी रहती है। उनके ओबेस होने पर बच्चे का वजन नही बढ़ता। वह हाइपरटेंशन हो जाता है। डिलीवरी में भी परेसानी होती है। ऐसे केसों में महिलाओं को हाई प्रोटीन डाइट लेनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट और फैट युक्त डाइट से बचना चाहिए।
प्रेग्नेंसी में नहीं दी जाती बैड रेस्ट की सलाह
महिलाओं में यह गलतफहमी है की प्रेग्नेंसी में बैड रेस्ट करना चाहिए। प्रेग्नेंसी कोई बीमारी नहीं है। बैड पर और कम्प्युटर के सामने बैठे रहेंगें तो वजन बढ़ेगा। और डिलिवरी में परेशानी होगी इसलिए डॉक्टर्स 0.05 परसेंट केसों में बैड रेस्ट की सलाह देते हैं। महिलाओं को इस समयावधि में दिन में एक से दो घंटे आराम करना चाहिए। सुबह और शाम घूमना चाहिए।
प्रेग्नेंसी में सुबह-शाम 20-20 मिनट वॉक करें
सिजेरियन डिलीवरी जरूरत पड़ने पर की जाती है। प्रेग्नेंसी में कॉम्पलिकेशन से बचने के लिए 20 मिनट सुबह और 20 मिनट शाम वॉक करें। प्रेग्नेंसी के दौरान बताई जाने वाली एक्सरसाइज करें। इससे मसल्स रिलेक्स होंगी। वाटर बर्थिंग को अवॉयड करना चाहिए, विदेशो में भी ट्रेड धीरे-धीरे खत्म हों रहा है। इसमे कॉम्पलिकेशन ज्यादा होते हैं।
डॉ. आदर्श भार्गव, गायनिकोलॉजिस्ट व पूर्व अधीक्षक, जनाना अस्पताल
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