Monday, 30 November 2015

Benefits of Drinking water in the Morning on an empty stomach - In Hindi

Benefits of drinking water in the morning on an empty stomach 
Advantage of Drinking Water in empty stomach in the morning 
सुबह खाली पेट पानी पीने के फायदे

सुबह उठ कर खाली पेट पानी पीने से कई तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है।

  • खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। वैसे तो एक शख्स को सुबह उठकर लगभग 3 से 4 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन आप इस आदत को डालने की सोच रहे हैं तो शुरुआत एक या दो गिलास से कर सकते हैं।
  • सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं। 
  • सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है। खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है।
  • सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए।
  • सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।
  • जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते।

Tuesday, 24 November 2015

Pain in Stomach and Back During Periods in hindi महिलाओं में कमर और पेटदर्द

Pain in Stomach and Back During Periods in hindi 
माहवारी के समय महिलाओं की कमर और पेटदर्द

महिलाओं में कमर और पेटदर्द  की समस्या के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन माहवारी के समय में इसका एक मुख्य कारण है एंडोमेट्रीओसिस। जानते हैं इसके बारे में-

क्या है वजह-

एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की आंतरिक सतह) में हर महीने कई तरह के बदलाव आते है व माहवारी के रूप में इसका कुछ भाग रक्तस्राव के साथ निकाल जाता है। एंडोमेट्रियम जैसी सतह जब गर्भाशय के अलावा अन्य अंगों (ओवरी, फैलोपियन ट्यूब, आंतों आदि) में विकसित हो जाती है, तो यह अवस्था एंडोमेट्रिओसिस कहलाती है, चूंकि एंडोमेट्रियम की प्रवृर्ती संकुचन की होती है इसलिए इन अंगों में भी बेवजह ऐसा होने लगता है, जिनके कारण दर्द की समस्या होती है।

लक्षण व अन्य परेशानियां -

माहवारी के समय पेट के नीचे भाग व कमर में तेज दर्द होना इसका मुख्य लक्षण है। कई बार महिलाओं को असहनीय दर्द की वजह से दर्द निवारक दवाएं भी लेनी पड़ जाती है। ओवरी इससे  सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। कई बार रक्त इकट्ठा होने से यह बड़ी होकर गांठ के रूप में बन जाती है, जिसे चॉकलेट सिस्ट कहते हैं। कुछ महिलाओं में सिस्ट (रसौली) से फैलोपियन ट्यूब, आंतें व मूत्राशय भी चिपक जाते है। ऐसे में गांठ आकार में बढ़ बहुत बड़ा रूप ले लेती है और तमाम परेशानियों का कारण बन जाती है। फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध होने से नि:संतानता की समस्या सामने आती है।

यह है इलाज - 

शुरुआत में दर्द निवारक दवाएं कुछ मदद कर सकती हैं लेकिन दर्द तेज या असहनीय होने पर कई प्रकार के हार्मोन दिए जाते हैं जो टेबलेट या इंजेक्शन के रूप में हो सकते हैं, इन हार्मोन के प्रभाव से कुछ महीनों के लिए माहवारी कृत्रिम रूप से बंद हो जाती है, माहवारी न होने से एंडोमेट्रियम का संकुचन होता है और ना ही दर्द। ऐसे में गांठ के आकार का पता सोनोग्राफी से लगाया जाता है व दूरबीन से इसे सीधा देखा जा सकता है। गांठ बनने की स्थिति में सर्जरी की जाती है जिसे लैप्रोस्कोपिक तकनीक से भी किया जाता है।

विशेषज्ञ की राय- 

माहवारी के दौरान थोड़ा दर्द होने को महिलाएं सामान्य रूप से लेती है। लेकिन जब यह असहनीय होने लगे तो अनदेखी न करें और तुरंत विशेषज्ञ से संमर्क कर उचित इलाज लें।

डॉ. राखी आर्ये, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व सहायक आचार्य, जनाना अस्पताल 

Almond Benefits in hindi

Badam Ke Fayde - बादाम के फायदे  
Benefits of Almonds

संतुलित आहार के साथ यदि नियमित रूप से बादाम खाने की आदत डाली जाए तो सेहतमंद रहा जा सकता है।

कई बीमारियों में लाभकारी : बादाम में प्रोटीन, हृदय के लिए जरूरी अच्छा वसा, विटामिन-ए, ई व डी, राइबोफ्लेविन, फाइबर, कैल्शियम आदि कई खनिज मौजूद होते हैं। रोजाना बादाम खाने से हृदय से जुड़ी परेशानियां, हाई बीपी, अधिक यूरिक एसिड बनने की समस्या व कई अन्य बीमारियों में फायदा होता है। कई शोधों के अनुसार हार्टअटैक, कोरोनरी हार्ट डीजीज, धमनियों में ब्लॉकेज जैसे हृदय संबंधी रोगों की आशंका को कम करने के लिए बादाम को सहायक माना गया है।

सीमित मात्रा में खाएं : कुछ लोगों का मानना है कि मोटे लोगों को बादाम व अन्य ड्राईफ्रूट्स नहीं खाने चाहिए, इससे उनमें वजन और बढ़ जाता है। ऐसा नहीं है सीमित मात्रा में इसे कोई भी खा सकता है। सामान्यत: छोटे बच्चों को 5 व किशोरों और वयस्कों को रोजाना 10-12 बादाम अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए। मोटापा, किडनी संबंधित समस्या व डायबिटीज़ के मरीज विशेषज्ञ की सलहा से इनकी मात्रा को डाइट में शामिल करें।

ध्यान रहे : बादाम के छिलके में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। साथ ही यह विटामिन-बी का बेहतर स्त्रोत है। कुछ लोग इसकी तासीर गर्म मानते हैं और इसे भिगोकर व छिकर खाते हैं। ऐसे में इसका पूरा फाइदा नहीं मिल पाता। इसलिए बादाम को बिना भिगोए ऐसे ही खाएं।

Fibroids Causes Symptoms and treatments

What are  Fibroids and its treatment

Type of Fibroid
फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं -

फाइब्रॉइड्स को  गठानों/ रसौली भी बोलते है जानिए क्या है फाइब्रॉइड्स समस्या –


फाइब्रॉइड्स को लियोम्योमास या म्योमास भी कहा जाता है, क्योंकि ये यूटरस में मौजूद स्मूथ मस्कुलर टिश्यू (म्योमेट्रियम) से बनते हैं। ये छोटे-छोटे बीजों के आकार के रहते हैं। इसे सामान्य तौर पर देखा जा सकता, लेकिन कई बार काफी बड़े हो जाते हैं। इसका कारण या तो यूटरस (गर्भाशय) भी बड़ा हो जाता है या फिर इनकी वजह से मेंसुरल ब्लीडिंग अधिक होने लगती है। यह एक हो जरूरी नहीं, अनेक भी हो सकते हैं ये धीरे-धीरे या फिर तेज गति से बढ़ सकते हैं। ये एक आकार के भी रह सकते हैं। यह सही है की फाइब्रॉइड्स कई बार कैंसर में तब्दील हो जाते हैं, लेकिन 1 फीसदी मामलों में यदि फाइब्रॉइड्स की ग्रोथ काफी तेज है तो इसके लिए पूरी जांच कराई जानी चाहिए। अधिकांश महिलाएं इनके बारे में सजग इसलिए नहीं रहती, क्योंकि इसके लक्षण ही पता नहीं चल पाते हैं। युटरस में फाइब्रॉइड्स के लक्षण तब पता चलते हैं, जब महिलाओं को मेंसुरल ब्लीडिंग अधिक होने लगती है। यह लंबे समय तक चलती है, साथ ही शरीर में नीचे की ओर (पेल्विक रीज़न) दर्द रहता है और बार-बार पेशाब आती है। इसके अलावा कब्ज, कमर दर्द और कमजोरी की शिकायत महिलाओं को रहने लगती हैं। फाइब्रॉइड्स के लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि शरीर में वे कहां, उनका आकार कितना है और उनकी संख्या कितनी है। 

फाइब्रॉइड्स तीन तरह के होते हैं -


1. सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड्स : यूटरस में यूटरिन की लाइनिंग से कैविटी में बनने वाले फाइब्रॉइड्स ये होते हैं। ये लंबे समय तक रहते हैं। इससे ख़ासी ब्लीडिंग होती है। कई बार गर्भवती के लिए ये परेशानी का कारण बन जाते हैं।

2. सबसेरोसल फाइब्रॉइड्स : ऐसे फाइब्रॉइड्स जो यूटरस के बाहर की ओर रहते हैं, सुबसेरोसल फाइब्रॉइड्स कहलाते हैं। कई बार यह यूरिनरी ब्लैडर पर भी दबाव डालने लगते हैं। इससे बार-बार पेशाब की शिकायत होने लगती है। यदि फाइब्रॉइड्स भारी हैं और यूटरस के पीछे की ओर हैं तो ये संभवत: रेक्टम को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसमें एक दबाव-सा हमेशा महसूस होते रहेगा। हो सकता है की इसमें रीढ़ की नसें प्रभावित हो या फिर पीठ में दर्द उभरे।

3. इंट्राम्युरल फाइब्रॉइड्स : कुछ फाइब्रॉइड्स यूटरस कि मांसपेशियों की दीवार पर बनते हैं, जिसे इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड्स कहते हैं। यदि ये आकार में बड़े हैं, तो इससे यूटरस का आकार खराब हो सकता है और इनकी वजह से लंबे पीरियड्स बने रहते हैं और दर्द भी रहता है।

फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं?


ये महिलाओ में प्रजनन आयु बर्ग के दौरान होते हैं। यह पता नहीं चल सका कि इसका वास्तविक कारण क्या है। फिर भी रिसर्च ये कहती है-

जेनेटिक परिवर्तन- कई बार फाइब्रॉइड्स जीन्स में बदलाव के कारण होते हैं। यह सामान्य यूटरिन मसल्स सेल्स से अलग होते हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं कि फाइब्रॉइड्स परिवार की सभी महिलाओं को हैं। 

हॉर्मोन्स : एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन, दो ऐसे हॉर्मोन हैं, जो यूटिरस के भीतरी भाग में प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान इस तरह का डेवलपमेंट करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनसे ही फाइब्रॉइड्स कि ग्रोथ होती है। फाइब्रॉइड्स में ज्यादा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन होते हैं। मैनोपॉज  के बाद ये फाइब्रॉइड्स सिकुड़ जाते हैं, क्योंकि हॉर्मोन का प्रोडक्शन घट जाता है।

ग्रोथ के अन्य कारक - 

मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियां कम खाना, फल न खाना और शराब आदि के सेवन से फाइब्रॉइड्स का जोखिम अधिक रहता है।

फाइब्रॉइड्स और फर्टिलिटी : आमतौर पर फाइब्रॉइड्स गर्भधारण करने या गर्भ में परेशानी नहीं करते हैं। फिर भी इस बात कि संभावना रहती है कि फाइब्रॉइड्स से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो, या फिर गर्भ न ठहर सके। सबम्युकोसल फाइब्रॉइड्स भ्रूण को ठहरने नहीं देते। या कई बार गर्भ गिर जाता है तो इस तरह के मामलों में डॉक्टर फाइब्रॉइड्स को हटा दिए जाने की सलाह देते हैं। बहुत कम यह देखने में आया है कि फाइब्रॉइड्स के कारण फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक हो गई है, या फिर उसमें किसी तरह कि अड़चन हो।

जांच कैसे कराएंगे - 

पेल्विक रीज़न कि सोनोग्राफी से फाइब्रॉइड्स का पता किया जा सकता है। जिन रोगियों में जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उनका कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) भी पता करने को कहा जाता है, ताकि यह देखा जा सके कि एनीमिया तो नहीं है। इसके अलावा अन्य टेस्ट भी होते हैं, ताकि ब्लीडिंग ज्यादा होने या थायरॉइड की आंशंका का भी पता किया जा सके। कई बार सबम्युकोसल फाइब्रॉइड्स के मामले में स्टीरियोस्कोपी कराने को भी कहा जाता है और कभी एमआरआई (मेग्नेटिक रिसोनेंस इमेजिंग) भी। स्टीरियोस्कोपी में सर्जन एक टेलीस्कोप यूटरस तक पहुंचाते हैं। एक सलाइन यूटरस में इंजेक्ट की जाती है, ताकि उसे खोला जा सके और यूटरस की दीवारों पर जांच करते हैं।

कैसे संभालेंगें - 

कई बार महिलाओं को इतने छोटे फाइब्रॉइड्स होते हैं कि उसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। 

इलाज : इसके इलाज से हॉर्मोन्स नियंत्रित होते हैं, जो मंथली पीरियड से संबंधित है। इस तरह के इलाज से फाइब्रॉइड्स को खत्म तो नहीं किया जा सकता, इनको सिकुड़ा जा सकता हैं। दवाओं में गोनाडोट्रोपिन, हॉर्मोन (जीएन-आरएच) को रिलीज करने के लिए दी जाती है। इससे एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन का उत्पादन रुक जाता है, जिसके फलस्वरूप अस्थायी तौर पर माइनोपॉज के बाद कि स्थिति कुछ समय तक बन जाती है। इस कारण से मंथली साइकल रुक जाती है, फाइब्रॉइड्स सिकुड़ जाते हैं और एनीमिया की स्थिति में सुधार आ जाता है। लेकिन यह अस्थायी उपचार है। अन्य गोलियों के उपचार भी हैं, लेकिन इनमें फाइब्रॉइड्स का आकार कम नहीं होता। दर्द से राहत के लिए नॉनस्टरोडियल एंटी इफ़्लेमेटरी ड्रग्स के उपचार भी हैं।

सर्जरी के बिना भी हटते हैं -

एमआरआई की मदद से किए जाने वाले उपचार में भी सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। इसमें कहीं कट नहीं लगता है। साउंड वेव्स से फाइब्रॉइड्स को छोटे-छोटे टिश्यू में बदल देते हैं। लेकिन इसका प्रयोग कम है। क्योंकि ज्यादा पैसा लगता हैं। 

छोटी सर्जरी से-   

कुछ प्रक्रियाएं एसी हैं, जो यूटेरिन फाइब्रॉइड्स को हटा देती हैं, इसमें एम्बोलिक एजेंट्स को यूटरस की सप्लाय आर्टरीज़ में इंजेक्ट करते हैं। इससे फाइब्रॉइड्स को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। इससे ये या तो सिकुड़ने लगते हैं या खत्म हो जाते हैं। ओवरीज़ और अन्य अंगो में रक्त की आपूर्ति न होने के कारण कुछ जटिलताएं सामने आ सकती हैं। फिर भी फाइब्रॉइड्स के लिए सर्जरी में अभी लेप्रोस्कोपिक म्योक्टॉमी का ही चलन है इसमें पेट में तीन-चार छोटे छेदों से दूरबीन के द्वारा ऑपरेशन किया जा सकता है। इसमें छोटे से छेड़ से उपकरण डालकर सर्जरी की जाती है। इस इंस्टूमेंट में कैमरा भी लगा रहता है, जो पेट के भीतर की स्थिति बताता है। कुछ मामलों में यूटरस निकालने का या स्ट्रकटॉमी का ऑपरेशन किया जा सकता है।

डॉ. पूजा शर्मा एमडी, डीएनबी, एफएमआईएस, एंडोस्कोपिक सर्जन (गायनी) बेलव्यू हॉस्पिटल, मुंबई

Colors of Vegetables and their benefits - Green White and Saffron Colore

Green White and Saffron Color vegetables health benefits

हेल्दी डाइट को लेकर हम सभी काफी फ़िक्रमंद रहते हैं। इसके लिए रोज़मर्रा में तरह-तरह की चीजों को भोजन में शामिल करते हैं, लेकिन उनके गुणों को व फ़ायदों की हमें पूरी जानकारी नहीं होती। ये हमारे शरीर के लिए भी अहम है।

गुणों से भरपूर हरा रंग

लौकी : हल्की व सुपाच्य लौकी ज्यादा यूरिन बनाने वाली होती है। इसलिए इसे किडनी के रोगियों के लिए लाभकारी माना जाता है। यह खून को शुद्ध व पतला करने का काम करती है। ह्रदय रोग व उच्च रक्त चाप के लिए फायदेमंद है।

करेला : सेरेनपिन नामक पदार्थ से भरपूर करेला खून को शुद्ध करने के साथ डायबिटीज़ के मरीजों के लिए अच्छा रहता है।

धनिया : इसकी पत्तियों में फेरीपिन नामक त्तव होता है जो आयरन का स्त्रोत है। एनीमिया व किडनी के मरीजों के लिए यह गुणकारी है।

पोदीना : ठंडी प्रकृति का होने के कारण यह मस्तिष्क को तरोताजा बनाकर तनाव कम करता है। पेट व तलवों में जलन, अल्सर व ब्लडप्रेशर नियंत्रित करने में सहायक है।

पेट संबंधी रोग दूर करे सफ़ेद रंग

मूली : यह लिवर सोधन का काम करती है इसलिए लिवर से जुड़ी बीमारियों के लिए लाभकारी है।

मशरूम : पेट संबंधी बीमारियों में फायदेमंद है। एसिडिटी में आराम देने के साथ आंतों की सफाई करता है।

सफ़ेद प्याज व लहसुन : ये शरीर में कोलेस्ट्रोल कम करने, हृदय संबंधी बीमारियों, रक्त का शुद्धीकरण व संचार अच्छा करता है।

छाछ : एकमात्र लिक्विड जो खाने के साथ प्रयोग कर सकते हैं। सुबह के समय लेने से शरीर से एसिड बाहर निकलने का काम करता है व दोपहर में लेने से पाचक कम करता है।

विटामिन सी से भरा नारंगी रंग

नारंगी गाजर : आयरन का अच्छा स्त्रोत है। इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। खून की कमी, आंखों व चर्म रोगों के लिए लाभकारी है।
संतरा : यह विटामिन सी से भरपूर होता है। दांतों व मसूढ़ों संबंधी बीमारियों व ह्रदय रोगों के लिए अच्छा माना जाता है।

पपीता : इसमें पैपेन नामक तत्व होता है जो खाने को पचाने का काम करता है। साथ ही विटामिन ए होने के कारण यह आंखों व त्वचा संबंधी रोगों में भी लाभकारी माना जाता है।


Tuesday, 3 November 2015

Heart Age - How Old Is Your Heart Age In Hindi

Heart Age - How Old Is Your Heart Age In Hindi 
आपकी आयु से अधिक है दिल की उम्र - Medical facts

अमेरिका स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं, आपके जन्म प्रमाणपत्र में लिखी आयु आपके शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग दिल की आयु के बराबर नहीं हो सकती है। कई ऑनलाइन टूल ब्लड प्रेशर, बॉडी मास इंडेक्स और धूम्रपान की स्थिति के आधार पर हृदय की उम्र का अनुमान लगा सकते हैं। दिल से संबन्धित कुछ आंकड़ों पर ध्यान दीजिए...

6 करोड़ 90 लाख अमेरिका में 6 करोड़ 90 लाख वयस्कों के दिल की आयु उनकी वास्तविक आयु से पांच वर्ष अधिक है। यह दिल की बीमारी का संकेत है।

08 वर्ष पुरुष के दिल की आयु उसकी जैविक आयु से औसतन 9 वर्ष अधिक है। महिलाओं के दिल की आयु उनकी वास्तविक आयु से पांच वर्ष अधिक रहती है।

75 प्रतिशत दिल की आयु अधिक होने के करण दिल के दौरे और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा 75 प्रतिशत बढ़ जाता है।

अश्वगंधा की खीर Withania somnifera Health Benefits Ashwagandha In Hindi

Health Benefits Ashwagandha In Hindi

शरीर को मजबूत बनाती अश्वगंधा की खीर

खीर आमतौर पर लोग स्वाद के लिए खाते हैं। लेकिन अश्वगंधा की खीर न सिर्फ स्वाद के लिहाज से बेहतर है बल्कि कई रोगों को दूर करने में भी मददगार है।

लाभ : आर्थराइटिस, वृद्धावस्था की कमजोरी, चक्कर वात की तकलीफ, नर्वस सिस्टम व नाड़ी संबंधी रोगों में फायदेमंद।

ऐसे बनाएं : 1 किलो दूध में 100 ग्राम सामक (व्रत चावल) डालकर पकाएं। पकने के बाद 50-50 ग्राम मेवे व स्वादानुसार चीनी मिलाएं। आखिर में 50 ग्राम अश्वगंधा की जड़ से बना पाउडर डालें। पाउडर डालने के बाद खीर को ज्यादा देर न पकाएं वर्ना औषधीय तत्वों का असर कम हो सकता है।

ध्यान रहे -

कब खाएं : भोजन के बाद या साथ में दिन में एक कटोरी।

ये लोग न खाएं : दूध न पचने की समस्या व कब्ज के रोगी न लें वर्ना उल्टी, पेटदर्द या त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं।

डायबिटीज़ : के मरीज इसमें चीनी न डालें। कॉलेस्ट्रॉल की समस्या वाले रोगी दूध व पानी समान मात्रा में लेकर खीर बनाएं।

वैध जियालाल, आयुर्वेद विशेषज्ञ

Apple health Tip in Hindi

Health Tip - Apple in Hindi
फेफड़े मजबूत रखता है सेब


यदि आप दिनभर प्रदूषण में या स्मोकिंग करने वालों के बीच रहते हैं तो आपको एक सेब रोजाना खाना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सेब में क्यूसेटिन नमक एंटीआक्सीडेंट, फ्लेवोएड व अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जो फेफड़ों को प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचा सकते हैं। साथ ही यह शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम भी करतें हैं। शोध के अनुसार हफ्ते में पांच या ज्यादा सेब खाने से सांस संबंधी बीमारियों की आशंका कम होती है।

Health benefits of fruits and dry fruits in Hindi

Health benefits of fruits and dry fruits in Hindi
फलों एवं ड्राईफ्रूट्स के फायदे 

खराब जीवनशैली, जंकफूड व शारीरिक गतिविधियों के अभाव से मोटापे की समस्या होती है। इससे हृदयरोग, ब्लडप्रेशर, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। मोटापा कम करने के लिए नियमत व्यायाम के साथ कम कैलोरीयुक्त चीजें लेने की जरूरत होती है। जानते इसके बारे में-

फलों से घटेगा वजन -

मौसमी: रोजाना मौसमी का सेवन वजन घटाने में सहायक है। एक अध्ययन के अनुसार इसके जूस को रोजाना पीने से डाइट में बदलाव किए बगैर भी वजन कम किया जा सकता है।

केला : इसमें मौजूद स्टार्च कार्बोहाड्रेट्स जमा नहीं होने देता। साथ ही पोटेशियम मांसपेशियां मजबूत बनाता है और मोटापा कम करता है।

अनार : यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो शरीर से विषैले पदार्थ निकालने का काम करता है। इसमें मौजूद पॉलीफिनोक्स मेटाबॉलिज़्म सुधारने में मदद करता है।

पपीता : यह कम कार्बोहाइड्रेट वाला फल है जो वजन घटाता है। शरीर का तमाम नियंत्रित रखता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में सहायक है। इससे नर्वस सिस्टम को भी ऊर्जा मिलती है।

नाशपाती : एक नाशपाती में समान्यत: 20 ग्राम हैल्दी फैट होता है जो मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है और साथ ही वजन कम करने वाले हार्मोन का निर्माण करता है।

ड्राईफ्रूट्स के फायदे  -

सूखे मेवे : किशमिश, काजू, व छुहारे को ताजा फलों के साथ खाने से वजन घटता है। इनमें मौजूद मिनरल्स व विटामिन, कोशिकाओं की क्षमता बढ़ते हैं व रोग प्रतिरोधक तंत्र मजबूत करते हैं।

नारियल : इसमें एमसीएफर होता है जो मेटाबॉलिज़्म को सुधरता है। इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है। थायरॉइड ग्रंथियों के लिए कोकोनट ऑयल बेहद फायदेमंद है।

Health benefits of green vegetables and cereal

Health Benefits and tips of Green Vegetables
सब्जियों का भरपूर प्रयोग



टमाटर : विटामिन-सी से भरपूर टमाटर में पाया जाने वाला अमीनो एसिड मोटापे में सहायक है। कार्डीयोवैस्क्युलर रोगियों के लिए टमाटर काफी फायदेमंद है।

फलियां : ये प्रोटीन व फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत है। इसकी सब्जी खाने के बाद लंबे समय तक भूख का अहसास नहीं होता जिससे ओवरईटिंग नहीं होती और शरीर में कैलोरी की कम मात्रा पहुंचती हैं। 

पालक : इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोर्स, विटामिन-ए, बी-6, सी व के पाए जाए हैं। यह वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद है।

हरी सब्जियां : इनमें कम कैलोरी, ज्यादा फाइब व विटामिन होते हैं। ये हृदय रोग की आशंका को कम करती है और साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

अनाज की शक्ति पहचानें - 

साबुत अनाज: साबुत अनाज से पाचन क्रिया दुरुस्त होती है। मेटाबॉलिज़्म में सुधार होता है और ये वजन घटाने में मददगार होते हैं। इनमें हृदय संबंधी रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज़ व कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।

जौ : इसमें अन्य अनाज की तुलना में फाइबर ज्यादा होता। यह पाचन क्रिया दुरुस्त करता है साथ ही एंटीऑक्सीडेंट्स होने से हृदयरोग का खतरा कम करता है। ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल स्तर घटाने मेँ सहायक है।

ब्राउन राइस : इसमें विटामिन ई व फाइबर, सेलेनियम, मैग्नेस और मैगनेशियम पाया जाता है। यह वज़न घटाता है।

मूँगफली : इसमें ऐसे फाइबर हैं, जो भूख मिटाते हैं और ओवरईटिंग से बचाते हैं। कच्ची मूंगफली ही खाएं, रोस्टेड या सॉल्टेड नहीं।


Yaddasht kaise badhaye in hindi - Develop Memory

Yaddasht badhane ke liye gharelu nuskhe

Develop Memory with food items 
इन चीजों को खाने से बढ़ेगी याददाश्त

अगर आप भी छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं तो इन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

टमाटर : इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है। रोजाना सलाद के रूप में खाने से याददाश्त अच्छी रहती है।

किशमिश : इसमें मौजूद विटामिन-सी दिमाग को तरोताजा रखता है। रोजाना सुबह के समय 15-20 किशमिश भिगोकर खाने से खून की कमी दूर होती है और दिल मजबूत होता है।

कद्दू के बीज : इसमें जिंक तत्व होता है। जो मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाकर याददाश्त मजबूत करता है।

जैतून का तेल : इसे खाना बनाने में प्रयोग कर सकते है। इसके अलावा रोटी पर देशी घी के बजाय इसे लगाकर भी खाया जा सकता है। यह दिमाग को ताकत देता है।

परहेज करें : अधिक नमक, शक्कर, तले-भुने पदार्थ व फास्ट फूड दिमाग पर विपरीत असर डालते हैं।



Cabbage Health Tip In Hindi

Patta Gobhi and Ulcer
पत्तागोभी से अल्सर में लाभ
Cabbage Health Tip In Hindi


पत्तागोभी के रस में विटामिन-यू नामक ऐसा दुर्लभ विटामिन पाया जाता है जो काफी असरदार अल्सर प्रतिरोधक है। पत्तागोभी का रस पीने से पोष्टिक अल्सर यानी पेट के घाव ठीक हो जाते हैं। विटामिन-यू का यू अक्षर लैटिन भाषा के शब्द यूलस से लिया गया है जिसका अर्थ अल्सर होता है। रोजाना सुबह-शाम एक कप ताजा पत्तागोभी का रस पीने से अल्सर में आराम मिलता है।


Tips for eye care in hindi

Tips for eye care in hindi
सावधानी बरतकर बचें आखों के रोंगों से

आंखों की परेशानी आजकल लगभग सभी आयुवर्ग के लोगों में आम होती जा रही है। मोतियाबिंद, कालापानी व आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं छोटे बच्चों में भी देखने को मिल जाती हैं। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ सुरेश कुमार पाण्डेय से जानते हैं इनके बारे में-

मोतियाबिंद की समस्या-

बढ़ती उम्र, सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में अधिक समय तक रहना व स्टेरॉइडयुक्त आईड्रॉप का लंबे समय तक प्रयोग करने से मोतियाबिंद होता है। 

बचाव : धूप में निकलते समय यूवी प्रोटेक्शन चश्मा पहनें। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी आईड्रॉप का प्रयोग न करें। इसके इलाज का विकल्प सर्जरी या लैंस प्रत्यारोपण है जो किसी भी मौसम में कराया जा सकता है। सर्जरी के लिए मोतियाबिंद के पकने का इंतजार न करें।

कालापानी की आशंका-

सही समय पर मोतियाबिंद का इलाज न होने से यह पककर फूट सकता है जिससे कालापानी की समस्या हो सकती है। 

बचाव : 40 की आयु के बाद आंखों की जरूरी जांचें करवाएं। डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाओं को समय पर लें।

रेटीना से जुड़ी परेशानी -

डायबिटीज़ व हाई बीपी के मरीजों में रेटीना संबंधी तकलीफ होने की आशंका अधिक होती है। 

बचाव : ब्लड शुगर नियंत्रित रखें। 

बच्चों में बीमारी -

कई बार चोट लगने या आनुवांशिक कारणों से बच्चों में नेत्र संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान यदि महिला में रूबेला सिंड्रोम की वजह से इंफेक्शन हो जाए तो इसका वायरस गर्भस्थ शिशु की आंख में जा सकता है। इससे जन्म के बाद उसे मोतियाबिंद, कम सुनाई देना या हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं। कई बार प्री-मेच्योर डिलीवरी के बाद बच्चों को दिए गए ऑक्सीज़न की वजह से भी आंख में हो रही सामान्य दिक्कते भविष्य में आंख संबंधी अन्य रोगों का कारण बन सकती है। जन्म के 4-6 हफ्ते बाद बच्चे की नेत्र संबंधी जांच कराना ठीक रहता है।

ध्यान रखें : लगातार कम्प्युटर पर काम करने के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर में आंखों को आराम दें। ऐसा न करने से कॉर्निया (पारदर्शी पुतली) प्रभावित हो सकता है। आंख में चोट लागने या धूल-मिट्टी गिरने पर आंखों को न रगड़े क्योंकि इससे घाव बन सकता है, ऐसे में आंख को ठंडे पानी से धोएं।


Rheumatoid Arthritis in hindi

What is Rheumatoid Arthritis, its Symptoms, 

Treatment and Diet - रुमेटाइड आर्थराइटिस in Hindi

जोड़ों को जकड़ता है रुमेटाइड आर्थराइटिस

रुमेटाइड आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्ति के जोड़ों में दर्द व सूजन आ जाती है जिससे इनका मूवमेंट कम हो जाता है। वैसे इस बीमारी से शरीर का कोई भी जोड़ प्रभावित हो सकता है, लेकिन ज्यादातर यह समस्या हाथों व पैरों के जोड़ों में देखने को मिलती है। यह परेशानी किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकती है। पर आमतौर पर इसके लक्षण 40-60 की उम्र के बीच सामने आते हैं साथ ही पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग से अधिक ग्रसित होती है।

ये हैं लक्षण-

यह ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें रोग प्रतिरोधक तंत्र की कुछ कोशिकाएं सही तरीके से कम नहीं कर पाती और हमारे स्वस्थ उत्तकों पर हमला करना शुरू कर देती हैं। जोड़ों में जकड़न, वजन कम होना, बुखार बने रहना, भूख कम लगना आदि इसके प्रारंभिक लक्षण हैं। जोड़ों में जकड़न की समस्या सुबह के समय एक-दो घंटे या फिर दिनभर भी हो सकती है। 

बच्चों में परेशानी- 

बच्चों में यह दिक्कत 16 या इससे कम उम्र में देखने को मिलती है। इसे जुवेनाइल रुमेटाइड आर्थराइटिस कहा जाता है। सुबह उठने के बाद पैर से लगड़ाकर चलना व एक या दोनों आंखें लाल होना इसके प्रारंभिक लक्षण हैं। ये परेशानी बच्चों में थोड़े दिनों के लिए या जीवनपर्यत भी हो सकती है। इसके कारण बच्चों का विकास रुक सकता है।

कारण-

यह समस्या आनुवांशिक वजहों से हो सकती है।
हार्मोन संबंधी परेशानी होने से स्त्रियॉं में इसका खतरा बढ़ जाता है।
जिन लोगों के दातों व आंतो में बार-बार इन्फेक्शन होता है, उनमे भी इसकी आशंका होती है।
धूम्रपान व अन्य नशीले व्यंजनों से भी बीमारी का जोखिम बढ़ता है।
थायरॉइड के मरीजों में भी इसका खतरा अधिक होता है।

यह करें-

दर्द वाले स्थान पर ठंडा सेक करें। इससे दर्द व सूजन में राहत मिल सकती है।
अधिक परिश्रम वाले काम के दौरान बीच-बीच में थोड़ा आराम करें।
आठ घंटे की पूरी नींद लें।
फिजियोथैरेपिस्ट की मदद से ऐसे व्यायाम करें जिनसे दर्द में राहत मिले।
डॉक्टर के अनुसार समय पर दवाएं लें।
जिन लोगों का 40 वर्ष की उम्र से पहले जोड़ प्रत्यारोपण हुआ है, वो भी डॉक्टरी सलहा से समय-समय पर आर्थराइटिस की जांच करवाते रहें।

ऐसे पता चलती है बीमारी-

खून की जांच : इसमें खून की समान्य जांच के जरिए डॉक्टर आरए फैक्टर, ईएसआर, सीआरएपी, ब्लड काउंट, एएनए व यूरिक एसिड आदि के स्तर को देख कर रोग का पता लगाते हैं।

रेडियोग्राफ़िक जांच : हड्डियों में किसी प्रकार की क्षति का पता लगाने केलिए कई बार एक्स-रे व एमआरआई भी करवाते हैं।

इलाज-

इसमें चिकित्सक स्टेरॉइड्स रहित दवाओं के जरिये सुबह होने वाली जकड़न, सूजन व दर्द को नियंत्रित करते हैंल साथ ही एंटी रुमेटिक दवाओं की मदद से बीमारी को आगे बढ़ने से रोकते हैं। यदि जोड़ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं व मरीज असहनीय दर्द से पीड़ित है तो ऐसी स्थिति में रोगी को जोड़ प्रत्यारोपण की सलहा दी जाती है।

गर्भवती महिलाएं ध्यान रखें-

गर्भावस्था के दौरान स्वाभाविक रूप से बीमारी का असर कम हो जाता है। लेकिन शिशु को जन्म देने के तीन माह बाद यह परेशानी पहले की तुलना में अधिक गंभीर होकर सामने आ सकती है। इसलिए ऐसी महलाएंजो गर्भधारण से पहले ही इस बीमारी से पीड़ित रही हैं, वे गर्भ नियोजन से तीन माह पूर्व इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें। ताकि वे आवश्यकताअनुसार दवाओं में बदलाव करके भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की परेशानी को आगे बढ़ने से रोक सके।

अधिक दिनों की अनदेखी से-

जोड़ो की भीतरी परत में सूजन होने के कारण कार्टिलेज व हड्डी दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में हड्डियों का आकार विकृत हो सकता है।
जोड़ो में दर्द व गतिविधि कम या बंद हो सकती है।
फेफडों की भितरी परत हृदय के आस-पास व रक्तवाहिनियों में सूजन आ सकती है।
खून की कमी होने लगती है।
सफ़ेद रक्त कणिकाओं में कमी होने से कई बार प्लीहा (रक्त को शुद्ध करने का काम करता है) का आकार बड़ा हो जाता है।

लिव वेल – धूम्रपान व अन्य नशीली चीजों से भी हो सकती है रुमेटाइड आर्थराइटिस की बीमारी।

कैल्शियम व आयरनयुक्त पदार्थ जैसे दूध व दूध से बनी चीजें, फल, हरी सब्जियां व अंकुरित अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें।

डॉ. भारत के. सिंह, गठिया एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ

After Delivery Tips in hindi - Foods to eat after your delivery

Care After Pregnancy In Hindi

Foods to eat after your delivery
मां बनने के बाद ऐसे रखेँ अपना खयाल


After Delivery Tips in hindi : डिलीवरी के बाद मांओं को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कब्ज, कमजोरी, शरीर में दर्द आदि से बचने और सेहत को बेहतर बनाने के लिए दादी-नानी प्रसूता को कई तरह की पोषक चीजें खिलाती हैं। जानते हैं इनके बारे में-
after delivery care tips in hindi
खजूर के लड्डू :  खजूर में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कब्ज को दूर करता है। इसमें मौजूद आयरन खून बढ़ाने में मददगार है। इसे खाने से थकान व कमजोरी कम होती है।

सौंफ का पानी : प्रसव के बाद पाचन प्रक्रिया सही रखने के लिए सौंफ का पानी फायदेमंद है।

गोंद के लड्डू : खाने वाली गोंद, मूंग की दाल, सोयाबीन का आटा और ड्राईफ्रूट्स को मिलाकर लड्डू बनाएं। इनमें मां के शरीर को प्रोटीनव अन्य पोषक तत्व मिलेंगे।

अजवाइन का परांठा : गेहूं से बना अजवाइन का परांठा फाइबर का अच्छा स्त्रोत है। इससे गर्भाशय की समस्याएं ठीक होती है साथ ही पाचनक्रिया दुरुस्त रहती है।

व्यायाम जरूरी : सेहतमंद रहने के लिए खानपान के साथ नियमित हल्की एकसरसाइज करें। इससे मांसपेशियां लचीली ओ हड्डियां मजबूत होती है।

Uses of Patharchatta Plant in Hindi

Uses of Patharchatta plant in Hindi
Patharchatta plant for kidney stone
स्टोन व यूरिन तकलीफ में उपयोगी पत्थरचट्टा

आयुर्वेद में पत्थरचट्टा के पौधे को किडनी से जुड़े रोगों के इलाज में उपयोगी माना गया है। इसे पर्णबीज भी कहते हैं।

पत्थरचट्टा विशेषता : इसके पत्ते को मिट्टी में गाड़ देने से ही यह उस स्थान पर उग जाता है। तासीर में सामान्य होने की वजह से इसका प्रयोग किसी भी मौसम में कर सकते हैं। इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।

औषधीय गुण :  महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज, पेशाब में जलन व पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या में लाभकारी है। साथ ही इसके सेवन से 10-15 एमएम तक की पथरी पेशाब के जरिये बाहर निकाल जाती है।

ऐसे करे प्रयोग - 

इसके 4-5 पत्तों को एक गिलास पानी में पीसकर सुबह-शाम जूस के रूप में लगभग 1-2 माह तक पिएं। जूस के अलावा पत्तों को चबाकर व पकोड़े बना कर भी खाया जा सकता है। स्वस्थ व्यक्ति भी यदि इसके पत्तों का सेवन नियमित रूप से करे तो वह कई परेशानियों से बच सकता है।

-वैद्य जियालाल, आयुर्वेद विशेषज्ञ 

Semolina or Suji Health Benefits in hindi

Semolina / Suji or Sooji Health Benefits in Hindi
कई तरह से फायदेमंद है सूजी का प्रयोग

हैल्दी ब्रेकफ़ास्ट के लिए सूजी का प्रयोग हलवा, इडली या उपमा के तौर पर किया जाता है। खाने में हल्की व सुपाच्य सूजी गेहूं से बनी होती है। कई जगहों पर इसे रवा के नाम से भी जाना जाता है। जानते हैं इसके फायदों के बारे में-  

ऊर्जा का स्त्रोत : सुबह इससे बना नाश्ता करने से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। नाश्ते में इसके साथ यदि सब्जियों का भी प्रयोग किया जाए तो यह अधिक पौष्टिक हो जाती है। 

ह्रदय संबंधी रोगों में : सूजी दिल के लिए भी अच्छी है। हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम करने के साथ हार्टअटैक से भी बचाती है व रक्तसंचार को सही रखती है। 

पाचनतंत्र : इसमें मौजूद फाइबर पाचनक्रिया को दुरुस्त रखने में मददगार है। इसमें कैल्शियम, सेलेनियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम जैसे कई मिनरल्स होते हैं जो पाचनतंत्र को सही रखने के लिए जरूरी है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक : इसमें पाया जाने वाला सेलेनियम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। यह कई तरह के इंफेक्शन से बचाता है साथ ही प्रतिरोधक तंत्र को अनेक प्रकार की बिमारियों से लड़ने के लिए तैयार करता है।

एनीमिया में लाभकारी : सूजी में पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है। इससे शरीर में खून की कमी नहीं होती व विभिन्न अंगों को भरपूर एनर्जी मिलती रहती है।

मजबूत नर्वस सिस्टम : इसमें मौजूद फॉस्फोरस, जिंक, मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को सही रखने में मदद करते हैं। साथ ही प्रोटीन की भरपूर मात्रा त्वचा व मांसपेशियों के लिए लाभकारी है।

डाइट रहेगी नियंत्रित : सूजी की थोड़ी सी मात्रा खाने से ही पेट भर जाता व जल्द भूख नहीं लगती। ऐसे में ओवरईटिंग से बचा जा सकता है।