किडनी से संबंधित समस्याएं
Types of kidney disease-what is kidney and its function
Kidney Disease Causes and Basic Information
आज भारत देश मे लगभग 5 लाख ऐसे मरीज हैं, जिनकी किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी है। हर साल एक लाख नए मरीज बढ़ जाते हैं। देश के प्रत्येक 2000 परिवार में से एक परिवार इस बिमारी से ग्रसित है। केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही उचित उपचार मिल पता है।
क्या है किडनी एवं इसका कार्य -
किडनी व्यर्थ पदार्थों और तरल पदार्थों की अत्यधिक मात्रा को शरीर से बाहर निकालकर रक्त को साफ करती हैं। रक्त में सॉल्ट और धातुओं की मात्रा को संतुलित रखती हैं। ये ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायता करती हैं। ये शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित करती हैं। एक किडनी 2 इंच चौड़ी, 1.5 इंच मोटी और 4 इंच लंबी होती है। किडनी लाखों छलनियों तथा लगभग 140 मील लम्बी नलिकाओं से बनी होती है। किडनी की इन इकाइयों को नैफ्रॉन कहते है। एक किडनी में लगभग 10 लाख ऐसी इकाई होती है, जो माइक्रोस्कोप से देखी जा सकती है। नलिकाएं छने हुए द्रव में से शरीर के लिए उपयोगी सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम इत्यादि को दोबारा सोख लेती हैं। हर दिन औसत 1.5 लीटर यूरिन के रूप में बाहर निकाल देती है।
किडनी से संबंधित समस्याएं -
क्रॉनिक किडनी डिसीज (सीकेडी): सीकेडी को एस्टाब्लिशड रीनल फेलियर (ईआरएफ) या एंड स्टेज किडनी डिसीज कहते हैं। इसमें किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। किडनी सामान्य कार्य नहीँ कर पाती है और क्षमता कम हो जाती है। सीकेडी से पीड़ित आधे लोग अस्पताल तब जाते हैं जब उनकी किडनी आधा ही कम कर पाती है। पहले और दूसरे चरण में ही रोग का पता लग जाए तो दवाओं से रोग बढने से रोका जा सकता है।
किडनी में सूजन : इसमें किडनी की फिल्टरिंग इकाइयों में सूजन आ जाती है। वे क्षतिग्रस्त हो जाती है। ये डिसऑर्डर तीसरा सबसे आम है। इसे ग्लोमेरूलोनेफ्रीटाइटिस कहते हैं।
पॉलीसिस्टिक किडनी डिसीज : यह एक अनुवांशिक रोग है, इसमें किडनी में सिस्ट बन जाते हैं।
किडनी में इंफेक्शन : इसमें संक्रमण को पायलोनेफ्रिटिस भी कहते हैं। यह संक्रमण किडनी स्टोन के कारण हो सकता है। इससे मूत्र के किडनी से बाहर की ओर प्रवाह में रुकावट आती है और मूत्र वापस किडनी में आ जाता है। इससे किडनी में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वैसे किडनी और मूत्र मार्ग के 80 प्रतिशत संक्रमण ई कोलाइ और अन्य बैक्टीरिया के कारण होते हैं। ई कोलाई संक्रमण दूषित आहार व जल से होता है।
किडनी फेल : गंभीर रोग में किडनी फेल हो सकती है। इसमें किडनी सामान्य गतिविधियों का 15 प्रतिशत से भी कम काम कर पाती है। इसे एंड स्टेज रीनल डिसीज (ईएसआरडी) कहते हैं।
कारण : किडनी खराबी के यूं तो बहुत सारे कारण हैं लेकिन मुख्य कारण निम्न हैं-
डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी में पथरी, किडनी रोगों का पारिवारिक इतिहास, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल बढना, प्रोस्टेट की बीमारियां। पेनकीलर और दूसरी कई दवाओं का अधिक प्रयोग। रजत भस्म और स्वर्णभस्म युक्त आदि दवाएं प्रयोग में लेने से।
लक्षण : इसमें शरीर में सूजन का आना, भूख की कमी, उल्टी आना, खून की कमी, हड्डियां कमजोर, थकान लगना। सांस फूलना, ब्लड प्रेशर बढ़ जाना, मूत्र की मात्रा में कमी होना, मूत्र मे रक्त आना।
इलाज यें हैं-
डायलिसिस : यह प्रक्रिया है जो स्वस्थ किडनी के समान कार्य करती है। इससे शरीर से अतिरिक्त तरल व्यर्थ पदार्थों को निकाल कर इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन रखा जाता है।
हीमोडायलिसिस : इसमें कृत्रिम किडनी/ फिल्टर द्वारा मशीन से रक्त साफ किया जाता है। इसमें दो सुइयां इस्तेमाल होती हैं। एक सुई से गंदा खून मशीन व कृत्रिम गुर्दे में जाता है दूसरी सुईं से साफ खून वापिस शरीर में लौटता है। एक व्यक्ति को औसतन प्रति सप्ताह दो से तीन बार हीमोडायलिसिस करवाना होता है।
डॉ रमेश जैन - एचओडी, किडनी ट्रांसप्लांटेशन सेंटर, सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, नई दिल्ली
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