Wednesday, 9 March 2016

ह्रदय रोग Heart Disease Tips for Prevention

ह्रदय रोग Heart Disease Tips for Prevention 

ह्रदय रोग Heart Disease Tips for Prevention- Healthy Heart के लिए खाने मे शुरू करे ये चीजे : भारत समेत दुनियाभर में ह्रदय रोग सबसे बड़ी चिंता बनती जा रहे हैं। दुनिया में सर्वाधिक मौतें भी दिल की बीमारियों से होती है। बदलती जीवन शैली व खराब खानपान इसके मरीज बढ़ने की प्रमुख वजह हैं। नियमित योग, व्यायाम व जीवनशैली संबंधी बदलाव के साथ खानपान संबंधी कुछ आदतों में सुधार करके इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जानते हैं उन छह तरह की चीजों के बारे में जिन्हें अपनी डाइट में शामिल कर ह्रदय रोगों से बच सकते हैं- 
ह्रदय रोग Heart Disease Tips for Prevention
ह्रदय रोग Heart Disease Tips for Prevention
हार्ट फ्रेंडली सोयाबीन : 50 ग्राम सोयाबीन सभी को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। यह ओमेगा-3 फैट्स और फाइबर का अच्छा स्त्रोत होने के साथ शरीर में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखता है। इसलिए इसे हार्ट फ्रेंडली भी कहा जाता है। 

मेथी दाने के फायदे: करीब 2 चम्मच मेथी दाना नियमित रूप से लेने पर कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। इसे पानी के साथ या सब्जी में प्रयोग किया जाता है। 

ईसबगोल की भूसी : रेशेदार ईसबगोल की दिनभर में 50 ग्राम मात्रा लेने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। यह पेट में तैलीय तत्वों को साफ करने का काम करती है। 

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करे चना : इसमें आयरन व सेलेनियम की प्रचुर मात्रा होती है। साथ ही यह फोलिक एसिड का बेहतर स्त्रोत है। यह शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने का काम भी करता है। 

आंवला करेगा खून साफ : विटामिन-सी से भरपूर दो आंवले दिन में खाने से रक्त की सफाई होती है। यह शरीर में ऑक्सीज़न का प्रवाह बेहतर बनाए रखता है। 

थक्के हटाएगा लहसुन : लहसुन की 4 कलियां रोजाना खाने से रक्त नलिकाओं में थक्के की समस्या दूर होती है। थक्के के कारण ह्रदय सही पम्पिंग नहीं कर पाता जिससे हार्टअटैक का खतरा बढ़ता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल भी हटाता है। 

विशेषज्ञ की राय : इन छह चीजों को दैनिक आहार का हिस्सा बना लें तो इन रोगों के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं। लंदन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने भी माना है कि इनसे ह्रदय रोगों की आशंका 88% तक कम होती है। 
                  डॉ॰ अजीत बाना, चेयरमेन, कार्डियर साइंस व ह्रदय रोग                      विशेषज्ञ इटरनल हार्ट केयर सेंटर     

Platelet Rich Plasma for Skin Wrinkle Treatment

प्लेटलेट रिच प्लाज्मा से कम होंगी झुर्रीयां - Platelet Rich Plasma Therapy for Skin Wrinkle Treatment

Platelet Rich Plasma for Skin Wrinkle Treatment : प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (प्लेटलेट रिच प्लाज्मा injection) झड़ते बाल और skin की उम्र से संबंधित परेशानियों के treatment की technology है। कंधो, कोहनी, कलई, घुटनों, कूल्हों व टखने के उत्तकों की परेशानी में भी experiment करते हैं। 
Platelet Rich Plasma for Skin Wrinkle Treatment
Platelet Rich Plasma for Skin Wrinkle Treatment
दमकती skin और long hair महिलाओं की पहली चाहत होती है। आजकल तो पुरुष भी अपने लिए ऐसी इच्छा रखते हैं। लेकिन बदलती जीवनशैली की वजह से शरीर में vitamin D, C और A की कमी हो रही है। साथ ही पूरी नींद न लेने व बढ़ते प्रदूषण आदि के कारण भी बाल झड़ने व कम उम्र में ही उम्रदराज दिखने जैसी problemsबढ़ रही हैं।

इनसे राहत पाने के लिए food habbits में बदलाव करते व दवाईयां (खाने और लगाने की) आदि लेते हैं। लेकिन कई बार ये उपाय भी काम नहीं आते। ऐसी स्थिति में Platelet Rich Plasma (पीआरपी) technology फायदेमंद हो सकती है।
  
PRP की प्रक्रिया : इसमें मरीज के शरीर से 20 से 30 मिलिलीटर खून निकाला जाता है। फिर इस खून को प्लाज्मा में बदलकर injection की सहायता से skin में जरूरत की जगह इंजेक्ट किया जाता है। plasma में वृद्धिकारक तत्व अत्यधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। इसे बालों की जड़ों में inject करने से जड़ों को जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं और उनको ताकत मिलने से बाल बढ़ने लगते हैं। 

Skin में कसाव : यही वृद्धिकारक तत्व चेहरे की त्वचा में मौजूद कोलेजन नामक प्रोटीन को भी बढ़ाने सहायक होते हैं। इससे झाइयां, हल्की झुर्रियां और उम्र के साथ होने वाली fine lines की problem कम हो जाती हैं। इसके अलावा Platelet Rich Plasma की तकनीक से ढीली त्वचा में कसाव भी लाया जा सकता है। 

अल्सर में भी फायदेमंद : इस तकनीक को ठीक न होने वाले घाव (नॉन हीलिंग अल्सर) और मधुमेह के कारण होने वाले अल्सर के इलाज में भी प्रयोग किया जाता है। 

डॉ॰ साक्षी श्रीवास्तव, त्वचा रोग विशेषज्ञ

10 अच्छी सेहत Health Care Tips

अच्छी सेहत Health Care Tips in Hindi

10 अच्छी सेहत Health Care Tips: Food habbits में थोड़ा-सा change लाने से न केवल अच्छा स्वास्थ्य मिलेगा। जानिए ऐसी कुछ चीजों के बारे में, जो शरीर के लिए फायदेमंद साबित होंगी....

health tips in hindi
health tips in hindi
1 चेहरे पर खुशी के साथ उठें : शरीर को तरोताजा करने के लिए सुबह धूप में बैठ कर ही अखबार पढ़ें। सुबह की रोशनी से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक, मेलाटोनिन हारमोन का उत्पादन रोक देती है। इसी हारमोन से नींद आती है। चेहरे पर मुस्कान के साथ उठने से शरीर में सेरोटॉनिन का लेवल बढ़ने लगता है। जो मूड सुधारता है।

2 व्यायाम के बाद एक गिलास दूध : वेट ट्रेनिंग सेशन के बाद fatless milk पीएं। इसके दो फायदे मिलेंगे। पहला-जिन मांसपेशियों को व्यायाम के दौरान नुकसान पहुंचा होगा, वे ठीक होने लगेंगी। दूसरा दूध में मौजद calcium और vitamin D के जरिए कम वक्त में ज्यादा फैट कम करने में भी सहयोग मिलेगा।

3 एक बार में दो सीढियां चढ़ें: बड़े स्टेप्स लेने के लिए ज्यादा मसल्स ग्रुप की जरूरत पड़ती है। यानी ज्यादा एनर्जी, जिसका मतलब ज्यादा कैलोरीज़ बर्न होना। अगली बार जब सीढ़ियां चढ़ें तो एक बार में दो स्टेप्स एक साथ न लें। इससे एक घंटे में करीब 90 कैलोरीज़ ज्यादा बर्न कर पाएंगे।

4 Health Plant : तुलसी के पौधे में बेहतरीन हीलिंग पावर होता है। गर्म-गर्म चाय में तुलसी की पत्तियां डाल कर पीने से immunity अच्छी होती है। गले की समस्याओं से भी राहत मिलती है।

5 एवोकाडो खाएं ही नहीं, लगाएं भी : त्वचा पर एवोकाडो लगाने से कोलेजन और इलास्टिन का उत्पादन बढ़ने लगता है। एक चौथाई कम क्रीम में एवोकाडो मिलाकर लगाएं। ऐसा करने से कम वक्त में त्वचा चमकती, दमकती दिखाई देगी। 

6 खाने को देखें, सोचें, फिर खाएं : रात के खाने में सबसे पहले देखिए कि विटामिन, मिनरल और फाइबर कंटेंट कितना है? शोध बताते हैं कि अगर खाने से पहले हेल्थ बेनिफिट की ओर ध्यान देने से चॉइस और self control strong बनता है।

7 सिरदर्द से ऐसे पाएं राहत : शोध के मुताबिक 50 फीसदी लोगों में सिरदर्द का कारण डीहाइड्रेशन होता है। ज्यादा से ज्यादा लिक्विड-डेंस्ड फूड खाएं। पानी पीते रहें।

8 ब्रेकफ़स्ट में योगर्ट: ब्रेकफस्ट में 200 ग्राम प्रोबायोटिक रिच yogurt खाएं। प्रोबायोटिक से ब्रेन कैमिस्ट्री बदलने लगती है और डिप्रेशन से संबंधित डिस ऑर्डर कम होने लगते हैं।

9 मांसपेशियों के बारे में सोचें  : आपको वॉशबोर्ड स्टमक चाहिए तो पहले उसकी कल्पना करें। क्योंकि जब हम किसी चीज की कल्पना करतें हैं तो मसल्स ग्रुप उस शेप को हासिल करने के लिए पूरी तरह से जुट जाती हैं।

10 चुकंदर खाएं : चुकंदर के जूस में मौजूद नाइट्रेट से ब्लड प्रेशर कम होता है। एथलीट्स के लिए यह जूस ज्यादा फायदेमंद रहता है। क्योंकि इसे पीने से स्टेमिना और स्पीड बेहतर बनती है। जिम जाने से पहले चुकंदर के जूस का छोटा गलास पीएं।  

Tuesday, 8 March 2016

Mouth Smell Problem in hindi

Mouth Smell Problem in hindi -unbalanced hormones से भी मुंह में दुर्गंध 

मुंह में दुर्गंध की समस्या व्यक्ति के bad health को तो बताती ही है। साथ में उसके confidence को भी प्रभावित कर सकती है। 

Cause कारण : खाद्य कणों के दातों, मसूड़ो में फंसे रह जाने व जीभ पर गंदगी के जमाव से किटाणु पनपते हैं जिससे यह समस्या हो सकती है। मुंह में संक्रमण बढ़ने से दातों व मसूड़ों में मवाद बन सकता है जो ऐसी समस्याएं बढ़ा सकता है। mouth tonsils, गले व अन्य सांस संबंधी संक्रमण भी smell का कारण हो सकते है। 

Mouth Smell Problem in hindi
Mouth Smell Problem in hindi
कुछ परिस्थितियां जैसे किशोरावस्था, गर्भावास्था व अनियमित मासिक धर्म के दौरान कई बार शरीर में hormones unbalanced हो जाते हैं। यह भी एक कारण हो सकता है। पाचन तंत्र में गड़बड़ी व एसिडिटी के कारण भी यह संभव है। 

कुछ खाद्य पदार्थ जैसे प्याज-लहसुन, शराब व ध्रूमपान भी अस्थायी दुर्गंध की वजह होते हैं। 

क्या करें : सुबह-शाम दो बार दांतों की अच्छी तरह सफाई। जीभ व मसूड़ों की सफाई का भी ध्यान रखें। ध्रूमपान व शराब से दूरी बनाएं।  

यदि मुंह में संक्रमण अधिक हो व मवाद बन रहा हो तो किसी दंत रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। उसके निर्देशानुसार ही दवाएं आदि लें। 

सांस, पाचन व हार्मोन संबंधी कारणो से समस्या होने होने पर मुंह की स्वच्छता का विशेष खयाल रखें व संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करें। 

डॉ॰आनन्द नगौरी, 
दंत रोग विशेषज्ञ

Antidepressant Pills Side Effects During Pregnancy

Antidepressant Pills Side Effects During Pregnancy प्रेग्नेंसी में एंटी डिप्रेसेंट लेने से बच्चे को ऑटिज्म का खतरा 

अमेरिकन मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में बाल रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्भावस्था के दौरान अवसाद रोधी (एंटी डिप्रेसेंट) गोलियां खाने वाली महिलाओं से जन्मे शिशुओं में ऑटिज्म का खतरा 87 प्रतिशत बढ़ गया। दुनिया भर में एक प्रतिशत बच्चे शारीरिक, मानसिक क्षमता को प्रभावित करने वाली बीमारी ऑटिज्म के साथ जन्म लेते हैं। इसलिए 87 प्रतिशत का आंकड़ा दिखने में भले अधिक लगे पर वास्तव में वह बहुत कम है। स्टडी में यह भी नहीं बताया गया कि दवाइयों या अवसाद में से किसके कारण ऑटिज्म का खतरा रहेगा।

Child Bed-Wetting - primary and secondary enuresis

Child Bed-Wetting - primary and secondary enuresis
बच्चे द्वारा बेड गीला करने की समस्या से ऐसे निपटें 

Child Bed-Wetting - Primary and secondary enuresis: दो-ढाई years के बच्चे का night को सोते वक्त bed पर टॉयलेट करना आम बात है, क्योंकि उनमें यह habbit तीन वर्ष के बाद develop होती है। ऐसा 4-5 वर्ष की age तक करते रहें तो भी कोई बात नहीं है, लेकिन अगर kid six years के बाद भी bed को गीला कर रहा है तो इसे Nocturnal Enuresis कहा जाता है। इसके लिए बच्चों के विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है। एक बात हमेशा याद रखिए कि ऐसी स्थिति में बच्चे का खुद पर कोई conrol नहीं होता है और इस बात को लेकर बच्चे को डांटने, फटकारने या बेइज्जत करने का कोई मतलब नहीं है। बच्चे को बेइज्ज्त करने से उसकी समस्या बढ़ेगी। वह ज्यादा तनाव में रहने लगेगा। 


दो किस्म के Enuresis -

टाइप-1 बचपन या जन्म के बाद से अगर बच्चा रोज रात को बेड को गीला करता है तो इसे मेडिकल भाषा में Primary Enuresis कहते हैं। यह समस्या ज़्यादातर बच्चों में देखने को मिलती है और इसका कोई एक कारण नहीं होता है। यह समस्या परिवार में सदियों से चलती रहती है। इसलिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं। 

टाइप-2 ब्लैडर पर कंट्रोल सीखने के छ्ह माह या इसके बाद बच्चा बेड गीला करने लगे तो इसे Nocturnal Enuresis कहा जाता है। इसका कोई एक कारण नहीं है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे-युरनरी इन्फेक्शन, डायबिटीज़ या न्यूरोलॉजिकल समस्या। कई बार भावनाओं को ठेस पहुंचने पर भी बच्चा बेड गीला कर देता है। स्ट्रेस भी हो सकता है। 

How to help child -

स्टेप-1 सबसे पहले फिजिकल कारणों का पता लगाएं। जैसे- infection या क्रॉनिक कॉन्स्टीपेशन। बच्चे को बताएं कि ये noraml है। बच्चे को family circle में किसी दूसरे बच्चे का उदाहरण देते हुए इस बात को बेहतर तरीके से समझाएं। बच्चे को बताएं की समझदारी से कोई लेना-देना नहीं है। 

स्टेप-2 बच्चे के साथ simple और practical स्ट्रेटेजी के बारे में बताएं। जैसे सोने से पहले कम से कम पानी पीना, कैफीन युक्त ड्रिंक्स से दूर रहना। सोने के बाद रात को एक बार उठकर टॉयलेट जाना। बेड के पास नाइट लैम्प रखना, जिससे रात के वक्त बच्चे को बाथरूम जाने में परेशानी न आए। उसे ब्लैडर पूरी तरह से भरने पर जिस तरह की सेंसेशन होती हैं, उस बारे में बताएं।  

डॉ. शैलजा सेन
फैमिली थेरेपिस्ट और ट्रेनर, नई दिल्ली 

What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments

What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments

What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments: What Is Bronchitis? न थमने वाली खांसी का दौर शुरू हो गया है। खांसी के साथ बलगम की शिकायत है। ये बलगम की मात्रा जाड़े मे सुबह के समय ज्यादा होती हो। ये सब लक्षण फेफड़े की Bronchitis नामक बीमारी के है।
What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments
What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments
ब्रॉनकियकटेसिस फेफड़े के अंदर स्थित श्वास की नलियों की सूजन व मियादी इंफ़ेक्शन है। इसमें श्वास नली की दीवारें इंफ़ेक्शन व सूजन की वजह से अनावश्यक रूप से कमजोर हो जाती है, जिसकी वजह से इनका आकार नलीनुमा न रहकर गुब्बारेनुमा हो जाता है, जिसका परिणाम यह होता है कि श्वास की नालियों में गाढ़े बलगम का भयंकर जमाव हो जाता है, जो नालियों में रुकावट पैदा कर देता है। इस रुकावट की वजह से नालियों से जुड़ा हुआ फेफड़े का अंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर सिकुड़ जाता है। क्षतिग्रस्त भाग में स्थित फेफड़े को सप्लाई करने वाली धमनी और गिल्टी भी आकार में बड़ी हो जाती है। इन सबका मिला जुला परिणाम यह होता है कि क्षतिग्रस्त फेफड़ा और श्वास नली अपना कार्य सुचारु रूप से नहीं कर पाते और मरीज के शरीर में तरह तरह की जटिलताएं पैदा हो जाती हैं।

Cause of Bronchitis : ब्रॉनकियकटेसिस बीमारी होने का मुख्य कारण छाती में स्थित श्वास नली व उसकी शाखाओं में होने वाला बार बार इंफ़ेक्शन है। इन फेफड़े के बार-बार होने वाले इंफ़ेक्शन में निमोनिया का इंफ़ेक्शन प्रमुख है। अगर इस infection को शुरूआती दिनों में प्रभावी ढंग से रोका नहीं गया तो ब्रॉनकियकटेसिस होने की संभावना होती है। दूसरा कारण TB का infection है। समुचित दवा के बाद टीबी का इंफ़ेक्शन तो नियंत्रण में आ जाता है, पर फेफड़ा व उसमें स्थित श्वास नली पर जाते-जाते स्थिर प्रभाव छोड़ जाता है। इसकी वजह से श्वास नली व फेफड़े की संरचना में बदलाव आ जाता है, जिससे दूसरे किस्म के किटाणु वहां अपना डेरा जमा लेते हैं। धीरे-धीरे श्वास नली के कार्य में बाधा डालते हैं और यहीं से ब्रॉनकियकटेसिस की शुरुआत होती है। 

कुछ लोगों में ब्रॉनकियकटेसिस की बीमारी जन्मजात होती है, जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस रोग बच्चों में होने वाली ब्रॉनकियकटेसिस का एक कारण है। कभी-कभी खून में एक जरूरी तत्व ऐल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन एंजाइम की कमी होना, रयूमेटाइड आर्थराइटिस और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां भी ब्रॉनकियकटेसिस के उत्पन्न होने का बड़ा कारण है। कभी-कभी बच्चे अंजाने में चना, मटर या सिक्का या कोई अन्य छोटी वस्तु मुंह में डाल लेते हैं। जो भोजन की नली में न जाकर कभी कभी श्वास नली में चली जाती है और नीचे जाकर फेफड़े में स्थित श्वास नली में जाकर अटक जाती है। यहीं से उस बंद श्वास नली से जुड़े हुए फेफड़े के हिस्से में ब्रॉनकियकटेसिस की शुरुआत होती है। 

ब्रॉनकियकटेसिस Symptoms: 
  • छाती में इंफ़ेक्शन होते रहना। सांस फूलना। 
  • न थमने वाली और काफी देर तक चलने वाली खांसी जो बेहाल कर दे।
  • खांसी के साथ गाढ़ी बलगम का आना। 
  • केवल सूखी खांसी का निरंतर आना। 
  • सांस लेते समय छाती में गड़गड़ की आवाज होना। 



ब्रॉनकियकटेसिस के प्रभावी इलाज के लिए उसके कारणों को ढूंढ कर उन पर नियंत्रित किया जाए। इस मर्ज के इलाज के लिए antibiotics का सही ढंग से इस्तेमाल होना चाहिए। क्षतिग्रस्त श्वास नली में जमे हुए गाढ़े बलगम को निकालने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। कुछ विशेष दवाएं कारगर सिद्ध होती हैं। कुछ विशेष शारीरिक मुद्राएं और physiotherapy भी बलगम को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इसके इलाज में ऑपरेशन की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। 

डॉ. केके पाण्डेय
सीनियर वैस्कूलर व
कार्डियो थोरेसिक सर्जन अपोलो अस्पताल, दिल्ली।

ओवोसाइट इनोवेटिव टेक्नोलॉजी Egg (oocyte) freezing Innovative Technology

ओवोसाइट इनोवेटिव टेक्नोलॉजी Egg (oocyte) freezing Innovative Technology 

Many times female, अधिक उम्र की होने के बावजूद baby plan नहीं कर पाती है। उन्हें यह चिंता सताने लगती है कि क्या वह अधिक age में पहुंचकर सेहतमंद baby को जन्म दे पाएंगी या नहीं? उन्हें ये चिंता भी रहती है कि क्या वे अपने Eggs को freez कर सकती हैं। इसका जवाब है कि ओवोसाइट प्रिजर्वेशन से अंडे को freez करना मुमकिन है। 


ओवोसाइट इनोवेटिव टेक्नोलॉजी है। इस तकनीक की मदद से महिला ज्यादा उम्र में बच्चा पैदा करने के सक्षम बनती है। यह तकनीक उन महिलाओं के लिए और भी ज्यादा फायदेमंद है, जो किसी बीमारी के चलते या पढ़ाई-लिखाई के लिए या फिर कॅरियर डेवलपमेंट के कारण बच्चा लेट प्लान करती है। 
इसका प्रोसेस पूरी तरह से इन-विट्रो फर्टेलाइजेशन (आईवीएफ़) या टेस्ट ट्यूब बेबी जैसा है। इसमें महिला को कुछ दिनों तक हॉरमोन इन्जेक्शन दिए जाते हैं, जिससे multiple egg पैदा किए जा सकें। ultrasound गाइडेड नीडल से वजइना अंडर सिडेशन के जरिये अंडो की ओवरी से निकाला जाता है। अंडे को शरीर से निकलते ही उन्हें कई वर्षो तक फ्रिज किया जाता है। 
हाल ही में एक नई रेपिड फ्रीजिंग टेक्नीक, विट्रिफिकेशन ड़ेवलप की गई है। इसके जरिए ओवोसाइट का सर्वाइवल काफी अच्छा है और महिला के गर्भवती होने की संभावना भी IVF टेक्नीक से ज्यादा बेहतर होती है। इस तकनीक के जरिये वर्ष 1986 में पहली बार महिला गर्भवती हुई थी। इस तकनीक की मदद से अब तक दुनियाभर में एक हजार से ज्यादा बच्चों का जन्म हो चुका है। इसमें बच्चे और मां को किसी तरह का कोई खतरा नहीं रहता, लेकिन एग बैंकिंग करने के बारे में 35 वर्ष से पहले सोचना ज्यादा जरूरी है। इससे बेहतर नतीजे मिलते हैं। अंडे की बैंकिंग जितनी जल्दी होगी, बच्चा उतना ही स्वास्थ पैदा होगा। बायोलॉजिकल उम्र के अलावा जीवनशैली से भी अंडे की क्वालिटी प्रभावित होती है। जितनी अच्छा जीवनशैली, उतने हेल्दी अंडा होता है। कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखें, जैसे- स्ट्रस से दूर रहना, धूम्रपान न करना, फल-सब्जियों का सेवन ज्यादा और वजन को काबू में रखने से क्वालिटी अंडे मिलते है।

डॉ॰ कामिनी राव 
फर्टेलिटी स्पेशलिस्ट और मेडिकल डायरेक्टर, मिलान फर्टेलिटी सेंटर, बेंगलुरु 

शरीर में कैल्शियम Calcium Intake and Bone Mineral Density BMD

What is BMD (Bone Mineral Density)
शरीर में कैल्शियम Calcium Intake and Bone Mineral Density BMD
बुजुर्ग व्यक्ति दिन में एक हजार एमजी कैल्शियम ही लें -
खाने की चीजों से ही शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ाने से होगा फायदा

What is BMD : बीएमडी से मतलब है कि प्रति स्क्वेयर सेंटीमीटर बोन में कितना मिनरल मैटर मौजूद है। यह ओस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का पतले होनी) की निशानी भी है। BMD कम होने से फ्रैक्चर की संभावना भी बढ़ जाती है। थोड़ा-सा पैर मुड़ने या गिरने पर फ्रैक्चर आ सकता है। इससे भी कुछ फ्रैक्चर आम हैं, जैसे लोअर बैक, हिप या थाई बोन का फ्रैक्चर। हड्डियों में कमजोरी होने के कारण फ्रैक्चर जल्दी ठीक नहीं होता और व्यक्ति डिसएबल भी हो सकता है। 

Recommandation : बुजुर्ग लोगों को प्रतिदिन एक हजार से 12 सौ एमजी कैल्शियम टेबलेट खानी चाहिए। इस लेवल को हासिल करने के लिए सप्लीमेंट खाने की सलाह दी जाती है। जबकि समान्य व्यक्ति को प्रतिदिन 600 से 800 एमजी कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। 

BMD Level and calcium: इस विषय पर कई शोध हो चुके हैं कि डायटरी कैल्शियम या सप्लीमेंट्स का सेवन बढ़ाने से कोई खास लाभ नहीं होता है, डायटरी कैल्शियम बढ़ाने से बीएमडी सिर्फ 0.6 से 1.0 फीसदी ही बढ़ पाता है, जो कुछ खास नहीं है। इतना अंतर भी एक साल तक डायटरी कैल्शियम लेते रहने के बाद आता है। कैल्शियम सप्लीमेंट लेने के एक वर्ष बाद बीएमडी सिर्फ 0.7 से 1.8 फीसदी बढ़ता है। इसका फ्रैक्चर होने के खतरे में कोई विशेष असर दिखाई नहीं देता है। कैल्शियम को विटामिन-डी के साथ लेने से कोई फायदा नहीं होता। फायदा सिर्फ विटामिन-डी का ही होता है। 

कैल्शियम टेबलेट या सप्लीमेंट की बजाय खाने-पीने की चीजों से शरीर में कैल्शियम बढ़ाएं। जैसे ज्यादा दूध पीए। दही, संतरे, ब्रोकली आदि खाएं। इन चीजों का सेवन तभी बढ़ाएं, जब ब्लड कैल्शियम लेवल, समान्य से कम हो। 

सप्लीमेंट्स की तरफ झुकाव इसलिए कम होना चाहिए क्योंकि इनका कोई खास फायदा नहीं होता है, लेकिन साइड इफेक्ट ज्यादा होते हैं। जैसे- भूख कम होने लगती है। कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। मुंह हमेशा सूखा-सूखा रहता है। प्यास बढ़ जाती है। गुर्दे में पथरी की समस्या आम देखने को मिलती है। साथ ही पेट की समस्याएं होने लगती हैं।  

डॉ. चंद्रा एम. गुलाटी
ड्रग एक्सपर्ट, नई दिल्ली।

विटामिन डी Vitamin D Health Benefits in Hindi

 विटामिन-डी की कमी से होती हैं बीमारीयां -
विटामिन डी Vitamin D Health Benefits in Hindi-Vitamin D Ke Fayde

रोज पंद्रह मिनट धूप (Sun Light) में बैठने से शरीर में होगा विटामिन-डी का उत्पादन 

हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन-डी खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन विटामिन-डी का सिर्फ इतना ही काम नहीं है। यह शरीर के बाकी अंगो के लिए जरूरी है। धूप में बैठने से शरीर में विटामिन-डी का उत्पादन शुरू होता है। जबकि ज़्यादातर ऐसा करते नहीं हैं। देश में 80 फीसदी गर्भवती महिलाओं में विटामिन-डी का रक्त काम पाया जाता है। हाल ही में हुए शोध के अनुसार दुनिया में करीब 1 बिलियन लोगों के शरीर में विटामिन-डी की कमी है। 
Vitamin D Health Benefits in Hindi
Vitamin D Health Benefits in Hindi
According to research - शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी होने से कैंसर, ह्रदय रोग, डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, बोन फ्रैक्चर आदि का खतरा कम हो जाता है। महिलाओं को विटामिन-डी के बारे में ज्यादा सचेत रहना चाहिए, क्योंकि ब्रेस्ट मिल्क में इसका अहम योगदान है। गर्भवती महिला में विटामिन-डी का लेवल कम होने के कारण नवजात शिशु में कई बीमारियां जैसे- इन्फेक्शन, अस्तमा, सांस लेने की दिक्कत आदि हो सकती है। 

How to get Vitamin D : अगर प्रतिदिन मात्र 15 से 30 मिनट के लिए बाजू और टांगों पर धूप गिरती रहे तो इतने वक्त में शरीर विटामिन-डी बनाने के सक्षम बनता है। अगर ऐसा संभव नहीं हो पा रहा तो जिन खाने की चीजों में विटामिन-डी पाया जाता है, जैसे- फिश लिवर से बने खास किस्म के ऑइल या सैलमन जैसी मछलियों का सेवन करें। 

कुछ मशरूम जो सूर्य की रोशनी में बढ़ते हैं, उनमें भी विटामिन-डी भारी मात्रा में पाया जाता है। कुछ देशों में विटामिन-डी को खाने में फोर्टिफाय किया जा रहा है। शोध के अनुसार- हाई बेकिंग टेम्प्रेचर पर विटामिन-डी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इसलिए इसे उसी फॉर्म में आसानी से खाया जा सकता है। ऐसे में ब्रेड को विटामिन-डी के लिए फोर्टिफाय किया जा सकता है। 

शरीर में विटामिन-डी की कमी के कारण हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में हुए शोध के अनुसार जिन लोगों के शरीर में विटामिन-डी की कमी होती है, उनका ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है। शरीर में 10 फीसदी विटामिन-डी कंसन्ट्रेशन बढ़ने से हाइपरटेंशन की समस्या कम हो सकती है। यह शोध यूरोप और उत्तरी अमेरिका के करीब 1.55 लाख लोगों पर किया गया था। इसलिए खान-पान की ओर विशेष ध्यान दें।         

डॉ॰ विकास साहनी, क्लीनिकल 
कार्डियोलॉजिस्ट व रिसर्चर, 
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल

Wednesday, 24 February 2016

डायबिटीज Diabetes Symptoms Prevention and Treatment

डायबिटीज  Diabetes Symptoms Prevention and Treatment
डायबिटीज : पहले ही करें कंट्रोल

डायबिटीज Diabetes Symptoms Prevention and Treatment: 7% अतिरिक्त शरीर का वजन संतुलित आहार की मदद से कम करने पर डायबीटिज होने का 58 फीसदी खतरा कम हो जाता है। (स्त्रोत : यूएस बेस्ड प्रिवेंशन प्रोग्राम के अनूसार)

डायबिटीज नहीं हुई है पर होने की संभावना है, ऐसे में इन बातों को अपनाकर डायबिटीज से बच सकते हैं...

अगर डायबिटीज नहीं हुई है लेकिन ब्लड शुगर लेवल डायबिटीज के खतरे के निशान के आसपास है तो डायबिटीज कभी भी हो सकती है। शुगर के स्तर को नियंत्रित करके आप टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट स्ट्रोक और हृदय रोगों को होने से पहले ही रोक सकते हैं।

मिश्रित अनाज से बना भोजन कीजिए-

लो जीआई (ग्लाइसीमिक इंडेक्स) फूड खाने से मीठा खाने की इच्छा भी कम होती है। इसलिए खाने में कोई एक अनाज लेने की बजाए गेहूं, रागी, बाजरा, ज्वार, चना आदि शामिल करें। खाने में अलग-अलग तरह की दालों का सेवन करने से विटामिन और मिनरल्स मिल जाता है। रोजाना 2 ग्राम दालचीनी शामिल करने से डायबिटीज और प्री डायबिटीज वाले दोनों लोगों को फायदा होगा। यह ब्लड शुगर लेवल को कम करती है।

ब्लड शुगर का स्तर जांचते रहिए-

जिनका कद के अनुसार वजन 25 से ज्यादा है और घर में वंशानुगत तौर पर कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप के साथ डायबिटीज है या फिर गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज थी। तो ब्लड शुगर की जांच कराते रहना चाहिए।

व्यायाम करने से होगा फायदा-

20 मिनट तक अपनी कुर्सी पर बैठे रहने के बाद एक बार जरूर अपनी जगह से उठकर थोड़ा चलें। यह ब्लड शुगर को बढ़ाने से रोकेगा। खाने के बाद इंसुलिन को बढ़ाने वाली मांसपेशियां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। जिम में सप्ताह में 150 मिनट कार्डियो और वेट ट्रेनिंग करने से फायदा होगा। रोजाना 30 मिनट पैदल चलना भी अच्छा व्यायाम है।

कम सोने से बढ़ सकता है शुगर लेवल-

जो लोग 6 साल तक सप्ताह में 1 दिन 6 घंटे से कब सोते हैं उन्हे डायबिटीज होने का खतरा 4 गुना ज्यादा होता है। जो लोग सप्ताह में 4 दिन 4.5 घंटे की नींद लेते हैं। उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।

दवाइयां ले सकते हैं-

मेटफॉरिन दवाई टाइप-2 डायबिटीज के मरीज ले सकते हैं। जो ग्लूकोज को कम करने और इंसुलिन की सेंसेटिविटी को बढ़ाती है। अगर उम्र 45 साल से कम है और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 35 से ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह पर लें।

ज्यूडिथ फ़्रेडकिन, एमडी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज, डाइजेस्टीव एंड किडनी डिसीज बेठेस्डा मैरीलैंड, अमेरिका

आयोडीन iodine health benefits and Food Supplements

आयोडीन iodine health benefits and Food Supplements

Importance of iodine in the human body : सेहत खाने में आयोडीन का होना बहुत जरूरी है, लेकिन यह नमक के अलावा और भी चीजों में पाया जाता है। 

खाने में आयोडीन क्यों और कितना लेना फायदेमंद- 

आयोडीन हमारे शरीर के विकास के लिए बहुत जरुरी है, गर्भावस्था के दौरान ही इसकी ज़रूरत पड़ती है। इसकी कमी से कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है। आयोडीन बढ़ते शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड ग्रंथी को सुचारु करने के लिए बहुत जरूरी है। इसकी हमारे शरीर के विकास एवं जीवन के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। आयोडीन हमारे शरीर के तापमान को भी विनियमित करता है। इसलिए आयोडीन की कमी शरीर में न होने दें। जिन लोगों को थायराइड, उच्च रक्तचाप या अन्य कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो आयोडीन के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लीजिए।

आयोडीन iodine health benefits and Food Supplements

कितनी मात्रा है आवश्यक-

आयोडीन के सेवन का मतलब यह नहीं कि आयोडीन ही खाते रहें। एक व्यक्ति को रोजाना एक छोटे चम्मच से भी कम आयोडीन की आवश्यकता होती है। चूंकि आयोडीन शरीर में जमा नहीं रह सकता, इसलिए इसे रोजाना लेना जरूरी है। डब्ल्यूएचओ ने व्यक्ति के शरीर की आवश्यकता के हिसाब से आयोडीन की मात्रा का निर्धारण किया है। गर्भवती महिलाओं को 200-220 माइक्रोग्राम, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 250-290 माइक्रोग्राम, 1 वर्ष से छोटे शिशुओं को 50-90 माइक्रोग्राम, 1-11 वर्ष के बच्चों के लिए 90-120 माइक्रोग्राम और वयस्कों तथा किशोरों के लिए 150 माइक्रोग्राम आयोडीन प्रतिदिन लेना चाहिए।

Natural Source of Iodine ये हैं आयोडीन के प्राकृतिक स्त्रोत -

आलू - 

आलू में आयोडीन पाया जाता है। बिना छिले आलू को पकाकर या उबालकर सेवन करने से 60 माइक्रोग्राम आयोडीन मिलता है। सभी प्रकार के आलू में आयोडीन पाया जाता है, लेकिन जैविक खेती से तैयार आलू को आयोडीन का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है।

सेंधा नमक-

इस नमक को भूरे यानी ग्रे सॉल्ट के रूप में भी जाना जाता है। यह आयोडीन का बहुत अच्छा स्त्रोत है। हालांकि सभी प्रकार के प्रसंस्कृत नमक में आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है। जैविक और अप्रसंस्कृत हिमालयन नमक में लगभग 500 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है।

करौंदा-

करौंदा कहीं गुणों से युक्त है। इसे एंटीबायटिक का अच्छा स्त्रोत मानते हैं, साथ ही इसमें आयोडीन की भरपूर मात्रा भी होती है। केवल 100 ग्राम करौंदे में 400 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है आप इस के ताजे फलों का सेवन कर सकते हैं इसका जूस भी फायदेमंद है।

सेम-

सेम में आयोडीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। केवल आधा कप सेम में 32 माइक्रोग्राम आयोडीन होता है। सेम से न केवल आयोडीन मिलता है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद हैं। इनमें फाइबर पाया जाता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

केल्प या समुद्री शैवाल-

केल्प या अन्य समुद्री शैवाल में आयोडीन पाया जाता है। केवल केल्प में ही इतना अधिक आयोडीन होता है कि वह दूसरे अन्य फलों से चार गुना अधिक है। इनका सेवन सलाद, सूप या अन्य व्यंजनों में प्रयोग किया जा सकता है। दाल, दूध, मछली और खाने योग्य समुद्री जीव मास तथा अंडों में भी आयोडीन होता है।

डॉ. अंजलि हुड्डा सांगवान, एमडी इंटरनल मेडीसिन यूएसए, कंसल्टेंट मेटाबॉलिक मेडिसिन एंड न्यूट्रीशियन, दिल्ली

सिंघाड़ा Singhara (Water caltrop) Health Benefits

सिंघाड़ा (Water caltrop) Health Benefits Home Remedy

सिंघाड़ा (Water caltrop) Health Benefits Home Remedy: दाद : नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को घिस कर लगायें। पहले तो कुछ जलन लगेगी, फिर ठंडक पड़ जाएगी। कुछ दिन इसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
सिंघाड़ा Singhara (Water caltrop) Health Benefits
सिंघाड़ा Singhara (Water caltrop) Health Benefits
सिंघाड़े में आयोडीन अधिक होता है। गले के रोग, टॉन्सिल आदि में इसे खाना चाहिए।

गर्भाशय की निर्बलता से गर्भ नहीं ठहरता, गर्भस्राव हो जाता हो तो कुछ सप्ताह ताजे सिंघाड़े खाने से लाभ होता है।

प्रदर : सिंघाड़े के आटे का हलुआ खाने से श्वेत प्रदर एवं रोटी खाने से रक्त-प्रदर ठीक हो जाता है।

चौलाई Chaulai Green Amaranth Leaves Ke Fayde

चौलाई Green Amaranth Leaves Health Benefits Fayde

चौलाई (chaulai benifits) Home Remedy Green Amaranth Leaves Health Benefits Fayde: चौलाई का रस गठिया, ब्लडप्रेसर और ह्रदय के रोगियों के लिए लाभदायक है। इसकी सब्जी भी खाई जा सकती है। पेट के रोग, कब्ज़ और बाल गिरने पर चौलाई की सब्जी खाना लाभदायक है।


पथरी : चौलाई के पत्तों का साग नित्य खाते रहने से पथरी गल जाती है।

रक्तचाप, बलगम, बवासीर, गर्मी के दुष्प्रभाव चौलाई की सब्जी नित्य खाने से ठीक हो जाते हैं।

भूख : चौलाई का साग भूख बढ़ाता है। इसमें सोना (Gold) पाया जाता है।

पागल कुत्ते के काटने के बाद व्यक्ति जब पागल हो जाये, स्वयं ही दूसरों को काटने लगे, ऐसी अवस्था में काँटे वाली जंगली चौलाई की जड़ 50 ग्राम से 125 ग्राम तक पीसकर पानी में घोलकर बार-बार पिलाने से मरता हुआ रोगी बच जाता है। यह विष-नाशक है। हरेक दंश पर लेप करें। 

चौलाई का शाक रूखा होता है। चौलाई का शाक नशा और विष के प्रभाव को नष्ट करता है। रक्तपित्त में लाभदायक है

मिट्टी Medicines Home Remedy

मिट्टी Medicines Home Remedy 

फोड़ा : किसी भी प्रकार की सूजन, फोड़ा, अंगुली की विषहरि हो, गीली मिट्टी का लेप हर आधे घंटे से बदलते रहें, लाभ होगा। फोड़ा बड़ा तथा कठोर हो, फूट न रहा हो तो उस पर गीली मिट्टी का लेप करें। इससे फोड़ा फूटकर मवाद बाहर आ जाती है। बाद में गीली मिट्टी की पट्टी बांधते रहें। मिट्टी की पट्टी या लेप रोग को बाहर खींच निकालने में समर्थ है।

कनफेड़ (Mumps) : इन पर काली मिट्टी का लेप करने से लाभ होता है।
दांतों की मजबूती : दांत हिलते हों, लगता हो कि टूटने वाले हैं तो चिकनी मिट्टी (चाहे काली हो या लाल) को भिगोकर नृत्य प्रातः वह शाम मसूड़ों पर लगाएं। दांत मजबूत हो जाएंगे।

दांत दर्द : साफ मिट्टी से नित्य तीन बार मंजन करें, तो दांत दर्द इससे ठीक हो जाता है।

पायोरिया : साफ मिट्टी पानी में भिगोकर कुछ समय मुंह में रखें, फिर थूक कर कुल्ले करें। मिठाई न खाएं। पायोरिया व दांतों के रोगी का लाभ होगा। 

कब्ज : पेट पर गीला कपड़ा बिछायें। उस पर गीली मिट्टी का लेप करें, मिट्टी बिछाएं। इस पर फिर कपड़ा बाँधें। रात भर इस तरह पेट पर गीली मिट्टी रखने से कब्ज दूर होगी। मल बंधा हुआ साफ आएगा।

सिर दर्द : गीली मिट्टी की पट्टी सिर पर रखने से सिर दर्द दूर होता है।

बिच्छू, बर्र काटना : गीली मिट्टी की पट्टी बाँधें।

ज्वर : गीली मिट्टी की पट्टी पेट पर बाँधें, हर घंटे से बदलते रहें। इससे ज्वर की तपन हट जाएगी।

नकसीर : दस ग्राम मुल्तानी मिट्टी रात को मिट्टी के बर्तन में आधा किलो पानी में भिगो दें। प्रातः पानी को नितार कर पियें। वर्षों पुरानी नकसीर कुछ दिन इसे पीने से ठीक हो जाएगी।

तितली के रोग में एक माह तक पेट पर गीली मिट्टी लगाने से लाभ होता है।
 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

गर्भधारण How age affects pregnancy in Hindi

How age affects pregnancy : गर्भधारण - tips for pregnancy in Hindi


How age affects pregnancy -गर्भधारण - tips for pregnancy in hindi: 35 वर्ष से पहले प्रेंगनेंट होना बहुत जरूरी है। इसमें देरी करने से मां व बच्चे दोनों के लिए कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं | 

गर्भधारण - tips for pregnancy in hindi
गर्भधारण - tips for pregnancy in hindi
बढ़ती उम्र में गर्भवस्था से ये खतरा 

उम्र बढ़ने के साथ-साथ ओवरी में एग को धारण करने की क्षमता कम होती है। 30 की उम्र के बाद ऐग कम होने के कारण कंसीव करने में परेशानी होती है। इससे एंडोमेट्रियोसिस या फेलोपियन ट्यूब भी ब्लॉक हो सकती है।

जन्मजात विकृति का खतरा :

एक अनुमान के अनुसार 30 वर्ष से कम उम्र में गर्भधारण करने पर शिशु में डाउन सिंड्रोम या क्रोमोजोम में अनियमितता की शिकायत 1000 हजार में एक शिशु में होती है। वहीं 40 वर्ष के बाद यह 100 में एक हो जाती है। और 45 के बाद यह 30 में एक हो जाती है।

प्रसव में जटिलताएं

उम्रदराज महिलाओं को भी प्रसव के दौरान काफी परेशानी होती है। इन महिलाओं में प्रसवकाल ज्यादा खिंच सकता है। कुछ मामलों में सिलेक्शन की भी जरूरत पड़ सकती है। उम्र बढ़ने के साथ यूटेरस की भी उम्र बढ़ती है। जिससे उम्रदराज महिलाओं को यूटेरस बेहतर तरीके से काम नहीं कर पाता है।
 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

छोटी इलायची Choti Elaichi (CARDAMOM) Ke Fayde Health Benefits

Choti Elaichi छोटी इलायची (CARDAMOM) Ke Fayde Health Benefits Home Remedy

Choti Elaichi छोटी इलायची (CARDAMOM) Ke Fayde Health Benefits Home Remedy: प्रकृति : न गर्म न ठंडी। यह मुख शोधक, दुर्गन्धनाशक, वमन शामक रूचिकारक हृदय-बल-दायक, कफ नि:सारक, मूत्रजन, शूलहरक तथा बलकारक है।


सिर दर्द में इलायची पीस कर सिर पर लेप करने से सिरदर्द बंद हो जाता है। इसके चूर्ण को सूँघना चाहिए। सूँघने से छींके आकर मस्तक पीड़ा घाटती है।

पेट-दर्द में दो इलायची पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से लाभ होता है।

खाँसी, दमा और हिचकी में इलायची खाने से लाभ होता है।

मूत्र कृच्छ : इलायची को पीसकर दूध के साथ लेने से मूत्र खुलकर आता है तथा मूत्रदाह बंद होता होता है।

पथरी में इलायची लाभदायक है। पेशाब की जलन दूर करती है।

रक्त पित्त : भूखे पेट दो इलायची प्रतिदिन चबा कर खायें और इस पर दूध या पानी पियें। लाभ होगा। यह परीक्षित है।

इलायची के छिलकों को एक तकिये में में भरकर लगातार आठ महीने तक नीचे दबाने से जोड़ का दर्द ठीक हो गया।   
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Kapoor कपूर (CAMPHOR) Home Remedy Health Benefits

 कपूर (CAMPHOR) Home Remedy Health Benefits 

Kapoor कपूर (CAMPHOR) Home Remedy Health Benefits: कपूर कीटाणुनाशक है।

दाँत-दर्द हो तो दाँत पर कपूर दवायें। दाँत में छेद हो तो कपूर भर दें। दर्द दूर होगा, कीड़े भी मर जायेंगे।

kapoor ke fayde
kapoor ke fayde
छाले, पायोरिया हो तो देसी घी में कपूर मिलाकर नित्य चार बार लगायें और लार गिराते रहें। फिर कुल्ले कर लें।

खुजली, फुंसियाँ होने पर दस ग्राम कपूर को 100 ग्राम नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से लाभ होता है। तेल को जरा सा गर्म करके फिर कपूर मिलायें। नारियल के तेल के स्थान पर कोई सा भी, खाने में प्रयोग किया जाने वाला, तेल मिला सकते हैं। कपूर में त्वचा को सुन्न करने का गुण है। जिससे खुजली शीघ्र बंद हो जाती है।
 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

खसखस (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits

खसखस  (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits and Home Remedy

खसखस  (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits and Home Remedy : पेचिश, दस्त : दो चम्मच खसखस में पानी डालकर पीस कर चौथाई कप दही में मिला कर नित्य दो बार छ: घंटे के अंतर में खाने से पेचिश, दस्त और मरोड़ ठीक हो जाते हैं। खसखस की खीर बना कर खाने से भी लाभ होता है।

खसखस  (पोस्त के दाने) fayde Poppy Seeds Health Benefits
खसखस  (पोस्त के दाने) Poppy Seeds Health Benefits 
शक्तिवर्धक : खसखस की खीर खाने से शक्ति बढ़ती है। दो चम्मच खसखस रात को पानी में भिगो दें, उसे पीस कर प्रात: स्वादानुसार मिश्री मिला कर पानी में घोल कर लस्सी बना कर पीने से गर्मी में मस्तिष्क ठंडा रहता है, और गर्मी कम लगती है। खसखस का शर्बत भी लाभदायक है।

गर्मी में होने वाले चर्म-रोग : गर्मी में बच्चों के प्राय: फोड़े-फुंसियां निकलती रहती हैं। खसखस का शर्बत नियमित पीते रहने से गर्मी के मौसम में होने वाले चर्म-रोग ठीक हो जाते हैं तथा खसखस का शर्बत नित्य पीते रहने से गर्मी के कारण होने वाले चर्म-रोग नहीं होते। संक्रामक चर्म-रोग भी नियमित खसखस का शर्बत पीने से ठीक हो जाते हैं।

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माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet

माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet

माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet - 1. माँसाहार से मानव क्रूर व हिंसक बनता है।

माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet
माँसाहार से हानियाँ Disadvantage of non vegetarian diet

2. माँस सेवन मनुष्य को कामी, क्रोधी, असहिष्णु, चिड़चिड़ा और आलसी बनाता है।

3. माँस सेवन कई प्रकार की बीमारियों जैसे मोटापा, रक्तचाप, कैंसर, गठिया, मधुमेह, पित्त संबंधी एवं हृदय के रोगों को आमंत्रित करता है।

4. माँसाहार से पाचन क्रिया में विखंडन एवं दुर्गंध पैदा होती है जिससे अपच हो जाता है पसीने में बदबू आती है।

5. भोजन विषाक्तता के कुल मामलों में से 70 प्रतिशत के लिए माँसाहार उत्तरदायी है।

6. माँसाहारी लोगों का पेशाब तेजाब युक्त होता है इससे शरीर के रक्त का तेजाब और क्षार का अनुपात बिगड़ जाने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in hindi

बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in Hindi

बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in Hindi -उल्टी : बार-बार उलटी होने पर बर्फ चूसने से उलटी बंद हो जाती है। हैजे की उलटियों में भी यह लाभदायक है। 
बर्फ (ICE) benefits Home Remedy in Hindi
भूख न लगना : गर्मी के कारण भूख न लगने पर खाना खाने के एक घंटा पहले बर्फ का पानी पीने से भूख खुलकर लगती है।

लू लगना : बीमार के कपड़े उतार कर हवा करें। ठंडक पहुँचायें। बर्फ के पानी से स्पंज करें। बर्फ के पानी में चद्दर भिगोकर शरीर पर लपेट दें। ऐसा 102 डि॰ फा॰ ज्वर आने तक करें।

चोट लगकर रक्त बह रहा हो तो बर्फ के पानी की पट्टी बाँधें व बर्फ का टुकड़ा रखें। इससे रक्तस्राव बंद हो जाता है।

यदि शिशु जन्म के बाद न रोता हो और न साँस ही लेता प्रतीत होता हो परंतु जीवित है तो उसकी गुदा-द्वार पर बर्फ का टुकड़ा रख दें, वह तुरंत ही साँस लेने लगेगा और रोने लगेगा। 

 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले | 

राई Black Mustard Seeds Health Benefits home remedy

राई home remedy - Black Mustard Seeds Health Benefits in Hindi

राई home remedy -Black Mustard Seeds Health Benefits in Hindi - राई गरम और पसीना लाने वाली होती है। इसका लेप करने से त्वचा लाल हो जाती है और रक्तवाहिनियां उत्तेजित हो जाती हैं जिससे उस भाग में शून्यता पैदा हो जाती है।
Rai home remedy

लेप विधि : राई को ठंडे पानी के साथ पीसें। साफ मलमल के कपड़े को जिस अंग पर लेप करना हो, बिछा दें। फिर उस कपड़े पर पीसी हुई राई फ़ैला दें, लेप कर दें। कपड़ा न रखकर लेप करने से त्वचा पर फुंसियां हो जाती हैं। इसे अधिक समय न रखें। लेप करीब 10-15 मिनट रख सकते हैं।
अजीर्ण होने पर 3 ग्राम राई पीस कर पानी में घोल कर पीयें।

उबरशुल और दु:साध्य उलटियों को रोकने के लिए पेट पर राई का लेप आश्चर्यजनक वस्तु है।

हैजा : रोगी को बहुत उल्टी, दस्त होते हों और शरीर में बाँयटे आते हों, अंगों में शिथिलता पैदा हो रही हो, ऐसी स्थिति में राई का लेप बहुत लाभ देता है। हेजा के अलावा भी उलटी, दस्त होते हों, किसी औषधि से न रुकते हों तो राई के लेप से रुक जाते हैं। लेप पेट पर करें।

विष : दो चम्मच राई का चूर्ण पानी के साथ लेने से जोरदार उलटी होकर विष का प्रभाव कम हो जाता है।

मिरगी : राई को पीस कर सुंघाने से मिरगी की मूर्च्छा दूर हो जाती है।

मासिक धर्म में गड़बड़ी होने पर भोजन से पहले से दो ग्राम राई का चूर्ण प्रथम ग्रास के साथ खाएं।

जुकाम : राई को शहद में मिलाकर सूंघने व खाने से जुकाम मिटता है।

हिचकी : दस ग्राम राई, 250 ग्राम पानी में उबालकर छानकर गुनगुना रहने पर पिलाने से हिचकी बंद होती है, चाहे किसी भी कारण से हो।

 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले |  

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi -माँस एवं अंडों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है जिसके कारण दिल की बीमारी, रक्तचाप, गुर्दों के रोग, पित्त की थैली में पथरी आदि रोग पैदा हो जाते हैं।

माँस में विद्यमान कीटाणू एवं वसा शरीर की प्रतिरोधक शक्ति घटाता है।
माँसाहार तामसी प्रवृत्ति पैदा करता है जिससे कि समाज में आपसी मन-मुटाव असहृदयता व निर्दयता जैसी बुराइयां पनपती है।

शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi
शाकाहार के लाभ Vegetarian Benefits in Hindi
शाकाहार के लाभ - 
  • शाकाहार जीवन को दीर्घायु, शुद्ध, बलवान एवं स्वस्थ बनाता है।
  • शाकाहार "जीओ और जीने दो" के सिद्धान्त को प्रतिपादित करता है।
  • शाकाहारी माँसाहारी की तुलना में अधिक मात्रा में उष्णता (कैलोरीज़) विटामिन, प्रोटीन एवं धातु प्राप्त करते हैं।
  • पशु के सड़े गले माँस के खाने से होने वाली बीमारियों से बचा रहता है।
  • सरसों का तेल, दालें, हरी सब्जियाँ व चना का उपयोग शरीर में विद्यमान कोलेस्ट्रॉल में  कमी करता है। 
  • शाकाहारी भोजन मन में दया, समानता, आपसी स्नेह और सहनशीलता उत्पन्न करता है।
  • शाकाहारी संकल्प हिंसा के दोष से मुक्त रहता है। अत: वह सब बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष का रास्ता प्रशस्त करता है।
  • शारीरिक नैतिक और आध्यात्मिक सभी द्रष्टि से शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वोत्तम है।
  • शाकाहारी अधिक उत्पादक हैं और कम से कम अपव्ययी है। शाकाहारी कम खर्च में जीवन निर्वाह कर सकता है।
  • सात्विक भोजन से ही मनुष्य अध्यात्म के मार्ग पर चल सकता है।
  • शहरी नागरिकों को कब्ज व सिरदर्द का रोग भोगना पड़ता है। इनसे बचने के लिए फलों व सब्जियों के रस का सहारा लेना चाहिए।
  • फलाहार विटामिन की कमी के कारण होने वाले रोगों से बचाव एवं छुटकारा देता है।
  • दुर्बल रोगी फलों अथवा सब्जियों के रसों का उपयोग कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • भुने हुए चने की एक मुट्ठी भर मनुष्य प्रातः काल खा ले तो उसे क्षय या प्लूरेसी की बीमारी जन्म भर नहीं हो सकेगी।
  •  मनुष्य के दाँतों और आँतों की रचना शाकाहारी भोजन के लिए की है। मांसाहार तो हिंसक पशुओं का आहार है।
 सावधानी - यहाँ पर दिए गए किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ  Dr से सलाह ले |