Thursday, 3 September 2015

Deep Vein Thrombosis DVT Causes Symptoms Treatment Hindi


What is DVT - Deep Vein Thrombosis- In Hindi

पैरों में अचानक सूजन: कहीं यह खून के कतरों का जमाव तो नहीं
नियमित व्यायाम से इलाज मुमकिन

अचानक पैर में सूजन, गर्माहट और चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोंबोसिस (डीवीटी) यानी पैरों की नसों में खून के कतरों का जमाव नामक गंभीर स्थिति के सूचक हो सकते हैं। सही इलाज न मिलने के कारण डीवीटी बीमारी गंभीर हो जाती है। रोगी की जान खतरे में पड़ सकती है। व्यायाम न करना और महिलाओं में गर्भनिरोधक दवाओं एवं हॉर्मोन के बढ़ते सेवन के कारण डीवीटी बढ़ने लगती हैं। हाई हील सैंडल पहनने से भी बीमारी का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा फेफड़े, या आंतों का कैंसर होने या किसी बीमारी के कारण खून जरूरत से ज्यादा गाढ़ा हो जाने से यह भी रोग हो सकता है।

पैर या हाथों की वेन्स ऑक्सीज़न रहित गंदे खून को इकट्ठा करके हृदय की ओर ले जाती है। वंहा से अशुद्ध रक्त शुद्ध होने के लिए फेफड़े में जाता है। कई बार में खून के कतरे इन वेन्स में जमा होकर रक्त के बहाव को रोक देते हैं। इससे वेन्स जाम हो जाती है, जिसके कारण पैर या हाथ में सूजन आने लगती है। गंदे रक्त के अलावा शरीर का पानी और इलेक्ट्रोलाइटस एवं खनिज जैसे जरूरी अवयव भी जमा हो जाते हैं। इससे वेन्स में टिश्यू प्रेशर बढ़ जाता है। इससे शुद्ध रक्त ले जाने वाली रक्त धमनियों का बहाव रुक जाता है। इससे पैर अथवा हाथ काले पड़ने लगते हैं और गैंगरीन नामक भंयकर अवस्था की शुरूआत हो जाती है।

रोग का सही वक्त पर इलाज न होने या गलत इलाज, लापरवाही बरतने और आराम न करने पर वेन्स में इकट्ठे हुए रक्त के कतरे दिल से होकर फेफड़े की नली में इकट्ठा होने लगते हैं। इससे पल्मोनरी इम्बोलिज़्म की अत्यंत जानलेवा स्थिति पैदा होती हैं। इस स्थिति में मरीज की सांस फूलने लगती है। रक्तचाप नीचे गिर जाता है।

डीवीटी के मरीजों को आमतौर पर खून की नस के जरिए रक्त को पतला करने वाली दवाएं अधिक मात्रा में दी जाती है, लेकिन मरीज में पल्मोनरी इम्बोलिज़्म की शुरूआत हो जाए तो थ्रोम्बोलाइटिक थैरेपी दी जाती है। ऐसे रोगियों के लिए अत्याधुनिक उपकरणों वाले आईसीयू की जरूरत होती है। 

यह बीमारी तब खतरनाक रूप ले लेती है जब रोग से ग्रत पैर खराब होने की आशंका बढ़ जाए। ऐसी स्थिति में तत्काल वेन्स थ्रोम्बेक्टोमी ऑपरेशन की जरूरत पड़ती हैं। इस इस ऑपरेशन में मोटी वेन्स को खोल कर खून के कतरे निकाल दिए जाते हैं और धमनी को वेन्स से जोड़कर धमनियों का शुद्ध रक्त शिराओं में डाला जाता है। पल्मोनरी इम्बोलिज़्म की किछ विशेष परिस्थितियों में पेट की मोटी एवं मुख्य वेन्स में एंजियोग्राफी या ऑपरेशन के जरिए आईवीसी फिल्टर डाला जाता है, जिससे पैर की वेन्स में जमे खून के कतरे पेट की वेन्स में रुक जाएं और दिल के जरिए फेफड़े तक न पहुंचे। डीवीटी के काफी मरीजों में इलाज के बावजूद पोस्ट थ्रोम्बोहटिक सिंड्रोम होने की संभावना बनी रहती है। इसमें वेन्स के वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे मरीजों को उम्रभर व्यायाम करना चाहिए, ताकि आगे चलकर उनमें वेरिकोस वेन्स, और वेरिकोस अल्सर उत्पन्न न हो।

बीमारी की रोकथाम के लिए रोज तीन से चार किलोमीटर सैर करने तथा पैरों की कसरत करने से पैरों की वेन्स में ऑक्सीज़न रहित गंदे रक्त को रोकने का मौका नहीं मिलता और मांसपेशियों का पम्प अच्छी तरह कम करता है। लंबे समय तक बेडरेस्ट में रहने वालों, कैंसर व लकवा के मरीजों, नवजात शिशुओं की माताओं तथा गर्भ निरोधक गोलियों एवं हॉर्मोन का सेवन करने वाली महिलाओं को सावधान रहना चाहिए।

डॉ के के पाण्डेय
सीनियर वैस्कुलर व कार्डियो
थोरेसिक सर्जन इंद्रपस्थ
अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली।

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