Saturday, 8 August 2015

हेपेटाइटिस के प्रकार A B C D E

5 तरह के हेपेटाइटिस करते हैं लिवर पर हमला

लिवर मे जलन और संक्रमण का होना हेपेटाइटिस कहलाता है| यह इसके पाँच प्रकारों हेपेटाइटिस-ए, बी, सी, डी व ई के जरिए होती है| आइए जानते हैं इनके बचाव के उपायों के बारे मेँ-

हेपेटाइटिस-ए : यह वाइरस होने वाला संक्रमण रोग है, जो दूषित खानपान और गंदगी से फैलता हैयह इसके प्रकारों मेँ सबसे कम गंभीर है| इसमें लिवर और हाथ-पैरों मेँ सूजन, बुखार, भूख लगना, उल्टी और जोड़ों मे दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं|

बचाव: अपने आस पास गंदगी न फैलने दें| हैल्दी खानपान रखें| हाथों को अच्छी तरह से साबुन से धोएं| प्रभावित व्यक्ति के रेजर आदि का प्रयोग न करें|

हेपेटाइटिस-बी: यह वायरस रक्त, पेशाब और थूक आदि के माध्यम से फैलता है| इस रोग का सबसे ज्यादा असर लिवर पर पड़ता है| अत्यधिक थकान, उल्टी, पेटदर्द और गहरे रंग का पेशाब इस रोग के लक्षण हो सकते हैं|

बचाव: घाव होने पर उसे खुला न छोड़े, डीटोल आदि से साफ कर उस पर पट्टी बांधे| प्रभावित व्यक्ति के रेजर, टावल, रुमाल, कैंची आदि का प्रयोग न करें| मरीज के लिए शराब आदि भी वर्जित है|

हेपेटाइटिस-सी : यह वायरस दूषित रक्त संक्रमित सुई के माध्यम से फैलता है| यह असुरक्षित यौन संबंधों से भी हो सकता है|

बचाव: इससे बचाव ही सुरक्षा है| यदि समय रहते इसका इलाज़ न किया जाये तो लिवर कैंसर का खतरा हो सकता है| घाव को खुला न छोड़े, शराब से दूरी बनाए, दवा के उपकरण को शेयर न करें अगर पियर्सिंग या टैटू करवाएं तो देख ले की उपकरण अच्छे से साफ हों या टैटू बनवाने वाले से बचें|

हेपेटाइटिस-डी : जो लोग हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित होते हैं, उन्हे इसके प्रकार डी होने की आशंका रहती है|

बचाव: हेपेटाइटिस-बी के लिए दिए गए निर्देश का पालन करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लें।

टिककरण: ए व बी हेपेटाइटिस का टिककरण जरूरी माना जाता है| बच्चों (नवजात भी) के लिए दोनों के टीके जबकि बड़ों मेँ सिर्फ बी से बचाव का टीका लगवाने की सलाह विशेषज्ञ देते हैं|

हेपेटाइटिस-ई : यह रोग दूषित खानपान की वजह से ज्यादा होता है|


बचाव: इससे बचने के लिए हेपेटाइटिस-ए की तरह एहतियात बरतनी होती है|

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