Thursday, 3 December 2015

ब्रेन स्ट्रोक - Brain Stroke in Hindi

ब्रेन स्ट्रोक Understand Brain Stroke in Hindi

ब्रेन स्ट्रोक के बाद एक ही पल में ठीक-ठाक व्यक्ति समान्य कार्य करने में विफल हो जाता है। ब्लड सप्लाई में रुकावट के कारण स्ट्रोक आता है। ब्लड वैसल के फ़्लो में ब्लड क्लॉट के कारण और कई बार ब्लड वैसल प्रभावित होने से भी स्ट्रोक आ सकता है। चूंकि खून ही दिमाग को जरूरी न्यूट्रीयंट्स सप्लाई करता है, जिससे दिमाग महत्वपूर्ण फंक्शन आसानी से कर सके।

खून की सप्लाई में कुछ सैकंड के लिए रुकावट आने से न्यूरॉन्स खत्म होने लगते हैं। इसलिए स्ट्रोक में हर लम्हा अहम होता है। 

स्ट्रोक के लक्षण में यह शामिल हैं- सुस्ती आना, कमजोरी महसूस होना और शरीर के हिस्से में पैरालसिस आना। इनके अलावा कंफ्यूजन, बिना कारण सिर में तेज दर्द होना, बोलने में परेशानी आना, चलने में दिक्कत, बैलेंस खोना इस बीमारी के बाकी लक्षण है। स्ट्रोक को फास्ट (एफ–फेस, ए-आर्म, एस-स्पीच, टी-टाइम) से जाना जाता है। सीटी स्कैन और एमआरआई से स्ट्रोक के कारण और किस्म का पता चलता है। स्ट्रोक के कारण और किस्म का पता चलता है। स्ट्रोक के 4-5 घंटे में मरीज को क्लॉट खत्म करने वाली दवा और सही इलाज दिया जाए तो मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।

कई बार लोग स्ट्रोक के लक्षण को समझने और समय पर अस्पताल पहुंचने में विफल होते हैं। जो रिस्क फैक्टर हृदय रोग के है, वहीं स्ट्रोक के हैं। हाई ब्लड प्रैशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज़, सर्कुलेशन प्रॉबल्म, फिजिकल एक्टिविटी न होना और मोटापा कुछ कारण हैं। 

सही खान-पान, व्यायाम करना, हैल्थ इश्यू को चैक में रखने से स्ट्रोक टल सकता है।

डॉ. जेडी मुखर्जी न्यूरोलाजिस्ट, मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली।

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