Wednesday, 24 February 2016

डायबिटीज Diabetes Symptoms Prevention and Treatment

डायबिटीज  Diabetes Symptoms Prevention and Treatment
डायबिटीज : पहले ही करें कंट्रोल

डायबिटीज Diabetes Symptoms Prevention and Treatment: 7% अतिरिक्त शरीर का वजन संतुलित आहार की मदद से कम करने पर डायबीटिज होने का 58 फीसदी खतरा कम हो जाता है। (स्त्रोत : यूएस बेस्ड प्रिवेंशन प्रोग्राम के अनूसार)

डायबिटीज नहीं हुई है पर होने की संभावना है, ऐसे में इन बातों को अपनाकर डायबिटीज से बच सकते हैं...

अगर डायबिटीज नहीं हुई है लेकिन ब्लड शुगर लेवल डायबिटीज के खतरे के निशान के आसपास है तो डायबिटीज कभी भी हो सकती है। शुगर के स्तर को नियंत्रित करके आप टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट स्ट्रोक और हृदय रोगों को होने से पहले ही रोक सकते हैं।

मिश्रित अनाज से बना भोजन कीजिए-

लो जीआई (ग्लाइसीमिक इंडेक्स) फूड खाने से मीठा खाने की इच्छा भी कम होती है। इसलिए खाने में कोई एक अनाज लेने की बजाए गेहूं, रागी, बाजरा, ज्वार, चना आदि शामिल करें। खाने में अलग-अलग तरह की दालों का सेवन करने से विटामिन और मिनरल्स मिल जाता है। रोजाना 2 ग्राम दालचीनी शामिल करने से डायबिटीज और प्री डायबिटीज वाले दोनों लोगों को फायदा होगा। यह ब्लड शुगर लेवल को कम करती है।

ब्लड शुगर का स्तर जांचते रहिए-

जिनका कद के अनुसार वजन 25 से ज्यादा है और घर में वंशानुगत तौर पर कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप के साथ डायबिटीज है या फिर गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज थी। तो ब्लड शुगर की जांच कराते रहना चाहिए।

व्यायाम करने से होगा फायदा-

20 मिनट तक अपनी कुर्सी पर बैठे रहने के बाद एक बार जरूर अपनी जगह से उठकर थोड़ा चलें। यह ब्लड शुगर को बढ़ाने से रोकेगा। खाने के बाद इंसुलिन को बढ़ाने वाली मांसपेशियां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। जिम में सप्ताह में 150 मिनट कार्डियो और वेट ट्रेनिंग करने से फायदा होगा। रोजाना 30 मिनट पैदल चलना भी अच्छा व्यायाम है।

कम सोने से बढ़ सकता है शुगर लेवल-

जो लोग 6 साल तक सप्ताह में 1 दिन 6 घंटे से कब सोते हैं उन्हे डायबिटीज होने का खतरा 4 गुना ज्यादा होता है। जो लोग सप्ताह में 4 दिन 4.5 घंटे की नींद लेते हैं। उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।

दवाइयां ले सकते हैं-

मेटफॉरिन दवाई टाइप-2 डायबिटीज के मरीज ले सकते हैं। जो ग्लूकोज को कम करने और इंसुलिन की सेंसेटिविटी को बढ़ाती है। अगर उम्र 45 साल से कम है और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 35 से ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह पर लें।

ज्यूडिथ फ़्रेडकिन, एमडी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज, डाइजेस्टीव एंड किडनी डिसीज बेठेस्डा मैरीलैंड, अमेरिका

आयोडीन iodine health benefits and Food Supplements

आयोडीन iodine health benefits and Food Supplements

Importance of iodine in the human body : सेहत खाने में आयोडीन का होना बहुत जरूरी है, लेकिन यह नमक के अलावा और भी चीजों में पाया जाता है। 

खाने में आयोडीन क्यों और कितना लेना फायदेमंद- 

आयोडीन हमारे शरीर के विकास के लिए बहुत जरुरी है, गर्भावस्था के दौरान ही इसकी ज़रूरत पड़ती है। इसकी कमी से कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है। आयोडीन बढ़ते शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड ग्रंथी को सुचारु करने के लिए बहुत जरूरी है। इसकी हमारे शरीर के विकास एवं जीवन के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। आयोडीन हमारे शरीर के तापमान को भी विनियमित करता है। इसलिए आयोडीन की कमी शरीर में न होने दें। जिन लोगों को थायराइड, उच्च रक्तचाप या अन्य कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो आयोडीन के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लीजिए।

आयोडीन iodine health benefits and Food Supplements

कितनी मात्रा है आवश्यक-

आयोडीन के सेवन का मतलब यह नहीं कि आयोडीन ही खाते रहें। एक व्यक्ति को रोजाना एक छोटे चम्मच से भी कम आयोडीन की आवश्यकता होती है। चूंकि आयोडीन शरीर में जमा नहीं रह सकता, इसलिए इसे रोजाना लेना जरूरी है। डब्ल्यूएचओ ने व्यक्ति के शरीर की आवश्यकता के हिसाब से आयोडीन की मात्रा का निर्धारण किया है। गर्भवती महिलाओं को 200-220 माइक्रोग्राम, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 250-290 माइक्रोग्राम, 1 वर्ष से छोटे शिशुओं को 50-90 माइक्रोग्राम, 1-11 वर्ष के बच्चों के लिए 90-120 माइक्रोग्राम और वयस्कों तथा किशोरों के लिए 150 माइक्रोग्राम आयोडीन प्रतिदिन लेना चाहिए।

Natural Source of Iodine ये हैं आयोडीन के प्राकृतिक स्त्रोत -

आलू - 

आलू में आयोडीन पाया जाता है। बिना छिले आलू को पकाकर या उबालकर सेवन करने से 60 माइक्रोग्राम आयोडीन मिलता है। सभी प्रकार के आलू में आयोडीन पाया जाता है, लेकिन जैविक खेती से तैयार आलू को आयोडीन का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है।

सेंधा नमक-

इस नमक को भूरे यानी ग्रे सॉल्ट के रूप में भी जाना जाता है। यह आयोडीन का बहुत अच्छा स्त्रोत है। हालांकि सभी प्रकार के प्रसंस्कृत नमक में आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है। जैविक और अप्रसंस्कृत हिमालयन नमक में लगभग 500 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है।

करौंदा-

करौंदा कहीं गुणों से युक्त है। इसे एंटीबायटिक का अच्छा स्त्रोत मानते हैं, साथ ही इसमें आयोडीन की भरपूर मात्रा भी होती है। केवल 100 ग्राम करौंदे में 400 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है आप इस के ताजे फलों का सेवन कर सकते हैं इसका जूस भी फायदेमंद है।

सेम-

सेम में आयोडीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। केवल आधा कप सेम में 32 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है। सेम से न केवल आयोडीन मिलता है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद हैं। इनमें फाइबर पाया जाता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

केल्प या समुद्री शैवाल-

केल्प या अन्य समुद्री शैवाल में आयोडीन पाया जाता है। केवल केल्प में ही इतना अधिक आयोडीन होता है कि वह दूसरे अन्य फलों से चार गुना अधिक है। इनका सेवन सलाद, सूप या अन्य व्यंजनों में प्रयोग किया जा सकता है। दाल, दूध, मछली और खाने योग्य समुद्री जीव मास तथा अंडों में भी आयोडीन होता है।

डॉ. अंजलि हुड्डा सांगवान, एमडी इंटरनल मेडीसिन यूएसए, कंसल्टेंट मेटाबॉलिक मेडिसिन एंड न्यूट्रीशियन, दिल्ली

सिंघाड़ा Singhara (Water caltrop) Health Benefits

सिंघाड़ा (Water caltrop) Health Benefits Home Remedy

सिंघाड़ा (Water caltrop) Health Benefits Home Remedy: दाद : नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को घिस कर लगायें। पहले तो कुछ जलन लगेगी, फिर ठंडक पड़ जाएगी। कुछ दिन इसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
सिंघाड़ा Singhara (Water caltrop) Health Benefits
सिंघाड़ा Singhara (Water caltrop) Health Benefits
सिंघाड़े में आयोडीन अधिक होता है। गले के रोग, टॉन्सिल आदि में इसे खाना चाहिए।

गर्भाशय की निर्बलता से गर्भ नहीं ठहरता, गर्भस्राव हो जाता हो तो कुछ सप्ताह ताजे सिंघाड़े खाने से लाभ होता है।

प्रदर : सिंघाड़े के आटे का हलुआ खाने से श्वेत प्रदर एवं रोटी खाने से रक्त-प्रदर ठीक हो जाता है।

चौलाई Chaulai Green Amaranth Leaves Ke Fayde

चौलाई Green Amaranth Leaves Health Benefits Fayde

चौलाई (chaulai benifits) Home Remedy Green Amaranth Leaves Health Benefits Fayde: चौलाई का रस गठिया, ब्लडप्रेसर और ह्रदय के रोगियों के लिए लाभदायक है। इसकी सब्जी भी खाई जा सकती है। पेट के रोग, कब्ज़ और बाल गिरने पर चौलाई की सब्जी खाना लाभदायक है।


पथरी : चौलाई के पत्तों का साग नित्य खाते रहने से पथरी गल जाती है।

रक्तचाप, बलगम, बवासीर, गर्मी के दुष्प्रभाव चौलाई की सब्जी नित्य खाने से ठीक हो जाते हैं।

भूख : चौलाई का साग भूख बढ़ाता है। इसमें सोना (Gold) पाया जाता है।

पागल कुत्ते के काटने के बाद व्यक्ति जब पागल हो जाये, स्वयं ही दूसरों को काटने लगे, ऐसी अवस्था में काँटे वाली जंगली चौलाई की जड़ 50 ग्राम से 125 ग्राम तक पीसकर पानी में घोलकर बार-बार पिलाने से मरता हुआ रोगी बच जाता है। यह विष-नाशक है। हरेक दंश पर लेप करें। 

चौलाई का शाक रूखा होता है। चौलाई का शाक नशा और विष के प्रभाव को नष्ट करता है। रक्तपित्त में लाभदायक है

मिट्टी Medicines Home Remedy

मिट्टी Medicines Home Remedy 

फोड़ा : किसी भी प्रकार की सूजन, फोड़ा, अंगुली की विषहरि हो, गीली मिट्टी का लेप हर आधे घंटे से बदलते रहें, लाभ होगा। फोड़ा बड़ा तथा कठोर हो, फूट न रहा हो तो उस पर गीली मिट्टी का लेप करें। इससे फोड़ा फूटकर मवाद बाहर आ जाती है। बाद में गीली मिट्टी की पट्टी बांधते रहें। मिट्टी की पट्टी या लेप रोग को बाहर खींच निकालने में समर्थ है।

कनफेड़ (Mumps) : इन पर काली मिट्टी का लेप करने से लाभ होता है।
दांतों की मजबूती : दांत हिलते हों, लगता हो कि टूटने वाले हैं तो चिकनी मिट्टी (चाहे काली हो या लाल) को भिगोकर नृत्य प्रातः वह शाम मसूड़ों पर लगाएं। दांत मजबूत हो जाएंगे।

दांत दर्द : साफ मिट्टी से नित्य तीन बार मंजन करें, तो दांत दर्द इससे ठीक हो जाता है।

पायोरिया : साफ मिट्टी पानी में भिगोकर कुछ समय मुंह में रखें, फिर थूक कर कुल्ले करें। मिठाई न खाएं। पायोरिया व दांतों के रोगी का लाभ होगा। 

कब्ज : पेट पर गीला कपड़ा बिछायें। उस पर गीली मिट्टी का लेप करें, मिट्टी बिछाएं। इस पर फिर कपड़ा बाँधें। रात भर इस तरह पेट पर गीली मिट्टी रखने से कब्ज दूर होगी। मल बंधा हुआ साफ आएगा।

सिर दर्द : गीली मिट्टी की पट्टी सिर पर रखने से सिर दर्द दूर होता है।

बिच्छू, बर्र काटना : गीली मिट्टी की पट्टी बाँधें।

ज्वर : गीली मिट्टी की पट्टी पेट पर बाँधें, हर घंटे से बदलते रहें। इससे ज्वर की तपन हट जाएगी।

नकसीर : दस ग्राम मुल्तानी मिट्टी रात को मिट्टी के बर्तन में आधा किलो पानी में भिगो दें। प्रातः पानी को नितार कर पियें। वर्षों पुरानी नकसीर कुछ दिन इसे पीने से ठीक हो जाएगी।

तितली के रोग में एक माह तक पेट पर गीली मिट्टी लगाने से लाभ होता है।
 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

गर्भधारण How age affects pregnancy in Hindi

How age affects pregnancy : गर्भधारण - tips for pregnancy in Hindi


How age affects pregnancy -गर्भधारण - tips for pregnancy in hindi: 35 वर्ष से पहले प्रेंगनेंट होना बहुत जरूरी है। इसमें देरी करने से मां व बच्चे दोनों के लिए कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं | 

गर्भधारण - tips for pregnancy in hindi
गर्भधारण - tips for pregnancy in hindi
बढ़ती उम्र में गर्भवस्था से ये खतरा 

उम्र बढ़ने के साथ-साथ ओवरी में एग को धारण करने की क्षमता कम होती है। 30 की उम्र के बाद ऐग कम होने के कारण कंसीव करने में परेशानी होती है। इससे एंडोमेट्रियोसिस या फेलोपियन ट्यूब भी ब्लॉक हो सकती है।

जन्मजात विकृति का खतरा :

एक अनुमान के अनुसार 30 वर्ष से कम उम्र में गर्भधारण करने पर शिशु में डाउन सिंड्रोम या क्रोमोजोम में अनियमितता की शिकायत 1000 हजार में एक शिशु में होती है। वहीं 40 वर्ष के बाद यह 100 में एक हो जाती है। और 45 के बाद यह 30 में एक हो जाती है।

प्रसव में जटिलताएं

उम्रदराज महिलाओं को भी प्रसव के दौरान काफी परेशानी होती है। इन महिलाओं में प्रसवकाल ज्यादा खिंच सकता है। कुछ मामलों में सिलेक्शन की भी जरूरत पड़ सकती है। उम्र बढ़ने के साथ यूटेरस की भी उम्र बढ़ती है। जिससे उम्रदराज महिलाओं को यूटेरस बेहतर तरीके से काम नहीं कर पाता है।
 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

छोटी इलायची Choti Elaichi (CARDAMOM) Ke Fayde Health Benefits

Choti Elaichi छोटी इलायची (CARDAMOM) Ke Fayde Health Benefits Home Remedy

Choti Elaichi छोटी इलायची (CARDAMOM) Ke Fayde Health Benefits Home Remedy: प्रकृति : न गर्म न ठंडी। यह मुख शोधक, दुर्गन्धनाशक, वमन शामक रूचिकारक हृदय-बल-दायक, कफ नि:सारक, मूत्रजन, शूलहरक तथा बलकारक है।


सिर दर्द में इलायची पीस कर सिर पर लेप करने से सिरदर्द बंद हो जाता है। इसके चूर्ण को सूँघना चाहिए। सूँघने से छींके आकर मस्तक पीड़ा घाटती है।

पेट-दर्द में दो इलायची पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

खाँसी, दमा और हिचकी में इलायची खाने से लाभ होता है।

मूत्र कृच्छ : इलायची को पीसकर दूध के साथ लेने से मूत्र खुलकर आता है तथा मूत्रदाह बंद होता होता है।

पथरी में इलायची लाभदायक है। पेशाब की जलन दूर करती है।

रक्त पित्त : भूखे पेट दो इलायची प्रतिदिन चबा कर खायें और इस पर दूध या पानी पियें। लाभ होगा। यह परीक्षित है।

इलायची के छिलकों को एक तकिये में में भरकर लगातार आठ महीने तक नीचे दबाने से जोड़ का दर्द ठीक हो गया।   
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Kapoor कपूर (CAMPHOR) Home Remedy Health Benefits

 कपूर (CAMPHOR) Home Remedy Health Benefits 

Kapoor कपूर (CAMPHOR) Home Remedy Health Benefits: कपूर कीटाणुनाशक है।

दाँत-दर्द हो तो दाँत पर कपूर दवायें। दाँत में छेद हो तो कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जायेंगे।

kapoor ke fayde
kapoor ke fayde
छाले, पायोरिया हो तो देसी घी में कपूर मिलाकर नित्य चार बार लगायें और लार गिराते रहें। फिर कुल्ले कर लें।

खुजली, फुंसियाँ होने पर दस ग्राम कपूर को 100 ग्राम नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से लाभ होता है। तेल को जरा सा गर्म करके फिर कपूर मिलायें। नारियल के तेल के स्थान पर कोई सा भी, खाने में प्रयोग किया जाने वाला, तेल मिला सकते हैं। कपूर में त्वचा को सुन्न करने का गुण है। जिससे खुजली शीघ्र बंद हो जाती है।
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खसखस (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits

खसखस  (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits and Home Remedy

खसखस  (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits and Home Remedy : पेचिश, दस्त : दो चम्मच खसखस में पानी डालकर पीस कर चौथाई कप दही में मिला कर नित्य दो बार छ: घंटे के अंतर में खाने से पेचिश, दस्त और मरोड़ ठीक हो जाते हैं। खसखस की खीर बना कर खाने से भी लाभ होता है।

खसखस  (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits
खसखस  (पोस्त के दाने) Poppy Seeds Health Benefits 
शक्तिवर्धक : खसखस की खीर खाने से शक्ति बढ़ती है। दो चम्मच खसखस रात को पानी में भिगो दें, उसे पीस कर प्रात: स्वादानुसार मिश्री मिला कर पानी में घोल कर लस्सी बना कर पीने से गर्मी में मस्तिष्क ठंडा रहता है, और गर्मी कम लगती है। खसखस का शर्बत भी लाभदायक है।

गर्मी में होने वाले चर्म-रोग : गर्मी में बच्चों के प्राय: फोड़े-फुंसियां निकलती रहती हैं। खसखस का शर्बत नियमित पीते रहने से गर्मी के मौसम में होने वाले चर्म-रोग ठीक हो जाते हैं तथा खसखस का शर्बत नित्य पीते रहने से गर्मी के कारण होने वाले चर्म-रोग नहीं होते। संक्रामक चर्म-रोग भी नियमित खसखस का शर्बत पीने से ठीक हो जाते हैं।

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माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet

माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet

माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet - 1. माँसाहार से मानव क्रूर व हिंसक बनता है।

माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet
माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet

2. माँस सेवन मनुष्य को कामी, क्रोधी, असहिष्णु, चिड़चिड़ा और आलसी बनाता है।

3. माँस सेवन कई प्रकार की बीमारियों जैसे मोटापा, रक्तचाप, कैंसर, गठिया, मधुमेह, पित्त संबंधी एवं हृदय के रोगों को आमंत्रित करता है।

4. माँसाहार से पाचन क्रिया में विखंडन एवं दुर्गंध पैदा होती है जिससे अपच हो जाता है पसीने में बदबू आती है।

5. भोजन विषाक्तता के कुल मामलों में से 70 प्रतिशत के लिए माँसाहार उत्तरदायी है।

6. माँसाहारी लोगों का पेशाब तेजाब युक्त होता है इससे शरीर के रक्त का तेजाब और क्षार का अनुपात बिगड़ जाने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in hindi

बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in Hindi

बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in Hindi -उल्टी : बार-बार उलटी होने पर बर्फ चूसने से उलटी बंद हो जाती है। हैजे की उलटियों में भी यह लाभदायक है। 
बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in Hindi
भूख न लगना : गर्मी के कारण भूख न लगने पर खाना खाने के एक घंटा पहले बर्फ का पानी पीने से भूख खुलकर लगती है।

लू लगना : बीमार के कपड़े उतार कर हवा करें। ठंडक पहुँचायें। बर्फ के पानी से स्पंज करें। बर्फ के पानी में चद्दर भिगोकर शरीर पर लपेट दें। ऐसा 102 डि॰ फा॰ ज्वर आने तक करें।

चोट लगकर रक्त बह रहा हो तो बर्फ के पानी की पट्टी बाँधें व बर्फ का टुकड़ा रखें। इससे रक्तस्राव बंद हो जाता है।

यदि शिशु जन्म के बाद न रोता हो और न साँस ही लेता प्रतीत होता हो परंतु जीवित है तो उसकी गुदा-द्वार पर बर्फ का टुकड़ा रख दें, वह तुरंत ही साँस लेने लगेगा और रोने लगेगा। 

 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

राई Black Mustard Seeds Health Benefits home remedy

राई home remedy - Black Mustard Seeds Health Benefits in Hindi

राई home remedy -Black Mustard Seeds Health Benefits in Hindi - राई गरम और पसीना लाने वाली होती है। इसका लेप करने से त्वचा लाल हो जाती है और रक्तवाहिनियां उत्तेजित हो जाती हैं जिससे उस भाग में शून्यता पैदा हो जाती है।
Rai home remedy

लेप विधि : राई को ठंडे पानी के साथ पीसें। साफ मलमल के कपड़े को जिस अंग पर लेप करना हो, बिछा दें। फिर उस कपड़े पर पीसी हुई राई फ़ैला दें, लेप कर दें। कपड़ा न रखकर लेप करने से त्वचा पर फुंसियां हो जाती हैं। इसे अधिक समय न रखें। लेप करीब 10-15 मिनट रख सकते हैं।
अजीर्ण होने पर 3 ग्राम राई पीस कर पानी में घोल कर पीयें।

उबरशुल और दु:साध्य उलटियों को रोकने के लिए पेट पर राई का लेप आश्चर्यजनक वस्तु है।

हैजा : रोगी को बहुत उल्टी, दस्त होते हों और शरीर में बाँयटे आते हों, अंगों में शिथिलता पैदा हो रही हो, ऐसी स्थिति में राई का लेप बहुत लाभ देता है। हेजा के अलावा भी उलटी, दस्त होते हों, किसी औषधि से न रुकते हों तो राई के लेप से रुक जाते हैं। लेप पेट पर करें।

विष : दो चम्मच राई का चूर्ण पानी के साथ लेने से जोरदार उलटी होकर विष का प्रभाव कम हो जाता है।

मिरगी : राई को पीस कर सुंघाने से मिरगी की मूर्च्छा दूर हो जाती है।

मासिक धर्म में गड़बड़ी होने पर भोजन से पहले से दो ग्राम राई का चूर्ण प्रथम ग्रास के साथ खाएं।

जुकाम : राई को शहद में मिलाकर सूंघने व खाने से जुकाम मिटता है।

हिचकी : दस ग्राम राई, 250 ग्राम पानी में उबालकर छानकर गुनगुना रहने पर पिलाने से हिचकी बंद होती है, चाहे किसी भी कारण से हो।

 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले |  

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi -माँस एवं अंडों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है जिसके कारण दिल की बीमारी, रक्तचाप, गुर्दों के रोग, पित्त की थैली में पथरी आदि रोग पैदा हो जाते हैं।

माँस में विद्यमान कीटाणू एवं वसा शरीर की प्रतिरोधक शक्ति घटाता है।
माँसाहार तामसी प्रवृत्ति पैदा करता है जिससे कि समाज में आपसी मन-मुटाव असहृदयता व निर्दयता जैसी बुराइयां पनपती है।

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi
शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi
शाकाहार के लाभ - 
  • शाकाहार जीवन को दीर्घायु, शुद्ध, बलवान एवं स्वस्थ बनाता है।
  • शाकाहार "जीओ और जीने दो" के सिद्धान्त को प्रतिपादित करता है।
  • शाकाहारी माँसाहारी की तुलना में अधिक मात्रा में उष्णता (कैलोरीज़) विटामिन, प्रोटीन एवं धातु प्राप्त करते हैं।
  • पशु के सड़े गले माँस के खाने से होने वाली बीमारियों से बचा रहता है।
  • सरसों का तेल, दालें, हरी सब्जियाँ व चना का उपयोग शरीर में विद्यमान कोलेस्ट्रॉल में  कमी करता है। 
  • शाकाहारी भोजन मन में दया, समानता, आपसी स्नेह और सहनशीलता उत्पन्न करता है।
  • शाकाहारी संकल्प हिंसा के दोष से मुक्त रहता है। अत: वह सब बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष का रास्ता प्रशस्त करता है।
  • शारीरिक नैतिक और आध्यात्मिक सभी द्रष्टि से शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वोत्तम है।
  • शाकाहारी अधिक उत्पादक हैं और कम से कम अपव्ययी है। शाकाहारी कम खर्च में जीवन निर्वाह कर सकता है।
  • सात्विक भोजन से ही मनुष्य अध्यात्म के मार्ग पर चल सकता है।
  • शहरी नागरिकों को कब्ज व सिरदर्द का रोग भोगना पड़ता है। इनसे बचने के लिए फलों व सब्जियों के रस का सहारा लेना चाहिए।
  • फलाहार विटामिन की कमी के कारण होने वाले रोगों से बचाव एवं छुटकारा देता है।
  • दुर्बल रोगी फलों अथवा सब्जियों के रसों का उपयोग कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • भुने हुए चने की एक मुट्ठी भर मनुष्य प्रातः काल खा ले तो उसे क्षय या प्लूरेसी की बीमारी जन्म भर नहीं हो सकेगी।
  •  मनुष्य के दाँतों और आँतों की रचना शाकाहारी भोजन के लिए की है। मांसाहार तो हिंसक पशुओं का आहार है।
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Health benefits of Far Infrared Rays

इन्फ्रा  रेड रेज  (INFRA – RED RAYS) - Health benefits of Far Infrared Rays

Health benefits of Far Infrared Rays - इन्फ्रा रेड किरणें ही वे किरणें हैं जो पृथ्वी के भीतर दूर तक पहुँच वनस्पतियों को जीवन प्रदान करती हैं इसी प्रकार ये हमारे शरीर के कोषों द्वारा भी ग्रहण की जाती है जिससे हमारे शरीर के कोष स्वस्थ और सबल बनते हैं।

ये किरणें दमा, फोड़ा, कारबंकल, गठिया, शूलपीड़ा, कान-दर्द, पेट-दर्द, फेफड़ों की झिल्ली की सूजन, स्त्रियों के डिम्ब कोषो की सूजन आदि में लाभप्रद है। ये किरणें त्वचा के सारे रोगों, फोड़ों आदि में बहुत प्रभावमय है। ये स्त्रियों के मासिक धर्म की गड़बड़ी में भी प्रभावशाली सिद्ध हुई है। सभी प्रकार के दर्दों तथा जकड़न व गहरी पुरानी सूजन या प्रदाहिक अवस्थाओं में इसका प्रयोग हितकर है।

दृष्य वर्णपट के लाल छोर से आगे इन्फ्रा लाल किरणें हैं। जब ये किरणें शरीर की त्वचा द्वारा आत्मसात कर ली जाती हैं तो ताप की उत्पत्ति होती है। ग्रोथस का नियम यह है कि ताप की उत्पत्ति उस केंद्र पर होती है जिस केन्द्र पर इन्फ्रा किरणें आत्मसात कर ली जाती हैं। उसके बाद यह प्रसरण-क्रिया द्वारा अपने पास के तन्तुओं तक फैल जाती है, और वहाँ से रक्त प्रवाह के माध्यम से समस्त शरीर में व्याप्त हो जाती है जिससे शरीर के तापमान में वृद्धि होती है।
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तेजपात के फायदे TejPaat White sage Benefits

In Hindi - तेजपात के फायदे TejPaat White sage Benefits 

TejPaat White sage Benefits  - सिर-दर्द : सर्दी या गर्मी किसी भी कारण से सिर-दर्द हो, तेजपात डंठल सहित पीस कर हल्का गर्म करके ललाट पर लेप कर दें। दर्द मिट जाएगा।

तेजपात
तेजपात Benefits in Hindi
रक्तपित्त : मुंह, नाक, मल, मूत्र किसी भी रास्ते से रक्त निकलने पर ठंडे पानी के एक गिलास में एक चम्मच पीसा हुआ तेजपात मिलाकर हर 3 घंटे से पिलाने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।

दांतो की सफाई : सूखे तेज-पत्तों को बारीक पीस कर हर तीसरे दिन एक बार मंजन करें। इससे दांत चमकने लगेंगे।

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Tuesday, 9 February 2016

सामान्य बीमारियों में घरेलू उपाय Home Remedy

सामान्य बीमारियों में कारगर घरेलू उपाय 

Home Remedy - सर्दी में लोग जल्दी बीमार होते हैं। इन दिनों में खांसी, जुकाम व बुखार जैसी परेशानियां आम हैं। कुछ घरेलू उपाय इसमें मददगार हो सकते हैं। 

जुकाम : त्रिकुट चूर्ण (सौठ, छोटी पीपल, काली मिर्च) गुड के साथ मिलाकर गोलियां बनाएं। दिन में 3-4 बार इनका धीरे-धीरे रस लेने से जुकाम में आराम मिलेगा। 

मुंह के छाले : रात में सोते समय 1 चम्मच हल्दी 1 गिलास पानी में उबालकर गरारे करने से छाले में आराम मिलता है। 

खांसी : काली मिर्च, दालचीनी, इलायची व लौंग को पीसकर तुलसी व अदरक के रस में मिलाएं व शहद के साथ दिन में 3 बार लें। 

एसिडिटी : चुटकीभर काला नमक व अदरक के छोटे टुकड़े को मुंह में डालकर धीरे-धीरे रस लेने से एसिडिटी ठीक होती है। 

सामान्य बुखार : आधा ग्राम मीठा सोडा व 1 चम्मच शहद, 1 कप गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से सामान्य बुखार उतर जाता है। 

गले की खराबी : मुलैठी व काली मिर्च को भूनकर गुड़ के साथ खाने से गले में खराश, गला बैठने की समस्या दूर होती है। 

 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले |  

सोरायसिस Psoriasis in hindi

सोरायसिस Psoriasis in hindi - वात-पित्त के असंतुलन से सोरायसिस

Psoriasis skin related ऐसी बीमारी है जिसमें skin की कोशिकाओं में तेजी से वृद्धि होने लगती है। आयुर्वेद के मुताबिक यह समस्या वात-पित्त के असंतुलन से होती है। इसकी वजह से शरीर में विषैले तत्व इकट्ठे हो जाते है जो रक्त व मांसपेशियों के अलावा इनके अंदर के उत्तकों को संक्रमित करने लगते हैं। जिससे व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है। यह समस्या ज़्यादातर कोहनी, घुटने व सिर की skin को प्रभावित करती है। 

Causes कारण - आनुवंशिकता को भी इसका मुख्य कारण माना जाता है। यदि माता-पिता में से किसी एक को यह समस्या है तो बच्चे में इसका खतरा 15-20 प्रतिशत बढ़ जाता है। माता-पिता दोनों को ऐसी परेशानी है तो बच्चे में इसकी आशंका 60 प्रतिशत तक होती है। इसके अलावा दो अलग किस्म का भोजन जैसे दूध के साथ खट्टी व नमकीन चीजें खाने, त्वचा कटने, चोट लगकर घाव होने या जलने, एलर्जी वाली दवाओं के नियमित इस्तेमाल, ध्रूमपान व शराब की लत और अधिक तनाव से भी यह समस्या हो सकती है। 

Symptoms लक्षण - त्वचा पर सफ़ेद परत, खुजली, जलन, फोड़े-फुंसी, फफोले, त्वचा में दर्द और सूजन, रूखे धब्बे व धब्बों से खून आना आदि। 

आयुर्वेद उपचार - केले के ताजे पत्ते को प्रभावित स्थान पर आधे घंटे के लिए रखें। आधा चम्मच तिल के दाने लेकर एक गिलास पानी में रातभर भिगों दें। सुबह खाली पेट छानकर पानी पीएं। 

ध्यान रहे : दो अलग प्रकृर्ति का भोजन एकसाथ करने से बचें। लंबी यात्रा, व्यायाम या कोई शारीरिक गतिविधि के बाद तुरंत ठंडे पानी से न स्नान करें। उल्टी, यूरिन आदि को ज्यादा देर न रोकें। खट्टी, तली-भुनी व अपच पैदा करने वाली चीजें न खाएं। 

डॉ॰ प्रताप चौहान, आयुर्वेद विशेषज्ञ

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गुड़ के फायदे Jaggery benefits in hindi

गुड़ के फायदे Jaggery benefits in hindi

Jaggery benefits in hindi - सर्दियों में गुड़ सिर्फ मीठे का काम ही नहीं करता है बल्कि कई बीमारियों से भी राहत दिलाता है। जानते हैं किन-किन परेशानियों में यह रहता है फायदेमंद-

यह पाचनक्रिया सही रखता है। जिन लोगों को एसिडिटी की परेशानी है वे रोजाना दोपहर व रात के भोजन के बाद थोड़ा गुड़ जरूर खाएं। 


गुड़ के फायदे Jaggery benefits in hindi

  • इससे खून साफ होता है व मेटाबॉलिज़्म ठीक रहता है। रोजाना एक गिलास पानी या दूध के साथ थोड़ा गुड़ पेट को ठंडक देता है। 
  • इसमें आयरन होता है। एनीमिया के मरीज, खासतौर पर महिलाओं के लिए फायदेमंद है। 
  • यह खून से विषैले पदार्थ दूर करता है जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं ठीक होती है। 
  • ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस हो तो थोड़ा गुड़ खा लें। इससे एनर्जी लेवल बढ़ता है। 
  • इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह जुकाम और कफ संबंधी परेशानियों में फायदेमंद है।  
  • इसमें एंटी-एलर्जी तत्व होते हैं। दमा के मरीजों के लिए फायदेमंद है। 
  • रोज गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का टुकड़ा खाने से जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। 
  • सर्दी में गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से अस्थमा की परेशनी में लाभ होता है। 
  • 5 ग्राम सौंठ, 10 ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया में आराम होता है। 
  • यह जल्दी पच जाता है और शुगर लेवल भी नियंत्रित रहता है। 
  • इसके साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।          
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BP Control Tips in hindi

BP Control Tips in hindi

BP Control Tips in hindi - Blood Pressure को silent killer माना जाता है। अधिकांश लोगों को बहुत देर से पता चलता हैं की वे इस समस्या से जुझ रहें है। ऐसी स्थिति में यदि दवाओं से बचना चाहते हैं तो लाइफ स्टाइल में बदलाव करें।  
Blood Pressure Control tips in Hindi

खानपान करें नियंत्रित  (Diet Control) - खानपान से भी BP बढ़ता है इसलिए फैटी डाइट व अधिक नमक से परहेज करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि समान्य व्यक्ति को दिनभर में 5-6 ग्राम नमक खाना चाहिए। इसके अलावा सलाद खूब खाएं। इससे पेट भरा रहेगा व वजन नियंत्रित होगा। 

सांस से मिलेगा आराम : कुछ लोगों का BP शाम की तुलना में सुबह ज्यादा होता है। इसका कारण है रात में कम ऑक्सीज़न की प्राप्ति। BP नियंत्रित रखने में ऑक्सीज़न अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए दिन में 10 से 15 बार पेट से गहरी सांस लें। विशेषज्ञ डॉ॰ के मुताबिक गहरी सांस लेने से शरीर में ऑक्सीज़न व सुचारु रहता है। साथ ही इससे मानसिक रूप से शांति मिलती है, गुस्सा भी कम आता है।

नींद से बीपी कंट्रोल - अनिंद्रा भी इसका एक कारण है। देर रात की पार्टियां ज़्यादातर अनिंद्रा की वजह बनती हैं जो हार्ट के लिए ठीक नहीं है। 7 से 8 घंटे रोजाना गहरी नींद सोना चाहिए। अच्छी नींद हार्ट के अलावा कई अन्य बीमारियों से बचाव करती है। 

नियमित करें व्यायाम (weight control) - वजन ब्लडप्रेशर का मुख्य कारण है। समान्य वजन से 4-5 किलो अधिक वजन ब्लडप्रेशर को करीब 4 एमएम-एचजी तक बढ़ा देता है। मार्निंग वॉक, जॉगिंग, जिमिंग व एरोबीक्स एनर्जी लेवल बढ़ाती हैं। इससे कैलोरी बर्न होगी और हार्ट की ब्लड पम्पिंग क्षमता बढ़ेगी। डांस से भी वजन घटता है। 
योग से फायदा - दिल के मामले में योग भी बेहतरीन विकल्प हो सकता हैं। कई शोध में साबित हो चुका है कि रोजाना योग करने से ह्रदय संबंधी रोगों के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से भी राहत मिलती है।   
                
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Til Ka Tel (Sesame Oil) for Hair Growth

Sesame Oil For Hair Growth - Til Ka Tel (Oil) for Hair 

Sesame Oil For Hair Growth - Til Ka Tel (Oil) for Hair प्रोटीन से भरपूर तिल का तेल कई तरह से लाभकारी है। इसमे चिपचिपाहट नहीं होती। इसके इस्तेमाल से बालों में चमक और मजबूती आती है। रोजाना इस तेल का प्रयोग बालों के असमय सफ़ेद होने की समस्या में लाभकारी है। तिल के तेल में मौजूद ऑक्सीकरण रोधक और बहु-असंतृप्त वसा रक्त-चाप को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते हैं।


इसके तेल से नियमित सिर की मसाज से कोशिकाएं सक्रिय होती हैं। जिससे बालों की ग्रोथ बढ़ती है। तनाव भी बालों के झड़ने की एक वजह है। सिर पर इसकी मसाज करने से थकान दूर होती है और मूड भी अच्छा होता है। इससे सिर की त्वचा को पोषण मिलने के साथ रक्तसंचार बेहतर होता है जिससे नए बाल उगने लगते हैं व दो मुंहे बालों की समस्या दूर होती है। 

तिल का तेल हेयर डैमेज रोकता है। रूखे-सूखे बालों को सॉफ्ट बनाकर बालों की गुणवत्ता बढ़ाता है।  यदि लंबे समय की सिर में रूसी की समस्या है तो सिर धोने से थोड़ी देर पहले इसे बालों में लगाएं। ऐसा 2-3 बार करने से समस्या में आराम मिलेगा।

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Ureter Stone in Hindi

Ureter Stone - Cause, prevention and treatment

Cause of Stone in Ureter - खराब खानपान से यूरेटर में पथरी

इन दिनों kidney stone की बजाय यूरेटर में stone के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खानपान की गलत आदतों के कारण किडनी स्टोन के प्रारूप में परिवर्तन आने से इस तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। 

खानपान है जिम्मेदार –

कार्बोनेटेड ड्रिंक, जंकफूड, वसा और अल्कोहल की अधिक मात्रा इसकी मुख्य वजह हैं। इन चीजों में पाया जाने वाला  यूरिक एसिड शरीर में स्टोन का निर्माण करता है। यूरेट्रिक stone सामान्य किडनी स्टोन से आकार में 5-8 MM या उससे भी छोटे होते हैं और तेज व असहनीय दर्द का कारण बनते हैं जिसे “यूरेट्रिक पेन” या “यूरेट्रिक कॉलिक” भी कहते हैं। एक साथ कई स्टोन भी बन सकते हैं। 


किडनी स्टोन के मामले पहले के समय में अधिक थे जो नमक इकट्ठा होने की वजह से होते थे। ज़्यादातर ऐसा गर्मीयों में होता था क्योंकी पेशाब कम आने पर मौजूद नमक जम जाता था।

इलाज: यूरेट्रिक स्टोन का इलाज दो चरणो में होता है। पहले दर्द की रोकथाम करते हैं फिर दर्द में राहत मिलने पर यूरिन टैस्ट, अल्ट्रासोनोग्राफी व सीटी स्कैन किया जाता है। इससे स्टोन की लोकेशन का पता चलता है जिसे लेजर बीम या होलमियम लेजर से नष्ट करते हैं। 

सावधानी: रोजाना कम से कम पांच लीटर पानी पिए व पालक, नट्स, डेयरी प्रोडेक्ट आदि से परहेज करें।   

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Stress Ball Benefits and how to use stress ball

In Hindi - Stress Ball Benefits - how stress balls work-
स्ट्रेस बॉल दिलाएगी तनाव से मुक्ति 


Stress Ball Benefits- how stress balls work - कई बार लोग इंटरव्यू या मीटिंग से पहले तनाव में आ जाते हैं। ऐसे में वे स्थिति को संभालने के लिए stress ball का प्रयोग करते हैं। हालांकि इससे तनाव की स्थिति खत्म होती है या यह सिर्फ एक भ्रम है इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। फिर भी लोगों को इससे लाभ मिलते देखा है। 

How stress balls work - 

तनाव के दौरान cortical hormone के स्त्राव से रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं जिससे उन्हें पर्याप्त ऑक्सीज़न नहीं मिल पाती। बॉल को बार-बार दबाने से मांसपेशियों पर ज़ोर पड़ने से वे उत्तेजित हो जाती हैं। ऐसे में उनमें ऑक्सीज़न व रक्त का संचार बेहतर होने के कारण तनाव में कमी आती है। 

बॉल का प्रयोग -  

ऐसी ball लें जो हथेली में समा जाए। इसे अंगुलियों की सहायता से दबाएं और 3 या 5 तक गिनती गिनें। फिर इसे धीरे-धीरे छोड़ दें। इस प्रक्रिया को दोनों हाथों से 8-10 बार दोहराएं। Ball दबाते समय सांस अंदर लें व छोड़ते समय सांस को बाहर छोड़ें। यह एक्यूप्रेशर का काम करने के साथ दिमाग को उस स्थिति से हटा देगा जिसके कारण आप चिंतित हैं। 

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