Genetic and Metabolic diseases in newborns babies
अब न्युबॉर्न में जेनेटिक और मेटाबॉलिक बीमरियों को पहचानना आसान
आजकल बच्चों में दुर्लभ और वंशानुगत बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चों में करीब सात हजार दुर्लभ बीमारियां होती हैं। इनमें से 80 परसेंट जेनेटिक होती हैं। पचास परसेंट बीमारियों के लक्षण न्यू बॉर्न को देखने से मालूम चल पाते हैं। समय पर बीमारी मालूम चलने पर इलाज संभव हो सकता है, लेकिन ट्रीटमेंट में देरी होनी से बच्चे का सही इलाज़ नहीं हो पाता।
जेनेटिक और मेटेबॉलिक डिसऑर्डर पहचानने के लिए अब ब्लड की एक बूंद से बच्चे की बीमारी को डायग्नोस किया जा सकता है। यह न्यूबॉर्न बेबी के स्क्रीनिंग टेस्ट से संभव हो पा रहा है।
न्यूबॉर्न की एड़ी से ब्लड की एक ड्रॉप लेकर ये टेस्ट किया जाता है, ब्लड की एक बूंद से उसकी बीमारीयों की स्क्रीनिंग की जाती है। पहले 4 से 6 साल की उम्र में इन बीमारियों की पहचान हो पाती थी। ट्रीटमेंट में देरी से ऐसे केसेज अक्सर बिगड़ जाते थे। अब इनकी पहचान और इलाज सही समय पर हो पाता है जिससे बच्चों की quality ऑफ लाइफ बेहतर हो जाती है।
डॉ. अशोक गुप्ता, पीडियाट्रिशियन, अधीक्षक, जेकेलोन हॉस्पिटल
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