Monday, 31 August 2015

Benefits of Yoga - बीमारी के बाद की कमजोरी दूर करे योग

Raja Rani Aasan -Yoga
बीमारी के बाद की कमजोरी दूर करे योग

किसी भी प्रकार की चोट, रोग या सर्जरी के कुछ दिनों के बाद विशेषज्ञ मरीज को हल्का योग करने की सलाह देते हैं जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़कर स्फूर्ति आए। जानते हैं ऐसे ही योगासन के बारे में-

राजा रानी आसन : सीधे लेटकर पैरों के तलवों को जमीन पर टिकाएं व दोनों हाथ कंधों के बराबर ऊंचाई में फैलाएं। इसके बाद गर्दन को बाएं घुमाकर घुटनों को दायीं ओर ले जाएं। 10-15 सेकंड के लिए इसी अवस्था में रहें। अब यही प्रक्रिया दूसरे पैर से दोहराएं। इसे 5-7 बार करें।

लाभ : रीढ़ को लचीला बनाकर सफूर्ति प्रदान करता है।

गोमुखासन : कमर को सीधा कर बैठें। बाएं पैर को मोड़कर दाएं पैर के कूल्हे के नीचे व दाएं पैर को बाएं पैर के ऊपर रखकर पीछे की ओर ले जाएं। अब दाएं हाथ को कोहनी से मोड़ते हुए गर्दन से पीठ की तरफ लाएं। बाएं हाथ को कमर के पीछे से घुमाते हुए दाएं हाथ को पकड़ने की कोशिश करें। पुनः दुसरे हाथ से इसका प्रयास करें। 

लाभ : रक्त में ऑक्सीज़न का संचार बेहतर होता है।

Pistachio nuts health benefits Hindi पिस्ता

Pistachio nuts health benefits  Hindi -पिस्ता
तनाव व झुर्रियों को दूर रखता है पिस्ता 

मिठाइयों मे इस्तेमाल होने वाला पिस्ता एक स्वादिष्ट मेवा भी है। इसका सबसे ज्यादा उत्पादन अमेरिका में होता है। जानते हैं इसके महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के बारे में - 

पोटेशियम : पिस्ते में यह पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कार्टिसोल के स्तर को कम करता है। 

कैलोरी : एक पिस्ते में कैलोरी की मात्रा सिर्फ 3-4 होती है जिससे वजन बढ़ने की आशंका नहीं रहती। लेकिन इसे भूनकर या नमक लगाकर न खाएं।

कोलेस्ट्रॉल : पिस्ता शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है जिससे दिल के रोंगों का खतरा कम हो जाता है।

कैंसर : इसमें मौजूद कैरेटोनॉएड्स, बिटा-कैरोटीन और ल्यूटेन जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व कैंसर से रक्षा करते हैं। 

झुर्रियां : पिस्ते में अधिक मात्रा में एंटी-एजिंग तत्व पाए जाते हैं जो चेहरे की झुर्रियों को दूर करने में सहायता करतें हैं। इसे खाने से याददाश्त भी तेज होती है। डाइटीशियन की सलाह से रोजाना पिस्ते के पांच से छह दाने खाए जा सकते हैं।

Monday, 24 August 2015

Why you should not forcefeed kids बच्चों को जबरदस्ती न खिलाएं

According to a study Forceful Feeding to your children is not a Good Idea

जबरदस्ती न खिलाएं



बच्चों को ठूंस-ठूंस कर खिलाने वाले माता-पिता सावधान हो जाएं क्योकि इससे उनका वजन वेजह बढ़ जाता है। अध्ययन के मुताबिक यदि बच्चों को प्लेट में बचे एक-एक दाने को खाने पर ज़ोर दिया जाए तो वे अपने शरीर के संकेतों को समझना बंद कर देते हैं और तब तक खाते हैं, जब तक उनके माता-पिता खुश न हो जाएं। 

नॉर्वे यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के मुताबिक उन बच्चों के मोटापे में ज्यादा व्रद्धि होती है, जिनमें भोजन उनके खाने के स्वभाव को प्रभावित करता है। वे कितना खाते हैं यह भूख के हिसाब से तय नही होता, बल्कि खाने को देखकर व उसकी गंध से तय होता हैं इसलिए बच्चों को खाद्य पदार्थों के महत्व व उनकी पौष्टिकता के बारे में समझाते हुए खिलाएं।

importance of salad in food in Hindi सलाद में स्वाद और सेहत दोनों

Importance of Salad in our Diet in Hindi


सलाद में स्वाद और सेहत दोनों

अक्सर लोग कहते हैं कि वे भोजन में काफी फल और कच्ची सब्जियां खाते हैं लेकिन कुछ लोग एक ही तरह के सलाद का प्रयोग बार-बार करने की वजह से इनसे ऊब जाते हैं। ऐसे में इन तरीकों से इसकी पौष्टिकता कों बढ़ा सकते हैं।

कुछ अलग करें

सलाद के कटोरे में आए दिन वही छोले और अंकुरित अनाज खाएंगे तो ऊब ही जाएंगे। हर हफ़्ते कुछ नया ट्राई करें। एक हफ़्ते चुकंदर, लो फैट चीज, कद्दू के बीज आदि में तुलसी या धनिए की पत्तियां और नींबू व काला नमक मिलाकर खाएं। अगले हफ़्ते खीरा, टमाटर, व संतरे की फांक आदि मिलाकर खा सकते हैं।

गहरा है तो बढ़िया

सलाद के लिए हरी सब्जियों का चयन करने में सावधानी बरतें। गहरे रंग की पत्तेदार सब्जियां बेहतर होती हैं। ये आपको डायबिटीज़ और कैंसर सहित कई बीमारियों से बचाती हैं।

सुबह खाएं, लाभ उठाएं

फल- सब्जियां सुबह खाएंगे तो इनके पोषक तत्वों और जलीय अंश का ज्यादा लाभ मिलेगा। सुबह सेवन करने बॉडी रिहाइड्रेट होगी व दिनभर ऊर्जा मिलेगी।

Importance of water in our body hindi पानी पीना जरूरी है

पानी पीना जरूरी है Importance of water in our body hindi 

सर्दी व बरसात के मौसम में हर किसी के लिए कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना जरूरी है। गर्मियों में शरीर का तापमान बढ़ जाता है इसेलिए इसे नियंत्रित करने के लिए कम से कम 15 गिलास पानी पीना चाहिए। देर रात तक जागने पर 11 बजे के बाद हर घंटे में कम से कम डेढ़ गिलास पानी पिएं वर्ना वात, पित्त व कफ संबंधी रोग होने का खतरा होता है।

खाने के बाद -

खाने के करीब दो घंटे बाद सामान्य मात्रा में पानी तीन घूंट में पिएं और प्रत्येक घूंट के बाद सांस लें। खाने के बाद पेट में खाना पचने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। उस समय पेट में ऊष्मा होती है जो पानी पीने से शांत हो जाती है और पाचनक्रिया धीमी पड़ जाती है। अधिक चिकनाई व मसालेदार भोजन के बाद गर्म पानी को चाय की तरह सिप लेते हुए पीना चाहिए। इससे गरिष्ठ भोजन को पचाने में आसानी रहती है। पानी को हमेशा बैठकर पीएं क्योंकि खड़े होकर पानी पीने से घुटने कमजोर हो जाते हैं

पेट में एसिड बनता है-

अक्सर लोग खाना खाने के बाद पानी नींबू डालकर पानी पीते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए क्योकि इससे पेट में एसिड बनता है। अल्सर या एसिडिटी के मरीजों के लिए नींबू का प्रयोग उचित नहीं माना जाता।

बढ़ता है कमर का घेरा-

शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुँचना बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति को शरीर में अकड़न, सिरदर्द, एसिडिटी व किडनी संबंधी बीमारियां होने की आशंका रहती है। कम पानी होने पर मस्तिष्क शरीर को संकेत देता है की बॉडी में मौजूद पानी को पेट में ही रोक दे। इससे रुका हुआ पानी शरीर में अपना कम करना बंद कर देता है और व्यक्ति का पेट भी बाहर आ जाता है। इस तरह कम पानी पीना मोटाप की एक वजह बन जाती है।

खाने के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि भोजन में कई तरह के मसाले होते हैं जो इस धातु के साथ रिएक्शन कर फूड पोइजनिंग, उल्टी व सिरदर्द की समस्या कर सकते हैं।

दिनभर में कई बार भोजन को थोड़ा-थोड़ा करके लेने से बचें। ऐसा करने से पानी पीने का क्रम भी प्रभावित होता है। दिन में तीन बार ठीक तरह से खाना चाहिए। हर बार खाने के बीच कम से कम चार घंटे का अंतराल दें। पानी दो घंटे के बाद पिएं। चिकनाई युक्त व मसालेदार भोजन के एक से डेढ़ घंटे बाद अधिक पानी सेवन करें।

पूरे दिन में एक-एक घंटे के अंतराल पर पानी पिएं। सर्दी व बरसात में प्यास कम लगे तो भी आठ से दस गिलास पानी पिएं।

अगर मोटापा कम करना चाहते हैं तो पानी को गर्म कर के चाय की तरह सिप लेते हुए पिएं।

जिन्हें किडनी संबंधी समस्या हो उन्हे सामान्य लोगों से कम पानी पीना चाहिए। ऐसे व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह से ही पानी की मात्रा तय करें।

Period Facts and Tips to Mother उन दिनों में बेटी की करें खास समझाइश Hindi

Girls First Period Tips and Advice- 

उन दिनों में बेटी की करें खास समझाइश


हार्मोंस में हुए बदलावों से बच्चियों में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है इसलिए ऐसे में कांउन्सलिंग कर उनका सहयोग करना चाहिए।

महिलाओं के शरीर में हार्मोंस अहम भूमिका निभाते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक शरीर में हार्मोंस का उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसका एक असर हर महीने माहवारी के रूप में भी देखने को मिलता है। आमतौर पर यह 11-12 साल की उम्र में शुरू होती है और इसके साथ ही शरीर में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। बचपन खत्म होने के साथ शुरू होता है युवा अवस्था का सफर। ऐसे में माता-पिता होने के नाते हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम उम्र के इस खास बदलाव के लिए अपनी बेटी को मानसिक तौर पर तैयार करें क्योंकि कई बार अचानक शुरू हुई माहवारी मानसिक रूप से परेशान भी कर सकती है।

भावनात्मक सलाह दें- 

माहवारी शुरू होने वाली उम्र में बच्ची को महिला की संरचना और उम्र के साथ होने वाले बदलावों की जानकारी देनी चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि महिला के शरीर में बच्चेदानी, अंडेदानी व दूसरे अंगों की अहम भूमिका है। हर महीने माहवारी आना इन बदलावों का एक हिस्सा है और इसमें किसी तरह की शर्म, झिझक या ग्लानि की कोई जरूरत नहीं। घर के सभी सदस्यों को यह समझना होगा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें किसी तरह का परहेज या प्रतिबंध लगाने की जरूरुत नहीं। बेटी के साथ सामान्य बर्ताव करें व उसे अहसास न होने दें कि वह महीने के चंद दिन घरवालों से अलग हो जाती है।

खानपान का ध्यान रखें-

बच्चियों को आयरन और प्रोटीन युक्त खाना जैसे गुड़, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, सोयाबीन, बीन्स, पनीर, दूध व दूध से बने पदार्थ आदि भरपूर मात्रा में दें। वसायुक्त, तले-भुने व मसालेदार युक्त भोजन से परहेज कराएं। उन्हें नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करें ताकि शरीर में हार्मोंस का संतुलन बना  रहे।

डॉ. राखी आर्य, स्त्री
रोग विशेषज्ञ, जयपुर        




Clap importance for better health ताली बजाएं

Clap your way to good health - 

ताली बजाएं, तलवों को रगड़ें



ऐसे दूर होती हैं बीमारियां- 

व्यक्ति की हथेलियों व तलवों में शरीर के सभी अंगों के बिंदु होते हैं, जिन्हे दबाकर कई तरह के रोगों को दूर किया जा सकता है। जब हम ताली बजाते हैं तो हमारे शरीर का तापमान बढने लगता है जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। इसके अलावा अंगूठे के नीचे का स्थान दबने से रक्त की थैलियां खून को विपरीत दिशा में संचारित करती हैं जिससे धमनियों में हर प्रकार की रुकावट दूर होती है। ह्रदय संबंधी परेशानियों में लाभ मिलता है। इससे पूरे शरीर में कंपन होता है व वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है। इसी तरह पैर के तलवों को पत्थर से थोड़ी देर रगड़ने पर एक्यूप्रेशर पॉइंट्स में दबाव बनता है जो कई रोगों से मुक्ति दिलाता है। इस उपचार में किसी प्रकार का कोई खर्च भी नहीं होता।

ऐसे बजाएं ताली-

सीधे हाथ की पहली उंगली यानी तर्जनी को दूसरे हाथ की हथेली पर चार बार ज़ोर-ज़ोर से चोट करें। उसके बाद तर्जनी व मध्यमा दोनों को साथ में लेकर चार बार ऐसा करें। इसी प्रकार तीन अंगुलियों को साथ मे लेकर फिर चारों अंगलियों को मिलकर ऐसा करें, अंत में दोनों हाथों से ताली बजाएं। इस दौरान आंखो को बंद रखें। ताली बजने के बाद दोनों हाथ गर्म व ऊर्जावान हो जाते हैं। ऐसे में ताली बजाने के बाद गहरी सांस भरते हुए मध्यमा अंगुली से आंखों को छूते हुए धीरे-धीरे नीचे की और ले जाएं। ऐसा करने से आंखों व चेहरे पर चमक बढ़ती है।

पुरानी परंपरा-

पहले के समय में लोग पूजा अर्चना के लिए धार्मिक स्थलों पर नंगे पैर जाया करते थे। वहां पर कीर्तन या पूजा करते हुए ताली बजाते थे। इससे उनके हाथों व पैरों के बिंदु रोज़मर्रा के कामों में ही दबते रहते थे जिससे उन्हे रोगों की समस्याएं कम होती थी।

इसलिए 15 सेकंड जरूरी-

15 सेकंड की ताली की ऊर्जा रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत कर देती है जिससे शरीर को तमाम रोगों से लड़ने में मदद मिलती है।

ध्यान रहे-



ताली बजाने के भी कुछ नियम होते हैं। हमेशा आसन पर खड़े होकर या पैरों में जूते पहनकर ही ताली बजाएं। जमीन पर नंगे पैर ऐसा करने से शरीर में उत्पन्न ऊर्जा जमीन में समाकर नष्ट हो जाती है। कई बार ताली बजाने से हाथों के फटने की समस्या होने लगती है इससे बचने के लिए हाथों में सरसों, नारियल या कोई अन्य तेल लगा सकते हैं।

Allergy free home tips एलर्जी फ्री होम Hindi

अपने घर को बनाएं एलर्जी फ्री होम - Allergy free home tips

एलर्जी की समस्या बढ़ती जा रही है। कुछ लोग पता नहीं लगा पाते की उन्हे किस कारण से एलर्जी की समस्या हो रही है। ज़्यादातर लोगों को लगता है कि घर का वातावरण बाहर कि तुलना में अच्छा रहता है और बाहर के वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्व ही एलर्जी को बढ़ावा देते हैं। जबकि सच्चाई यह भी है कि कई बार घर के अंदर की हवा भी बाहर की तुलना में पांच गुना ज्यादा प्रदूषित हो सकती है।

वेंटिलेशन फैन का फायदा -

घर के बाथरूम में वेंटिलेशन फैन हो तो  अच्छा रहेगा। लेकिन इसके अलावा बाथरूम में एक रोशनदान की व्यवस्था करके भी हवा की आवाजाही बनाई जा सकती है। बाथरूम आदि को रोजाना साफ करें। घर का हर सदस्य यह ज़िम्मेदारी समझे कि बाथरूम के प्रयोग के बाद वाइपर से सारे पानी को पोंछ दें ताकि किसी के पैर आदि फिसलने का भी डर न रहे और साफ-सफ़ाई भी बनी रहे। बाल्टी, मग आदि को भी हफ्ते में एक बार अच्छी तरह धोएं।

Fridge cleaning tips - फ्रीज़ की करें नियमित सफाई

Fridge cleaning tips - फ्रीज़ की करें नियमित सफाई

कई बार पाइप से टपकने वाली पानी की बूंदों से फफूंद हो जाती है। वर्ष 2010 में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक स्टडी के मुताबिक जो लोग अस्थमा की समस्या से परेशान रहते हैं, उन्हे सिलनभरे मकान में अटैक भी आ सकता है इसलिए रेफ्रीजरेटर को नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए। आप इसे साफ नहीं करेंगे तो दरवाजों में नमी और फफूंद पैदा हो सकती है जो एलर्जी बढ़ा सकती है।

छोटी-छोटी बातें हैं कम की-



घर में पोछा लगाने के बाद उस कपड़े आदि को धूप मे सुखाएं वरना नमी की वजह से उसमें पैदा हुई दुर्गन्ध अलर्जी का कारण बन सकती है तोलिए के इस्तेमाल के बाद उसे धूप मे फेलाएं । घर के किसी सदस्य को अलर्जी की समस्या हो तो पौधों को कमरे की बजाय बालकनी या बगीचे मे ही लगाना उचित होगा। अलर्जी की तकलीफ होने पर जाले उतारते समय या झाड़ू लगाते हुए मुंह पर कपड़ा जरूर बांद लेना चाहिए।

kitchen cleaning and allergies रसोई को रखें साफ Hindi

रसोई को रखें साफ - kitchen cleaning and allergies

कुछ लोंगों को खाना बनाते समय मसाले आदि से भी एलर्जी की दिक्कत हो सकती है। इससे बचाव के लिए किचन में एग्ज़ॉस्ट फैन या रोशनदान की व्यवस्था की जानी चाहिए। घर में लगे पर्दों को भी केवल दीवाली पर ही नहीं अपितु हर पाँच छह माह में इनकी धुलाई करते रहना चाहिए। घर में रखे फूलदान या फर वाले डेकोरेटिव आइटम्स की भी साफ-सफाई का खयाल रखकर एलर्जी से बचा जा सकता है।

किताबों की धूल हटाते रहें-



घर में जंहा-जंहा पेड़-पौधे हैं, वहाँ धूल और मिट्टी को साफ करते रहें। पौधों में इतना पानी न डालें कि पानी जमा हो जाए। कई बार घर में रखी हुई किताबों पर धूल जमती रहती है और इन्हे कई दिनों तक साफ नहीं किया जाता ऐसे में आपकी एलर्जी की समस्या काफी बढ़ सकती है। जूते-चप्पल के साथ धूल-मिट्टी और किटाणु भी घर में आसानी से पहुँच जाते हैं इसलिए शू रैक को घर के बाहर ही रखे।

Chukandar Benefits In Hindi चुकंदर के रस से बढ़ेगा स्टेमिना

चुकंदर के रस से बढ़ेगा स्टेमिना- चुकंदर के फायदे



शरीर मे रक्त की कमी दूर करने वाली चुकंदर आपकी मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचा कर स्टेमिना बढाती है। अमरीकी जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार लगातार दो हफ्तों तक चुकंदर का एक गिलास रस पीने से व्यायाम करने की क्षमता मे इजाफा होता है। इसके सेवन से ह्रदय पर दबाव कम होता है और शरीर के अन्य अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीज़न पहुँचती है। इसमें मौजूद नाइट्रेट से रक्त धमनियों में फैलाव होता है और रक्त का संचार सुचारु रूप से होता रहता है। रोजाना 500 मिलीग्राम रस पीने से लो ब्लड प्रेशर में आराम मिलता है व वर्कआउट करने की क्षमता में 16 फीसदी इजाफा होता है।

Chronic pain cause and symtoms एक माह से ज्यादा दर्द हो सकता है गंभीर

What is Chronic pain - एक माह से ज्यादा दर्द हो सकता है गंभीर

अमरीकी नेशनल अकादमी, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के अनुसार मधुमेह, हरद्यरोग और कैंसर से ज्यादा लोग क्रानिक दर्द (लंबे समय तक रहने वाला दर्द) से परेशान है। दिक्कत है की लोग इसे गंभीर नहीं लेते और दर्द निवारक दवा व बाम लगा कर सोचते हैं की दर्द घट जाएगा। इन उपचारों से थोड़ी राहत तो मिलती है लेकिन दर्द यदि उम्र बढ़ने के साथ असाध्य हो जाए तो परिणाम घातक हो सकते हैं।

क्या है क्रानिक पेन: जो दर्द महीनों बाद भी पीछा न छोड़े वह क्रानिक पेन होता है। ऐसा दर्द धीमा या तेज हो सकता है। जिसमें पीठदर्द, सिरदर्द (माइग्रेन सहित) जोइंट के पास मांसपेशियों व ऊत्तकों में दर्द (फाइब्रो-मायल्जिया) और वेरीकोज वेंस जैसे कारपल टन्नल सिंड्रोम शामिल हैं।

कारण:-

दुर्घटना, संकर्मण, कैंसर, थाइराइटिस इन्फेक्शन व तनाव।

दुष्परिणाम:-

क्रानिक पेन से अवसाद, उदासी, अनिंद्रा, भोजन के प्रति अरुचि जैसे भाव घेर लेते हैं। क्रानिक पेन से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिससे कैंसर तक हो जाता है।


इसलिए एक माह से अधिक समय से हो रहे दर्द को किसी भी स्थिति में टालें  नहीं और फौरन विशेषज्ञ की सलाह से उचित इलाज शुरू करें।

Banana health benefits - केला in Hindi

Banana health benefits in hindi - खून की कमी नहीं होने देता केला

सालभर मिलने वाला केला केवल फल ही नहीं बल्कि एनर्जी से भरपूर खाद्य पदार्थ है। जानते हैं इसके गुणों के बारे में- 

1. केला पाचनक्रिया को मजबूत करता है। अल्सर के मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद होता है।

2. इसमें आयरन भरपूर मात्रा में होता है जिससे खून में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं रहती।

3. यह तनाव भी कम करता है। 

4. केले में ट्रिप्टोफेन अमिनो एसिड होता है जिससे मूड रिलेक्स होता है और मन खुश रहता है।

5. दिल के मरीजों के लिए केला बहुत फायदेमंद होता है। रोजाना दो केले शहद के साथ खानें से लाभ होगा।

6. अगर नाक से खून निकालने की समस्या है तो केले को चीनी मिले दूध के साथ एक सप्ताह तक इस्तेमाल कीजिए। नकसीर के रोग में आराम मिलेगा।

7. वजन बढ़ाने के लिए केला बहुत मददगार होता है। रोजाना केले का शेक पीने से लाभ होगा।



8. बच्चों के विकास के लिए केला फायदेमंद है क्योंकि इसमें मिनरल और विटामिन-सी, बी 6 व फाइबर होता है जो बढ़ती उम्र में लाभकारी है। लेकिन कफ या खांसी कि समस्या होने पर केले के सेवन से परहेज करना चाहिए।

Brain Diet - ब्रेन डाइट

Foods to boost your brainpower -ब्रेन डाइट से दिमाग को चुस्त बनाए


पालक की ताकत : पालक और अन्य पत्तेदार सब्जियों के सेवन से आयरन मिलता है जिससे याददाश्त बढ़ती है और दिमाग तेज करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर्स का स्त्राव होता है। इसमें मोजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स दिमाग को कई रोगों से सुरक्षित रखते हैं।

जामुनी फल : काले अंगूर, जामुन और काला शहतूत जैसे फल, जिनका रंग काला, जामुनी या नीला होता है इनमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, प्लांट कंपाउंड जैसे फाइटोकैमिक्ल्स होते हैं जो दिमागी कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से रोकते हैं।

सूखे मेवे : विटामिन-ई का प्रमुख स्त्रोत अखरोट, बादाम, काजू, मूँगफली, तिल और अलसी के बीज आदि खाने से दिमाग चुस्त रहेगा।

बींस : ये दिमाग को स्वस्थ रखने का बढ़िया और सस्ता विकल्प है। ये आपके शरीर के ग्लूकोज लेवल को नियंत्रण मे रखती है। इसके लिए हरी फली, दाल, राजमा, या लोबिया फायदेमंद रहेंगें।

अनार : इसके जूस में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स दिमाग को फ्री रेडिकल्स (वे रसायन जो रेडिएशन, प्रदूषण व धूम्रपान आदि के कारण शरीर मे बढ़ जाते हैं और कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं) के प्रभाव से बचाते हैं। इन फ्री रेडिकल्स का सबसे ज्यादा असर हमारे दिमाग पर होता है।

गोभी : फूलगोभी, ब्रोकली और पत्तागोभी एंटी ऑक्सीडेंट्स व कई अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती है। ये दिमाग की क्षमता को नकारात्मक प्रभावों से बचाते हैं।

स्ट्रोबेरी : वैज्ञानिकों ने पाया है कि स्ट्रोबेरी, ब्लू बेरी जैसे फलों में दिमाग को ऑक्सीडेंटिव स्ट्रेस से सुरक्षित रखने कि क्षमता होती है जिससे बढ़ती उम्र मे होने वाले अल्जाइमर और डिमेंशिया (स्मृति लोप) जैसे रोंगों का खतरा कम होता है।

टमाटर : इसमें पाया जाने वाला लाइकोपीन पावरफुल एंटी ऑक्सीडेंट होता है। कैंसररोधी गुणों के लिए जाना जाने वाला टमाटर फ्री रेडिकल्स का प्रभाव कम करता है। इससे अल्जाइमर व डिमेंशिया का खतरा कम होता है।

कई शोधों में यह साबित हो चुका है कि कुछ खास चीजें खाने से दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जानिए उन खाद्य पदार्थों के बारे में जो ब्रेन को सक्रिये बनाए रखते हैं।



इनसे साबुत अनाज से बनी चीजें जैसे ब्राउन ब्रेड, ब्राउन राइस, मक्के की रोटी, कोर्नसूप, दलिया और खिचड़ी दिमाग को फायदा पहुँचाते हैं। ये चीजें दिल स्वस्थ रखती हैं जिससे बाकी अंग भी ठीक से काम करते हैं।

Control in increase weight बढ़ते वजन का नियंत्रण

Preventing Weight Gain by good diet plan - 

सही खानपान से करें बढ़ते वजन का नियंत्रण


अक्सर महिलाएं अपने खानपान के दौरान ऐसी गड़बड़ियां कर देती हैं जिससे वे न चाहते हुए भी मोटापे का शिकार हो जाती हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

भोजन भूख से थोड़ा कम ही लेना चाहिए। पेट मे गैस न बने इसका खयाल रखें। इसके लिए जरूरी है कि आप डिनर जल्दी कर लें और देर रात तक कुछ भी खाने से बचें। इसके अलावा तले-भुने व मसालेदार भोजन से परहेज करें। खाने में सब्जी, सलाद की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम ही रखें।

सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करें। उपवास के दिन सिर्फ फल व दूध लें। रोग आदि हो तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। रोजाना 2-3 किमी टहलें।

प्रातः एक गिलास ठंडे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी मोटापा कम होता है। दूध व शुद्ध घी का सेवन करें वर्ना शरीर में कमजोरी, रूखापन और वात विकार हो सकते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम से सक्रियता बनी रहती है।         

What to do when Insect bite कीड़ा काटे तो बर्फ लगाएं

Insect bite - बच्चों को कीड़ा काटे तो बर्फ लगाएं

बारिश के मौसम में कीड़ों के काटने से त्वचा संबंधी रोग बढ़ जाते हैं । सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों को होती है क्योंकि वे अपनी तकलीफ ठीक से बता नहीं पाते । ऐसे में जरूरत होती है उनकी विशेष देखभाल की ।

कीड़ों के काटने पर: कुछ कीड़ों के दंश शरीर पर जख्म कर देते हैं व कुछ रात को सोते समय काटते हैं जिनसे सुबह तक शरीर पर घाव बन जाते हैं। वहीं ब्लिस्टर बीटल नाम के कीड़े को मसल देने पर इससे कैंथ्रेडिन नाम को पानी जैसा रसायन स्रावित होता है जो त्वचा पर छाले या लाल चकते कर देता है। ऐसे में उस स्थान पर जलन या खुजली होने लगती है व कई बार सूजन भी हो जाती है।

लापरवाही न करें: इस तरह के किसी भी लक्षणों के दिखने पर सबसे पहले उस स्थान पर बर्फ से सेंक करें । यदि उससे किसी तरह का आराम न हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। कई बार बच्चों में मेडिकल हिस्ट्री या पहले से किसी बीमारी के कारण भी कीड़े के काटने पर तकलीफ गंभीर हो सकती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी की शिकायत है उनके लिए कई बार कीड़े का काटना जानलेवा हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ के बताए अनुसार मेडिसन व इंजेक्शन का प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए इलाज में कोई लापरवाही न बरतें।

सावधानी अपनाएं: 
घर की साफ सफाई का विशेष खयाल रखें।
बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जिनसे शरीर पूरी तरह कवर रहे।
छोटे बच्चों को झाड़ियों व गंदे पानी दूर से रखेँ। रात मे बच्चों को चादर उढ़ाकर मच्छरदानी आदि में सुलाएं।



-डॉ. दीपक शिवपुरी, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ, जयपुर

Ushtrasana Yoga Pose ऊष्ट्रासन

कंधों की अकड़न दूर करता है ऊष्ट्रासन

अगर आप कंधो में दर्द या सर्वाइकल की समस्या से परेशान हैं तो ऊष्ट्रासन लाभकारी हो सकता है जानिए इसके बारे में।

लाभ: कंधों में अकड़न, कमरदर्द, अस्थमा, सांस संबंधी अन्य रोग और मोटापा कम करने में यह आसन लाभकारी है।

ऐसे करें: सबसे पहले वज्रासन में बैठें फिर घुटनों के बल खड़े हो जाएं। सांस भरते हुये दाएं हाथ को ऊपर की ओर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पीछे की तरफ मुड़े व हथेली से दाएं पैर की एड़ी को पकड़े। यही क्रम दुसरे हाथ के साथ दोहराएं। दोनों हाथों से पैरों की एड़ियों को पकड़े होने की स्थिति में क्षमतानुसार रुकें। फिर वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं।

अभ्यास: इसे 4-5 बार दोहराएं। दोनों एड़ियों को पकड़ने की स्थिति में 30 सेकंड से 3 मिनट तक रुकने का प्रयास करें।

सही समय: यह आसन सुबह के समय खाली पेट या भोजन के 3 घंटे बाद किया जा सकता है ।

ध्यान रहे: जोड़ों में दर्द होने पर इसे करते समय घुटनों के नीचे किसी गद्दी का प्रयोग करें। गर्भवती महिलाएं इसे न करें।

डॉ.रमाकांत
शर्मा, नेचुरोपैथी व रोग विशेषज्ञ

Tuesday, 18 August 2015

importance of salad in food in Hindi सलाद में स्वाद और सेहत दोनों

Importance of Salad in our Diet in Hindi


सलाद में स्वाद और सेहत दोनों

अक्सर लोग कहते हैं कि वे भोजन में काफी फल और कच्ची सब्जियां खाते हैं लेकिन कुछ लोग एक ही तरह के सलाद का प्रयोग बार-बार करने की वजह से इनसे ऊब जाते हैं। ऐसे में इन तरीकों से इसकी पौष्टिकता कों बढ़ा सकते हैं।

कुछ अलग करें

सलाद के कटोरे में आए दिन वही छोले और अंकुरित अनाज खाएंगे तो ऊब ही जाएंगे। हर हफ़्ते कुछ नया ट्राई करें। एक हफ़्ते चुकंदर, लो फैट चीज, कद्दू के बीज आदि में तुलसी या धनिए की पत्तियां और नींबू व काला नमक मिलाकर खाएं। अगले हफ़्ते खीरा, टमाटर, व संतरे की फांक आदि मिलाकर खा सकते हैं।

गहरा है तो बढ़िया

सलाद के लिए हरी सब्जियों का चयन करने में सावधानी बरतें। गहरे रंग की पत्तेदार सब्जियां बेहतर होती हैं। ये आपको डायबिटीज़ और कैंसर सहित कई बीमारियों से बचाती हैं।

सुबह खाएं, लाभ उठाएं

फल- सब्जियां सुबह खाएंगे तो इनके पोषक तत्वों और जलीय अंश का ज्यादा लाभ मिलेगा। सुबह सेवन करने बॉडी रिहाइड्रेट होगी व दिनभर ऊर्जा मिलेगी।

kidney failure acute vs chronic

Cause of Acute Kidney failure and Chronic Kidney Disease in hindi

ध्यान रखेंगे तो स्वस्थ रहेगी किडनी

हमारी दोनों किडनियां एक मिनट में 125 मिलिलीटर रक्त का शोधन करती हैं। ये शरीर से दूषित पदार्थों को भी बाहर निकालती हैं। इस अंग की क्रिया बाधित होने पर विषैले पदार्थ बाहर नहीं आ पाते और स्थिति जानलेवा होने लगती है जिसे गुर्दों का फ़ेल होना (किडनी फेल्योर) कहते हैं। इस समस्या के दो कारण हैं, ऐक्युट किडनी फेल्योर व क्रोनिक किडनी फेल्योर। 

क्रोनिक किडनी फेल्योर   

शुरुआत में इस रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं होते लेकिन धीरे-धीरे थकान, सुस्ती व सिरदर्द आदि होने लगते हैं। कई मरीजों में पैर व मांसपेशियों में खिंचाव, हाथ-पैरों में सुन्नता और दर्द होता है। उल्टी, जी-मिचलाना व मुंह का स्वाद खराब होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।   

कारण: ग्लोमेरूनेफ्रायटिस, इस रोग में किडनी की छनन-यूनिट (नेफ़्रोन्स) में सूजन आ जाती है और ये नष्ट हो जाती है। डायबिटीज़ व उच्च रक्तचाप से भी किडनी प्रभावित होती है। पॉलीसिस्टिक किडनी यानी गाँठे होना, चोट, क्रोंनिक डिजीज, किडनी में सूजन व संक्रमण, एक किडनी शरीर से निकाल देना, हार्ट अटैक, शरीर के किसी अन्य अंग की प्रक्रिया में बाधा, डिहाइड्रेशन या प्रेग्नेंसी की अन्य गड़बड़ियाँ।         

एक्यूट किडनी फ्लेयोर    

पेशाब कम आना, शरीर विशेषकर चेहरे पर सूजन, त्वचा में खुजली, वजन बढ़ना, उल्टी व सांस से दुर्गंध आने जैसे  लक्षण हो सकते हैं। 

कारण: किडनी में संक्रमण, चोट, गर्भवती में टोकसीमिया (रक्त में दूषित पदार्थों का बढ़ना) व शरीर में की कमी।                                                                            

Side effects of stopping urine in Hindi

Health Risks From Ignoring Nature's Call in Hindi 

नेचर कॉल रोकने से मूत्रमार्ग में संक्रमण

हम जब किसी मीटिंग में या वॉशरूम से दूर होते हैं तो यूरिन रोकना मजबूरी हो जाता है लेकिन बार-बार ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। यूरिनरी ब्लैडर शरीर का बहुत छोटा गोल अंग है। जिसकी दीवार इतनी लचीली होती है की यह अपशिष्ट के साथ फैल जाती है। किडनी से निकलने वाला तरल यहाँ इकट्ठा होता है। यूरिनरी ब्लैडर आधा भरने पर दिमाग को संकेत मिलते हैं। ज्यादा देर पेशाब रोकने से मूत्रमार्ग में स्ंक्रम्ण हो सकता है। पेशाब रोकने पर यूरेथ्रा (ब्लैडर से बाहर यूरिन निकासी की ट्यूब) के मुंह पर बैक्टीरिया इकट्ठा होकर खतरा बढाते हैं। 

हर किसी की यूरीनरी ब्लैडर की संवेदनशीलता अलग होती है। यह निर्भर करती है की क्या खाया या क्या पीया। पेशाब रोकने से ब्लैडर फैलता है व संवेदी प्रणाली अधिक सक्रिय हो जाती है और बार बार पेशाब के लिए जाने की जरूरत महासूस होती है। यही संक्रमण के लक्षण हैं। लंबे समय तक पेशाब रोकने से दर्द होता है, जिसे पैनफ़ुल ब्लैडर सिंड्रोम कहते हैं। इसलिए वेगों को रोकने से बचें। 



How to remove dandruff at home in hindi

Dandruff home treatment in hindi - 
डैंड्रफ को जड़ से खत्म करने के कुछ घरेलु तरीके

डैंड्रफ का सामना हर मौसम में करना पड़ता है। उस वक्त शर्मिंदा होना पड़ता है जब सफ़ेद पपड़ी पीठ या कंधों पर साफ दिखाई देने लगे। डैंड्रफ से कई बुरे प्रभाव हैं। जैसे माथे के नीचे या गर्दन के पास पिंपल्स आदि। कुछ आसान तरीको से डैंड्रफ से राहत मिल सकती है, जानिए -

टमाटर - ऑयली बालों के लिए अच्छा ऑप्शन है। पका हुआ टमाटर लें। इसके बीज को निकाल दें और इसे मैश करके गुदा बना लें। इसमें एक चम्मच मुलतानी मिट्टी मिलाएं और ध्यान रखें की टमाटर का रस पूरी तरह गिरे नहीं। इस पैक को लगाएं और स्कैल्प को मसाज करें। ये ब्लड सर्कुलेशन को ठीक कर, डैंड्रफ को रोकता है। इसके सूखने के बाद, इसे ठंडे पानी से धो लीजिए।

दही – डेड स्किन लेयर के जमा होने के कारण डैंड्रफ होता है। ऐसे में दही एंटी-फंगल प्रॉपर्टीज़ के कारण स्कैल्प की स्केलिंग से बचाता है। एक कप दही में, चुटकीभर काली मिर्च पाउडर अच्छी तरह मिला लें। इसे अपने स्कैल्प और बालों पर लगाएँ और 30 मिनट के बाद इसे धो लें।

मैथी के दाने- पूरी रात मेथी के दाने को भिगो कर रखें और इसकी पेस्ट बनाकर स्कैल्प पर लगाएं और 45 मिनट के बाद शैम्पू से इसे धो लें।

एलोवेरा- ऑयली स्कैल्प के लिए एलोवेरा अच्छा सॉल्यूशन है| एलोवेरा जेल को निकालें और इसे स्कैल्प पर लगाएं। इसकी एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टी स्कैल्प से फंगस को खत्म कर देगा।

बेसन- 2 चम्मच बेसन में आधा कप दही मिलाएं और अपने बालों पर लगा लें। 20 मिनट के बाद इसे गुनगुने पानी से अच्छे तरीके से धो लें।

नींबू- नींबू के रस को कटोरी में निकालें और शहद मिलाएं। अब इसे स्कैल्प पर लगाएं। नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड डैंड्रफ खत्म करता है। वहीं, शहद बालों को मोइश्चराइज करने का काम करता है।

ऑयल- स्कैल्प ड्राय है और डैंड्रफ की भी समस्या है तो हॉट ऑयल, एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल या कोकोनट ऑयल लगाएं। ये स्कैल्प को मोइश्चराइज़ करता है और डेड स्किन को भी निकाल देता है। इसे आप हफ्ते में दो बार जरूर लगाएं।

Saturday, 8 August 2015

हेपेटाइटिस के प्रकार A B C D E

5 तरह के हेपेटाइटिस करते हैं लिवर पर हमला

लिवर मे जलन और संक्रमण का होना हेपेटाइटिस कहलाता है| यह इसके पाँच प्रकारों हेपेटाइटिस-ए, बी, सी, डी व ई के जरिए होती है| आइए जानते हैं इनके बचाव के उपायों के बारे मेँ-

हेपेटाइटिस-ए : यह वाइरस होने वाला संक्रमण रोग है, जो दूषित खानपान और गंदगी से फैलता हैयह इसके प्रकारों मेँ सबसे कम गंभीर है| इसमें लिवर और हाथ-पैरों मेँ सूजन, बुखार, भूख लगना, उल्टी और जोड़ों मे दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं|

बचाव: अपने आस पास गंदगी न फैलने दें| हैल्दी खानपान रखें| हाथों को अच्छी तरह से साबुन से धोएं| प्रभावित व्यक्ति के रेजर आदि का प्रयोग न करें|

हेपेटाइटिस-बी: यह वायरस रक्त, पेशाब और थूक आदि के माध्यम से फैलता है| इस रोग का सबसे ज्यादा असर लिवर पर पड़ता है| अत्यधिक थकान, उल्टी, पेटदर्द और गहरे रंग का पेशाब इस रोग के लक्षण हो सकते हैं|

बचाव: घाव होने पर उसे खुला न छोड़े, डीटोल आदि से साफ कर उस पर पट्टी बांधे| प्रभावित व्यक्ति के रेजर, टावल, रुमाल, कैंची आदि का प्रयोग न करें| मरीज के लिए शराब आदि भी वर्जित है|

हेपेटाइटिस-सी : यह वायरस दूषित रक्त संक्रमित सुई के माध्यम से फैलता है| यह असुरक्षित यौन संबंधों से भी हो सकता है|

बचाव: इससे बचाव ही सुरक्षा है| यदि समय रहते इसका इलाज़ न किया जाये तो लिवर कैंसर का खतरा हो सकता है| घाव को खुला न छोड़े, शराब से दूरी बनाए, दवा के उपकरण को शेयर न करें अगर पियर्सिंग या टैटू करवाएं तो देख ले की उपकरण अच्छे से साफ हों या टैटू बनवाने वाले से बचें|

हेपेटाइटिस-डी : जो लोग हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित होते हैं, उन्हे इसके प्रकार डी होने की आशंका रहती है|

बचाव: हेपेटाइटिस-बी के लिए दिए गए निर्देश का पालन करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लें।

टिककरण: ए व बी हेपेटाइटिस का टिककरण जरूरी माना जाता है| बच्चों (नवजात भी) के लिए दोनों के टीके जबकि बड़ों मेँ सिर्फ बी से बचाव का टीका लगवाने की सलाह विशेषज्ञ देते हैं|

हेपेटाइटिस-ई : यह रोग दूषित खानपान की वजह से ज्यादा होता है|


बचाव: इससे बचने के लिए हेपेटाइटिस-ए की तरह एहतियात बरतनी होती है|

हेपेटाइटिस- बी -बचाव और इलाज में न करें लापरवाही

हेपेटाइटिस-बी, वैक्सीन लगवाने से नियंत्रित हो सकता है| इस रोग से प्रभावित मां द्वारा जन्मे बच्चे को डॉक्टरी परामर्श के अनुसार 12 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवानी चाहिए|

संक्रमण से बचें-

हेपेटाइटिस के वाइरस से बचाव को विश्व स्वास्थ संगठन ने इस साल की थीम बनाया हैहेपेटाइटिस-सी के ईन्फेक्श्न से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है कि संक्रमित व्यक्ति के रक्त और शरीर के तरल पदार्थों जिसमें सीमन और श्राव भी शामिल है आदि के संपर्क मे आने से बचा जाए| रक्त चढाते समय जांच लें कि सुई किसी अन्य उपकरण आदि का पूर्व में प्रयोग न हुआ हो|

टेस्ट करवाएं, सजग रहें

नई तकनिकों के साथ हेपेटाइटिस के टेस्ट उपलब्ध हैं| ये जल्द और अच्छे नतीजे देते हैं| किसी भी प्रकार के लक्षण होने पर डॉक्टरी सलाह से जांच करवाकर दवाइयों का सेवन करना चाहिए| साथ ही विशेषज्ञ द्वारा बताए गए परहेजों का भी पालन करना चाहिए

हेपेटाइटिस में लिवर को फिट रखने वाली देसी चीजें

हेपेटाइटिस में लिवर को फिट रखने वाली देसी चीजें

हेपेटाइटिस में व्यक्ति का लिवर (यकृत) ठोस हो जाता है जिससे से पेट संबंधी कई परेशानियाँ होने लगती हैं| गंभीरता से न लेने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है| आइये जानते हैं इसके लिए कारगर कुछ आयुर्वेदिक उपायों के बारे में

गिलोय का 20 मिलिलीटर रस, आंवले व ग्वारपाठे का 10-10 मिलिलीटर रस मिलाकर दिन में दो बार लेने से पाचनक्रिया व पेशाब संबंधी रोंगों में लाभ होता है|

पुनर्नवा, रोहेड़ा की छाल, गोखरू, मकोय, ड़ाब की जड़, इक्षुमूल व दारुहरीदा को रात मे पानी में भिगो देंसुबह छानकर 15-20 मिलिलीटर खाली पेट पीने से लीवर संबंधी समस्याओं मे आराम मिलता है|

मकोय के पत्ते, सफ़ेद पूनर्नवा में हल्दी, काली मिर्च, धनिया व हल्का सेंधा नमक मिलकर सब्जी बनाकर लेने से लिवर की कठोरता व सूजन में लाभ होगा|

15 मिलिलीटर ताजा गिलोय के रस में 20-25 किशमिश कूटकर मिलाएँ इससे उल्टी, पेट मे जलन की समस्या में आराम मिलता है|

मुली के पत्ते, चुकंदर के पत्ते व पालक (तीनों 250 ग्राम मात्रा में) या दानामेत्थी के पत्तों के रस में 50 ग्राम चीनी व एक चम्मच नमक मिलाए| इसे हेपेटाइटिस की पहली स्टेज व रोग ठीक होने के बाद दें| इस से खून की कमी दूर होती है|

कुटकी, चिरायता, सोंफ, इलायची व सोंठ को एक चौथाई चम्मच सभी समान मात्रा में लेकर दो चम्मच पानी मिलाएँ व हल्का गुनगुना करें| इस पेस्ट को शहद में मिलाकर खाने से पाचनक्रिया दुरुस्त होगी|

तुलसी की पत्तियों के एक चम्मच पेस्ट को 200 मिलिलीटर मुली के पत्तों के रस में मिलाकर पीना भी इस रोग में लाभकारी है|

मूली के ताजे पत्ते खून व लीवर से अधिक बिलरूबीन (तरल जिसे लिवर बनाता है) निकालने मे सक्षम होते हैं| इसके पत्तों को पीसकार 15-20 मिलिलीटर रस दिन में दो बार लेने से पाचनक्रिया मे सुधार होता है|

नाड़ी वैध शंभू शर्मा, वनौषधि विशेषज्ञ, जयपुर


Friday, 7 August 2015

लार नली मे भी बन सकती है पथरी

लार नली मे भी बन सकती है पथरी

शरीर मे किडनी व गॉलब्लेडर मे पथरी बनने के बारे में तो सभी जानते  हैं लेकिन लार ग्रंथियों की नालियाँ जो मुंह मे जाकर खुलती हैं उनमें भी पथरी हो सकती है|  

प्रभाव : कान के नीचे चेहरे पर पेरोटिड ग्रंथि व निचले जबड़े के नीचे दोनों तरफ सबमेंडीबुलर लार ग्रंथि होती है कई बार लार व इसके स्राव पर कैल्शियम फास्फेट व अन्य पदार्थ जमा हो जाते हैं जिससे स्टोन की रचना होने लगती है और लार के प्रवाह मे रुकावट आती है|

लक्षण :  पथरी बनने पर लार ग्रंथि मे रुकावट से सूजन आ जाती है जो जबड़े या कान के नीचे देखी जा सकती है| भोजन करने के दौरान यह बढ़ जाती है व दर्द होता है|  इससे संक्रमण की आशंका भी रहती है| 

कारण : ज़्यादातर मामलों में कोई स्पष्ट कारण नहीं होता| हालांकि शरीर मे पानी की कमी एक वजह हो सकती है| पर्याप्त खाना नहीं खाने व भोजन को ठीक से न चबाने से भी लार कम बनने लगती है| कुछ दवाएं भी लार को प्रभावित करती हैं|

जांच व इलाज : एक्स-रे या सीटी स्कैन से इसकी वास्तविक स्थति व आकार का पता लगाया जा सकता है| मुंह के अंदर लार नली मे स्टोन होने पर बिना किसी बाहरी चीरे के पथरी को अंदर से निकाला जा सकता है| लेकिन लार ग्रंथि के अंदर गहराई में पथरी होने पर कई बार पूरी ग्रंथि को ही सर्जरी से निकालना जरूरी हो जाता है इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं व खाना चबाकर खाएं गुटके व शराब से दूर रहें|


मायस्थीनिया से होती है अकारण थकान

मायस्थीनिया से होती है अकारण थकान

मांसपेशियों की कमजोरी को मायस्थीनिया कहते हैं| इस रोग में मरीज के खून में एसिटालिन कोलिन रेसेप्टर की कमी हो जाती है| यह रसायन मांसपेशियों को ऊर्जावान बनाए रखता है| इससे मरीज के मुंह के कोने से लार बहना, बोलने मे हकलाहट, आँखों मे लालिमा, व्यायाम मे दिक्कत, किसी चीज के दो प्रतिबिंब दिखना व होंठ बाहर निकला जैसे लक्षण होने लगते हैं| किसी भी उम्र की महिला या पुरुष को यह रोग हो सकता है लेकिन महिला को इसका खतरा ज्यादा होता है|

इलाज : इस रोग का प्रमुख कारण थाइमस ग्रंथि है जो दिल की बाहरी सतह पर स्थित होती है| इस रोग के इलाज मे इस ग्रंथि को मरीज की छाती से निकाल दिया जाता है| यही इसका कारगर उपचार है इस सर्जरी से संभावित कैंसर या ट्यूमर से भी छुटकारा मिल जाता है| 

Wednesday, 5 August 2015

हड्डियों के लिए फायदेमंद छुवारा

हड्डियों के लिए फायदेमंद छुवारा

छुवारे खाकर गर्म दूध पीने से कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग जैस दाँतो की कमजोरी और हड्डियों का गलना आदि रुक जाते हैं

3-4 खजूर गर्म पानी मे धोकर गुठली निकाल दें, इन्हे गाय के दूध के साथ उबालें| उबले हुये दूध को सुबह व शाम पीएं तो ब्लड प्रेशर मे आराम मिलेगा

सुबह-शाम तीन छुवारे खाने के बाद गरम पानी पीने से कब्ज की समस्या दूर होती है|

खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें| पुराने घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं|

छुवारे खाने से मासिक धर्म आसानी से आता है और कमरदर्द में भी लाभ होता है| 



Tuesday, 4 August 2015

रात के खाने से पहले एवं बाद मे वॉक


डिनर के बाद वॉक

शारीरिक त्रम की कमी के अभाव में लोग क्या खो रहें हैं, इसका अंदाजा उन्हें 40 की उम्र के बाद ही हो पायेगा जब लाइफस्टाइल से जुड़े रोग जैसे मोटापा, डायबिटीज व ह्रदयरोग आदि सताने लगेंगें इस समस्या से बचने का एक आसान उपाय डिनर के 20 मिनट के अंतराल में 20 मिनट की वॉक है| आइये जानते है इसके उपायों के बारे में - 

एसिडिटी से राहत : भोजन के बाद शरीर में गैस्ट्रिक एसिड बनने लगता है| टहलने से इनका प्रवाह बढ़कर पाचनक्रिया तेज हो जाती है| एसिडिटी व कब्ज से मुक्ति मिलती है साथ ही पेट सबंधी रोग दूर हो जाते है | 

अच्छी नींद : अनिंद्रा की एक वजह कम्यूटर स्क्रीन के सामने बैठने से आँखों पर पड़ने वाला दबाव है|  भोजन के बाद वॉक से रक्तप्रवाह बढ़ता है और तनाव काम होने से गहरी नींद आती है|  इस से दिमाग को पूरी तरह से आराम मिलता है और शरीर के अंगो को अपनी छतिपूर्ति करने का मौका मिलता है| 

एक्यूप्रेशर पैताम

लो ब्लडप्रेसर के मरीज न पहनें एक्यूप्रेशर पैताम

रोज-रोज की वयस्तता के बीच लोगों में तनाव, अनिद्रा पैरों में दर्द जैसी कई दिक्कतें आम हो गई हैं| ऐसे में एक्यूप्रेश पैताम (तलवा) का प्रयोग किया जा सकता है यह एक प्रकार का सोल है जिसे जूतों के अंदर डालकर पहना जाता है| इसकी ऊपरी सतह पर एक्यूप्रेश पॉइंटस होते हैं जिन्हे कई रोगों मे लाभ मिलता है|

फायदा : तनाव, पैरों में जलन, सुन्नता, हाथ-पैरों व एड़ी में दर्द, शरीर में कम्पन गठिया आदि में लाभ|

सही तरीका : सुबह खाली पेट आधे घंटे इन्हे जूतो में डालकर चलें| भोजन के एक घंटे के बाद इसका प्रयोग करें वर्ना पैताम अपना काम ठीक से करके खाना पचाने की प्रक्रिया में लग जाती है| लम्बे समय तक इसका प्रयोग करें वर्ना पॉइंट्स असरहीन हो जाते है|

धयान रहे : पैताम से प्रेग्नेंसी में हार्मोन्स संबंधी गड़बड़ी हो सकती है इसलिए प्रयोग करें| लो ब्लडप्रेसर के मरीज भी इसका इस्तेमाल न करे|


डॉ. पियूष  त्रिवेदी, एकुप्रेसर विशेष्ज्ञ