हेपेटाइटिस में लिवर
को फिट रखने वाली देसी चीजें
हेपेटाइटिस
में व्यक्ति का लिवर (यकृत) ठोस हो जाता है जिससे से पेट संबंधी कई परेशानियाँ
होने लगती हैं| गंभीरता
से न लेने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है| आइये जानते हैं इसके लिए कारगर कुछ आयुर्वेदिक उपायों के
बारे में-
गिलोय
का 20 मिलिलीटर रस, आंवले व
ग्वारपाठे का 10-10 मिलिलीटर रस मिलाकर दिन में दो बार लेने से पाचनक्रिया व पेशाब
संबंधी रोंगों में लाभ होता है|
पुनर्नवा, रोहेड़ा की छाल, गोखरू, मकोय, ड़ाब की जड़, इक्षुमूल व दारुहरीदा को रात मे पानी
में भिगो दें| सुबह
छानकर 15-20 मिलिलीटर खाली पेट पीने से लीवर संबंधी समस्याओं मे आराम मिलता है|
मकोय
के पत्ते, सफ़ेद
पूनर्नवा में हल्दी, काली मिर्च, धनिया
व हल्का सेंधा नमक मिलकर सब्जी बनाकर लेने से लिवर की कठोरता व सूजन में लाभ होगा|
15 मिलिलीटर
ताजा गिलोय के रस में 20-25 किशमिश कूटकर मिलाएँ इससे उल्टी, पेट मे जलन की समस्या में आराम मिलता है|
मुली
के पत्ते, चुकंदर के
पत्ते व पालक (तीनों 250 ग्राम मात्रा में) या दानामेत्थी के पत्तों के रस में 50 ग्राम
चीनी व एक चम्मच नमक मिलाए| इसे हेपेटाइटिस की पहली स्टेज व रोग ठीक होने के बाद दें| इस से खून की कमी दूर होती है|
कुटकी, चिरायता, सोंफ, इलायची व सोंठ को एक चौथाई चम्मच सभी समान मात्रा में लेकर दो चम्मच पानी
मिलाएँ व हल्का गुनगुना करें| इस पेस्ट को शहद में मिलाकर खाने से पाचनक्रिया दुरुस्त
होगी|
तुलसी
की पत्तियों के एक चम्मच पेस्ट को 200 मिलिलीटर मुली के पत्तों के रस में मिलाकर
पीना भी इस रोग में लाभकारी है|
मूली के ताजे पत्ते खून व लीवर से अधिक बिलरूबीन (तरल जिसे लिवर बनाता है) निकालने मे सक्षम होते हैं| इसके पत्तों को पीसकार 15-20 मिलिलीटर रस दिन में दो बार लेने से पाचनक्रिया मे सुधार होता है|
नाड़ी
वैध शंभू शर्मा, वनौषधि
विशेषज्ञ, जयपुर
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