मिट्टी Medicines Home Remedy
फोड़ा : किसी भी प्रकार की सूजन, फोड़ा, अंगुली की विषहरि हो, गीली मिट्टी का लेप हर आधे घंटे से बदलते रहें, लाभ होगा। फोड़ा बड़ा तथा कठोर हो, फूट न रहा हो तो उस पर गीली मिट्टी का लेप करें। इससे फोड़ा फूटकर मवाद बाहर आ जाती है। बाद में गीली मिट्टी की पट्टी बांधते रहें। मिट्टी की पट्टी या लेप रोग को बाहर खींच निकालने में समर्थ है।
कनफेड़ (Mumps) : इन पर काली मिट्टी का लेप करने से लाभ होता है।
दांतों की मजबूती : दांत हिलते हों, लगता हो कि टूटने वाले हैं तो चिकनी मिट्टी (चाहे काली हो या लाल) को भिगोकर नृत्य प्रातः वह शाम मसूड़ों पर लगाएं। दांत मजबूत हो जाएंगे।
दांत दर्द : साफ मिट्टी से नित्य तीन बार मंजन करें, तो दांत दर्द इससे ठीक हो जाता है।
पायोरिया : साफ मिट्टी पानी में भिगोकर कुछ समय मुंह में रखें, फिर थूक कर कुल्ले करें। मिठाई न खाएं। पायोरिया व दांतों के रोगी का लाभ होगा।
कब्ज : पेट पर गीला कपड़ा बिछायें। उस पर गीली मिट्टी का लेप करें, मिट्टी बिछाएं। इस पर फिर कपड़ा बाँधें। रात भर इस तरह पेट पर गीली मिट्टी रखने से कब्ज दूर होगी। मल बंधा हुआ साफ आएगा।
सिर दर्द : गीली मिट्टी की पट्टी सिर पर रखने से सिर दर्द दूर होता है।
बिच्छू, बर्र काटना : गीली मिट्टी की पट्टी बाँधें।
ज्वर : गीली मिट्टी की पट्टी पेट पर बाँधें, हर घंटे से बदलते रहें। इससे ज्वर की तपन हट जाएगी।
नकसीर : दस ग्राम मुल्तानी मिट्टी रात को मिट्टी के बर्तन में आधा किलो पानी में भिगो दें। प्रातः पानी को नितार कर पियें। वर्षों पुरानी नकसीर कुछ दिन इसे पीने से ठीक हो जाएगी।
तितली के रोग में एक माह तक पेट पर गीली मिट्टी लगाने से लाभ होता है।
सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ Dr से सलाह ले |
सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ Dr से सलाह ले |
No comments:
Post a Comment