Cause of Acute Kidney failure and Chronic Kidney Disease in hindi
ध्यान रखेंगे तो स्वस्थ रहेगी किडनी
हमारी दोनों किडनियां एक मिनट में 125 मिलिलीटर रक्त का शोधन करती हैं। ये शरीर से दूषित पदार्थों को भी बाहर निकालती हैं। इस अंग की क्रिया बाधित होने पर विषैले पदार्थ बाहर नहीं आ पाते और स्थिति जानलेवा होने लगती है जिसे गुर्दों का फ़ेल होना (किडनी फेल्योर) कहते हैं। इस समस्या के दो कारण हैं, ऐक्युट किडनी फेल्योर व क्रोनिक किडनी फेल्योर।
क्रोनिक किडनी फेल्योर
शुरुआत में इस रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं होते लेकिन धीरे-धीरे थकान, सुस्ती व सिरदर्द आदि होने लगते हैं। कई मरीजों में पैर व मांसपेशियों में खिंचाव, हाथ-पैरों में सुन्नता और दर्द होता है। उल्टी, जी-मिचलाना व मुंह का स्वाद खराब होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
कारण: ग्लोमेरूनेफ्रायटिस, इस रोग में किडनी की छनन-यूनिट (नेफ़्रोन्स) में सूजन आ जाती है और ये नष्ट हो जाती है। डायबिटीज़ व उच्च रक्तचाप से भी किडनी प्रभावित होती है। पॉलीसिस्टिक किडनी यानी गाँठे होना, चोट, क्रोंनिक डिजीज, किडनी में सूजन व संक्रमण, एक किडनी शरीर से निकाल देना, हार्ट अटैक, शरीर के किसी अन्य अंग की प्रक्रिया में बाधा, डिहाइड्रेशन या प्रेग्नेंसी की अन्य गड़बड़ियाँ।
एक्यूट किडनी फ्लेयोर
पेशाब कम आना, शरीर विशेषकर चेहरे पर सूजन, त्वचा में खुजली, वजन बढ़ना, उल्टी व सांस से दुर्गंध आने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
कारण: किडनी में संक्रमण, चोट, गर्भवती में टोकसीमिया (रक्त में दूषित पदार्थों का बढ़ना) व शरीर में की कमी।
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