Wednesday, 14 October 2015

What is flat foot causes and treatment in hindi

In Hindi -What is flat foot causes and treatment in hindi
फ्लैट फुट 

फ्लैट फुट की समस्या 10 में से 4 लोगों में देखने में आती है। यह तकलीफ महिलाओं में ज्यादा होती है, क्योंकि उनके जोड़ो में शिथिलता रहती है। लंबे समय तक उपचार न किए जाने पर यह समस्या भविष्य में पैरों के पंजे में आर्थराइटिस का कारण भी बन सकती है।

जन्म के समय प्राय: सभी बच्चों के पैर समतल होते हैं, लेकिन उम्र बढने के साथ उनका पॉश्चर बदलता है और वे चलना सीखते हैं। उनकी मांसपेशियां मजबूत होने लगती है और 9-10 साल की उम्र तक तलवो की आर्च यानी घुमाव विकसित होने लगता है। सामान्य रूप से पैर के तलवों में आर्च होने से शरीर का भार एड़ी और पंजों पर समान रूप में बंट जाता है। इसी कारण हम दौड़-भाग कर पाते हैं। फ्लैट फुट होने के कारण शरीर का पूरा भार पैरों पर पड़ता है, जिससे अधिक समय तक खड़ा रहने और चलने-फिरने में दिक्कत आती है। इनकी वजह से पिंडली की मांसपेशियों में दर्द होता है, जिससे पैरों की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, यह तकलीफ 10 में से 4 लोगों में रहती है।

सपाट तलवे यानी फ्लैट फुट मुख्य तौर से दो प्रकार के होते हैं-

1. फ्लैक्सिबल 2. रीजिड
फ्लैक्सिबल फ्लैट फुट में सामान्य रूप से पैरों का आकार देखने में ठीक लगता है, पर दबाव डालने पर पैरों का संतुलन नहीं बन पाता और तलवे सपाट हो जाते हैं।
रीजिड फ्लैट फुट में तलवे का आकार समतल ही रहता है। चपटे तलवे की समस्या पूरी तरह तभी सामने आती है, जब बच्चे के चलने का समय शुरू होता है। जिन बच्चों में आर्च का सही विकास नहीं होता, उनमें अधिक चलने पर पैरों में दर्द या थकावट की शिकायत भी अधिक होती है। लंबे समय तक उपचार न किए जाने पर आगे चलकर यह पैरों में आर्थराइटिस का कारण भी बन सकती है। रीजिड फ्लैट फुट में दर्द के अधिक बढ जाने पर सर्जरी करवानी पड़ सकती है।

कारण : -
  • फ्लैट फुट होने का एक कारण जोड़ों में अत्यधिक शिथिलता होना है, जो अधिक वजन बढने से भी संबंधित होती है।
  • पैरों में एक खास नस होती है, जिसे टिबिया पोस्टेरियर कहते हैं। वह पैरों की आर्च को बनाए रखती है। यह अत्यधिक सूजन या पोटापे के कारण फट सकती है, जिसके कारण फ्लैट फुट की समस्या हो सकती है।
  • बचपन में पैरों की दो हड्डियां आसामान्य रूप से जुड़ जाती हैं, जिसे टॉर्सल कोएलिशन कहते हैं इससे पैर कड़े और चपटे हो जाते हैं।
  • फुट आर्थाराइटिस, जो पैर के पीछे या मध्य भाग में होता है, आमतौर पर पीड़ादायक होता है। यह चोट लागने या किसी अन्य कारण से भी हो सकता है।
  • कभी-कभी पैरों की कोई चोट या फ्रैक्चर भी चपटे तलवे का कारण बन जाते हैं। लिगामेंट्स के टूटने या कमजोर होने पर हड्डियां एक-दूसरे से जकड़े रहने की बजाय शिथिल हो जाती हैं, जिससे तलवा चपटा हो जाता है।
  • इनके अलावा मोटापा, पैरों या टखनो में चोट आना, रूमैटाइड आर्थराइटिस और उम्र का बढ़ना तथा डायबिटीज़ जैसे कारणों से भी फ्लैट फुट की समस्या हो जाती है।


लक्षण : 

अधिकतर लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं लेकिन इसकी शिकायत हो तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

चलने में दर्द होना विशेष रूप से पैर और एड़ियों की अंदर की तरफ।
दौड़ते समय दर्द होना।
एड़ियों में अंदर की तरफ सूजन आना।
कभी-कभी पैर के तलवे या अंदर की तरफ झुनझुनी या सुन्नपन विकसित हो सकता है क्योंकि एड़ियों की तंत्रिकाएं या तो थोड़ी-सी खिंच जाती है।

डायग्नोसिस : एक्स-रे द्वारा फ्लैट फुट की पूरी जानकारी मिल जाती है। इसमें फ्लैट फुट के एक लक्षण आर्थराइटिस के बारे में भी पता चल जाता है। एमआरआई और सिटी स्कैन भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए बहुत उपयोगी होते हैं।

उपचार : दर्द नहीं होता तो इसके लिए कोई उपचार आवश्यक नहीं है। अगर पैर फ्लैट लेकिन लचीला है, तब इसका उपचार सामान्य इन्सोल और फिजियोथेरैपी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। आर्च (आर्थोटिक डिवाइसेस) से होने वाले दर्द में आराम मिलता है। जब दवाएं और खास जूते काम नहीं कर पाते हैं तो सर्जरी कराना आवश्यक होता है।

डॉ॰ प्रदीप मुणोत
आर्थपेडिक सर्जन, स्पेशलाइजिंग इन नी, फुट एंड ऐंकल सर्जरी, ब्रीच कैन्डी हॉस्पिटल ट्रस्ट, मुंबई

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