What Is Sleep Apnea and its cause symptoms treatment
स्लीप एप्निया आम समस्या है, जिसमें कई बार सोते वक्त व्यक्ति की सांस की नली आंशिक या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है। करीब 5 फीसदी पुरुष और 3 फीसदी महिलाएं स्लीप एप्निया से पीड़ित होते हैं। इससे दिन भर नींद आने से रकचाप बढने जैसी समस्याओं के साथ दिल के रोग व डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।
स्लीप एप्निया और खर्राटे, दोनों एक जैसी समस्याएं लगती हैं, लेकिन उनमें फर्क है, जब सोते वक्त जीभ की मांसपेशियां एवं ऊपरी श्वसन नली विश्राम करने लगती हैं तो इस वजह से उस नली में आंशिक या पूर्ण रूप से व्यवधान पैदा होने लगता है। खर्राटे की स्थिति में श्वास नली थोड़ी संकीर्ण हो जाती है, जिस वजह से उसमें काफी कंपन पैदा होता है, जिससे खर्राटे की आवाज निकलने लगती है।
स्लीप एप्निया में भी श्वासनली संकीर्ण या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है, इस वजह से थोड़ी ही देर में नींद खुल जाती है, जिसे एराउजल या जागरण कहा जाता है, क्योंकि व्यक्ति का मस्तिष्क इस स्थिति को भांपकर नींद तोड़ देता है ताकि कंठनली की मांसपेशियां पुनः नियंत्रित हो जाए और श्वास नली को खोल सके। नींद में पॉज़, एप्निया कहलाता है, जो कुछ सेकंड से लेकर कई मिनटों का हो सकता है। यह एक घंटे में पांच बार तक हो सकता है।
स्लीप एप्निया के सामान्य लक्षण: ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे लेना, थकान, दिन के वक्त अनिंद्रा, सांस लेने के लिए चौंककर या घबराकर जागना। स्लीप एप्निया से पीड़ित व्यक्ति को शायद ही यह अहसास होता है कि उसे सोते वक्त सांस लेने में दिक्कत आती है। इसका पता तो दूसरों को लगता है, जब वे इसे होते हुए देखते हैं, अनिंद्रा, एकाग्रता और याददाश्त की दिक्कतें, नंपुसकता या कमजोरी, मूड में बदलाव या चिड़चिड़ापन, रात के वक्त बार-बार पेशाब आने की समस्या, सुबह जागने पर सिरदर्द आदि इसके लक्षण हैं।
खतरा इन्हे अधिक: अधिक वजन या मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों के अलावा डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, हार्ट फ़ेल्योर, एट्रियल फ़िब्रिलेशन (दिल में सुराख) जैसी समस्यों से पीड़ित मरीजों को स्लीप एप्निया की भी जांच करानी चाहिए। यदि किसी के परिवार में ओएसए या खर्राटे की समस्या है, उन्हे इसका खतरा होता है। जिन व्यक्तियों का निचला जबड़ा छोटा और ऊपरी श्वासनली संकीर्ण हो, गले का घेरा अधिक हो, जिनका ट्रॉन्सिल बढ़ा हुआ हो या नाक बंद हो, उन्हे भी स्लीप एप्निया हो सकता है। जो सोते वक्त नींद की गोलियां, दर्द निवारक दवाएं, नशीली दवा तथा अल्कोहल का सेवन करते हैं, उन्हे भी स्लीप एप्निया का खतरा रहता है, क्योंकि ये दवाएं व पदार्थ गले को शिथिल कर उसका घेरा बढ़ा देते हैं।
मैनोपॉज के बाद महिलाओं में: स्लीप एप्निया से महिलाओं में हाइपोथायराइड की समस्या (थायरॉइड हार्मोन कम होना), एक्रोमेगली (ग्रोथ हार्मोन का उच्च स्तर), डिस्ट्रोफ़िज़ आदि जैसे स्नायु रोग आदि की आशंका हो सकती है।
स्लीप एप्निया का इलाज नहीं कराने पर हाइपरटेंशन, स्ट्रोक और हार्ट फ़ेल्योर, का खतरा दोगुना हो जाता है। टाइप 2 डायबिटीज़ मेलिटस का खतरा बढ़ सकता है और स्लीप एप्निया का इलाज नहीं करवाने वाले व्यक्तियों में पांच गुना अधिक अवसाद और याददाश्त खोने की समस्या आम होती है।
इलाज के विकल्प: यदि आप मॉडरेट या गंभीर स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं या आपकी स्वयं-सहायता रणनीतियां अपनाने और लाइफस्टाइल में बदलाव की कोशिशों को कामयाबी नहीं मिल पाई है तो किसी डॉक्टर से संपर्क करें। आमतौर पर इलाज की शुरुआत व्यवहार संबंधी थैरेपी से शुरू होती है। अल्कोहल और नींद की गोलियां जैसी चीजों से बचने को कहा जाता है, चूंकि पीठ के बल सोने से यह तकलीफ हो सकती है, इसलिए करवट बदलकर सोने को कहा जाता है।
ब्रिदिंग डिवाइसेज स्लीप एप्निया के इलाज का अच्छा साधन है। आंशिक से लेकर गंभीर स्लीप एप्निया के लिए पॉज़िटिव एयरफ़्लो प्रेशर (सीपीएपी) सबसे सामान्य इलाज है। इसमें प्रेशराइज्ड एयर के जरिये सोते समय रोगी के एयरवे खुले रखे जाते हैं। रोगी प्लास्टिक का फेशियल मास्क पहने होता है, जो नालियों के जरिये पास में रखी सीपीएपी मशीन से जुड़ा होता है। कुछ लोगों को नाक व त्वचा में जलन की समस्या होती है। इलाज का अंतिम विकल्प सर्जरी है, यह हर रोगी के लिए अलग प्रकार की हो सकती है।
Facts - सीपीएपी को आम बोलचाल में सीपैप कहते है। इस डिवाइस को ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर कॉलिन सुलिवन ने 1981 में बनवाया था।
डॉ. हिमांशु गर्ग
डायरेक्टर, स्लीप केयर सॉल्यूशंस, गुड़गांव