What is BMD (Bone Mineral Density)
शरीर में कैल्शियम Calcium Intake and Bone Mineral Density BMD
बुजुर्ग व्यक्ति दिन में एक हजार एमजी कैल्शियम ही लें -
खाने की चीजों से ही शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ाने से होगा फायदा
What is BMD : बीएमडी से मतलब है कि प्रति स्क्वेयर सेंटीमीटर बोन में कितना मिनरल मैटर मौजूद है। यह ओस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का पतले होनी) की निशानी भी है। BMD कम होने से फ्रैक्चर की संभावना भी बढ़ जाती है। थोड़ा-सा पैर मुड़ने या गिरने पर फ्रैक्चर आ सकता है। इससे भी कुछ फ्रैक्चर आम हैं, जैसे लोअर बैक, हिप या थाई बोन का फ्रैक्चर। हड्डियों में कमजोरी होने के कारण फ्रैक्चर जल्दी ठीक नहीं होता और व्यक्ति डिसएबल भी हो सकता है।
Recommandation : बुजुर्ग लोगों को प्रतिदिन एक हजार से 12 सौ एमजी कैल्शियम टेबलेट खानी चाहिए। इस लेवल को हासिल करने के लिए सप्लीमेंट खाने की सलाह दी जाती है। जबकि समान्य व्यक्ति को प्रतिदिन 600 से 800 एमजी कैल्शियम का सेवन करना चाहिए।
BMD Level and calcium: इस विषय पर कई शोध हो चुके हैं कि डायटरी कैल्शियम या सप्लीमेंट्स का सेवन बढ़ाने से कोई खास लाभ नहीं होता है, डायटरी कैल्शियम बढ़ाने से बीएमडी सिर्फ 0.6 से 1.0 फीसदी ही बढ़ पाता है, जो कुछ खास नहीं है। इतना अंतर भी एक साल तक डायटरी कैल्शियम लेते रहने के बाद आता है। कैल्शियम सप्लीमेंट लेने के एक वर्ष बाद बीएमडी सिर्फ 0.7 से 1.8 फीसदी बढ़ता है। इसका फ्रैक्चर होने के खतरे में कोई विशेष असर दिखाई नहीं देता है। कैल्शियम को विटामिन-डी के साथ लेने से कोई फायदा नहीं होता। फायदा सिर्फ विटामिन-डी का ही होता है।
कैल्शियम टेबलेट या सप्लीमेंट की बजाय खाने-पीने की चीजों से शरीर में कैल्शियम बढ़ाएं। जैसे ज्यादा दूध पीए। दही, संतरे, ब्रोकली आदि खाएं। इन चीजों का सेवन तभी बढ़ाएं, जब ब्लड कैल्शियम लेवल, समान्य से कम हो।
सप्लीमेंट्स की तरफ झुकाव इसलिए कम होना चाहिए क्योंकि इनका कोई खास फायदा नहीं होता है, लेकिन साइड इफेक्ट ज्यादा होते हैं। जैसे- भूख कम होने लगती है। कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। मुंह हमेशा सूखा-सूखा रहता है। प्यास बढ़ जाती है। गुर्दे में पथरी की समस्या आम देखने को मिलती है। साथ ही पेट की समस्याएं होने लगती हैं।
डॉ. चंद्रा एम. गुलाटी
ड्रग एक्सपर्ट, नई दिल्ली।
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