What are Fibroids and its treatment
Type of Fibroid
फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं -
फाइब्रॉइड्स को गठानों/ रसौली भी बोलते है जानिए क्या है फाइब्रॉइड्स समस्या –
फाइब्रॉइड्स को लियोम्योमास या म्योमास भी कहा जाता है, क्योंकि ये यूटरस में मौजूद स्मूथ मस्कुलर टिश्यू (म्योमेट्रियम) से बनते हैं। ये छोटे-छोटे बीजों के आकार के रहते हैं। इसे सामान्य तौर पर देखा जा सकता, लेकिन कई बार काफी बड़े हो जाते हैं। इसका कारण या तो यूटरस (गर्भाशय) भी बड़ा हो जाता है या फिर इनकी वजह से मेंसुरल ब्लीडिंग अधिक होने लगती है। यह एक हो जरूरी नहीं, अनेक भी हो सकते हैं ये धीरे-धीरे या फिर तेज गति से बढ़ सकते हैं। ये एक आकार के भी रह सकते हैं। यह सही है की फाइब्रॉइड्स कई बार कैंसर में तब्दील हो जाते हैं, लेकिन 1 फीसदी मामलों में यदि फाइब्रॉइड्स की ग्रोथ काफी तेज है तो इसके लिए पूरी जांच कराई जानी चाहिए। अधिकांश महिलाएं इनके बारे में सजग इसलिए नहीं रहती, क्योंकि इसके लक्षण ही पता नहीं चल पाते हैं। युटरस में फाइब्रॉइड्स के लक्षण तब पता चलते हैं, जब महिलाओं को मेंसुरल ब्लीडिंग अधिक होने लगती है। यह लंबे समय तक चलती है, साथ ही शरीर में नीचे की ओर (पेल्विक रीज़न) दर्द रहता है और बार-बार पेशाब आती है। इसके अलावा कब्ज, कमर दर्द और कमजोरी की शिकायत महिलाओं को रहने लगती हैं। फाइब्रॉइड्स के लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि शरीर में वे कहां, उनका आकार कितना है और उनकी संख्या कितनी है।
फाइब्रॉइड्स तीन तरह के होते हैं -
1. सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड्स : यूटरस में यूटरिन की लाइनिंग से कैविटी में बनने वाले फाइब्रॉइड्स ये होते हैं। ये लंबे समय तक रहते हैं। इससे ख़ासी ब्लीडिंग होती है। कई बार गर्भवती के लिए ये परेशानी का कारण बन जाते हैं।
2. सबसेरोसल फाइब्रॉइड्स : ऐसे फाइब्रॉइड्स जो यूटरस के बाहर की ओर रहते हैं, सुबसेरोसल फाइब्रॉइड्स कहलाते हैं। कई बार यह यूरिनरी ब्लैडर पर भी दबाव डालने लगते हैं। इससे बार-बार पेशाब की शिकायत होने लगती है। यदि फाइब्रॉइड्स भारी हैं और यूटरस के पीछे की ओर हैं तो ये संभवत: रेक्टम को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसमें एक दबाव-सा हमेशा महसूस होते रहेगा। हो सकता है की इसमें रीढ़ की नसें प्रभावित हो या फिर पीठ में दर्द उभरे।
3. इंट्राम्युरल फाइब्रॉइड्स : कुछ फाइब्रॉइड्स यूटरस कि मांसपेशियों की दीवार पर बनते हैं, जिसे इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड्स कहते हैं। यदि ये आकार में बड़े हैं, तो इससे यूटरस का आकार खराब हो सकता है और इनकी वजह से लंबे पीरियड्स बने रहते हैं और दर्द भी रहता है।
फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं?
ये महिलाओ में प्रजनन आयु बर्ग के दौरान होते हैं। यह पता नहीं चल सका कि इसका वास्तविक कारण क्या है। फिर भी रिसर्च ये कहती है-
हॉर्मोन्स : एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन, दो ऐसे हॉर्मोन हैं, जो यूटिरस के भीतरी भाग में प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान इस तरह का डेवलपमेंट करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनसे ही फाइब्रॉइड्स कि ग्रोथ होती है। फाइब्रॉइड्स में ज्यादा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन होते हैं। मैनोपॉज के बाद ये फाइब्रॉइड्स सिकुड़ जाते हैं, क्योंकि हॉर्मोन का प्रोडक्शन घट जाता है।
ग्रोथ के अन्य कारक -
मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियां कम खाना, फल न खाना और शराब आदि के सेवन से फाइब्रॉइड्स का जोखिम अधिक रहता है।
फाइब्रॉइड्स और फर्टिलिटी : आमतौर पर फाइब्रॉइड्स गर्भधारण करने या गर्भ में परेशानी नहीं करते हैं। फिर भी इस बात कि संभावना रहती है कि फाइब्रॉइड्स से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो, या फिर गर्भ न ठहर सके। सबम्युकोसल फाइब्रॉइड्स भ्रूण को ठहरने नहीं देते। या कई बार गर्भ गिर जाता है तो इस तरह के मामलों में डॉक्टर फाइब्रॉइड्स को हटा दिए जाने की सलाह देते हैं। बहुत कम यह देखने में आया है कि फाइब्रॉइड्स के कारण फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक हो गई है, या फिर उसमें किसी तरह कि अड़चन हो।
जांच कैसे कराएंगे -
कैसे संभालेंगें -
कई बार महिलाओं को इतने छोटे फाइब्रॉइड्स होते हैं कि उसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं।
इलाज : इसके इलाज से हॉर्मोन्स नियंत्रित होते हैं, जो मंथली पीरियड से संबंधित है। इस तरह के इलाज से फाइब्रॉइड्स को खत्म तो नहीं किया जा सकता, इनको सिकुड़ा जा सकता हैं। दवाओं में गोनाडोट्रोपिन, हॉर्मोन (जीएन-आरएच) को रिलीज करने के लिए दी जाती है। इससे एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन का उत्पादन रुक जाता है, जिसके फलस्वरूप अस्थायी तौर पर माइनोपॉज के बाद कि स्थिति कुछ समय तक बन जाती है। इस कारण से मंथली साइकल रुक जाती है, फाइब्रॉइड्स सिकुड़ जाते हैं और एनीमिया की स्थिति में सुधार आ जाता है। लेकिन यह अस्थायी उपचार है। अन्य गोलियों के उपचार भी हैं, लेकिन इनमें फाइब्रॉइड्स का आकार कम नहीं होता। दर्द से राहत के लिए नॉनस्टरोडियल एंटी इफ़्लेमेटरी ड्रग्स के उपचार भी हैं।
सर्जरी के बिना भी हटते हैं -
छोटी सर्जरी से-
डॉ. पूजा शर्मा एमडी, डीएनबी, एफएमआईएस, एंडोस्कोपिक सर्जन (गायनी) बेलव्यू हॉस्पिटल, मुंबई
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