What is Hemochromatosis in Hindi
Hemochromatosis cause symptoms and treatment
शरीर मे आयरन जमा होना यानी हेमोक्रोमैटोसिस हो तो इससे अंग प्रभावित होने लगते हैं। शरीर मे आयरन का स्तर 3-4 ग्राम होता है। आयरन की संपूर्ण मात्रा बड़ी सावधानी से नियंत्रित होती है। हर दिन एक मिग्रा. आयरन पसीने, तवचा की मृत कोशिकाओं और आंतों की अंदरूनी परत गिरने से निकलता है।
महिलाओं के शरीर से मासिक धर्म के दौरान प्रतिदिन औसतन एक मिलीग्राम आयरन बाहर निकल जाता है। सामान्य वयस्क व्यक्ति में इस आयरन की क्षति की भरपाई करने के लिए प्रतिदिन एक मिलीग्राम आयरन अवशोषित होता है। यही कारण है कि शरीर में आयरन की अतिरिक्त मात्रा जमा नहीं हो पाती। जब शरीर अधिक मात्रा में आयरन खोता है, तब स्वभाविक रूप से आयरन का अवशोषण भी बढ़ जाता है। लेकिन जो लोग हेमोक्रोमैटोसिस से पीड़ित होते हैं, उनमें प्रतिदिन आंतों से उससे अधिक मात्रा में आयरन अवशोषित होता है, जितनी आवश्यकता शरीर को खोए हुए आयरन से बदलने के लिए होती है।
क्या होता है हेमोक्रोमैटोसिस?
हेमोक्रोमैटोसिस आयरन मेटाबॉलिज़्म की एक आनुवांशिक गड़बड़ी है। हेमोक्रोमैटोसिस में, रोगी के शरीर से आयरन बाहर निकालने की बजाय जमा होने लगता है। जिन अंगों के टिश्यू में आयरन का जमाव होने लगता है, उनकी कार्यप्रणाली आसामान्य हो जाती है और इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं।
कारण: हेमोक्रोमैटोसिस आनुवांशिकी से संबंधित है, जो बच्चों को उनके माता-पिता से विरासत में मिलता है। यह उन जींस में म्युटेशन के द्वारा होता, जो शरीर में आयरन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।
लक्षण और स्वास्थ्य जटिलताएं: आयरन की यह अधिक मात्रा जोड़ों, लीवर टेस्टिकल और हृदय में जमा हो जाती है। फिर इन अंगों को क्षति पहुंचाती है। जो महिलाएं इस रोग से पीड़ित होती हैं, उनके शरीर में आयरन का संग्रह पुरुषों की तुलना में धीमी गति से होता है, क्योंकि मासिक धर्म और स्तनपान के दौरान उनके शरीर से काफी मात्रा में आयरन बाहर निकल जाता है। इसलिए उनमें हेमोक्रोमैटोसिस के कारण होने वाले अंगों की क्षति के लक्षण पुरुषों की तुलना में दस वर्ष बाद दिखाई देते हैं।
• पुरुषों में इससे तवचा का रंग गहरा होता है।
• टेस्टिकल में आयरन के जमने से वे सिकुड़ जाते जो न्ंपुसकता का कारण बन सकते हैं।
• अग्नाशय में इसके जमा होने से इंसुलिन बनना कम हो जाता है, जिससे डायबिटीज़ हो सकती है।
• हृदय की मांसपेशियों में आयरन के जमा होने से कार्डियोमायोपैथी हो सकती है, किसके कारण हार्ट फेलियर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसकी अधिक मात्रा हृदय की धड़कनों को अनियमित करती है, जिसे अरदिमिया कहते हैं।
• लिवर में जमा होने से लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
• फेफड़ों में जमने से सांस की समस्या होती है।
• जोड़ों में जमाव जोड़ों के दर्द का कारण बनता है।
• जब एंडोक्राइन ग्रंथियों में जमाव हो तो हार्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा जाता है।
रोकथाम और उपचार: इसको रोकने का सबसे कारगर उपाय स्क्रीनिंग है। एक बार जब किसी व्यक्ति में हेमोक्रोमैटोसिस की पहचान हो जाए, तब उसके सभी भाई-बहनों और रिशतेदारों को स्क्रीनिंग करानी चाहिए। यदि उन्हे यह रोग है, तब उन्हे तुरंत इलाज करना चाहिए।
हेमोक्रोमैटोसिस का सबसे प्रभावी उपचार फ्लेमबोटॉमी यानी भुजाओं की शिराओं से रक्त निकालना। इसके द्वारा शरीर में आयरन के स्तर को कम किया जा सकता है। इसमें एक या दो हफ्ते में रक्त की एक यूनिट निकाली जाती है, जिसमें लगभग 250 मिलीग्राम आयरन होता है। धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को दो-तीन महीनें में एक बार किया जाता है। इससे उन अंगों की कार्यप्रणाली सुधर जाती है जो आयरन के जमाव के कारण प्रभावित हो गई थी।
नियमित रूप से रक्तदान करना भी हेमोक्रोमैटोसिस का एक उपचार हो सकता है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिनके शरीर में आयरन अधिक मात्रा में संग्रहीत है अगर वो नियमित रूप से रक्तदान करेंगें तो उनकी इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता और डायविटीज़ की समस्या समाप्त हो जाएगी। जो एनीमिया या हृदय से संबंधित जटिलताओं के कारण रक्त नहीं निकलवा सकते उनके लिए कीलैशन उपचार है। इसमें शरीर से आयरन निकालने के लिए कुछ दवाइयां दि जाती है।
डॉ. गौरव खरया
कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स,
इमेटोऑन्कोलॉजी,
इम्युनोलॉजी, एवं बोन मैरो
ट्रांसप्लांट, नई दिल्ली
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