Wednesday, 14 October 2015

Understand Heart Transplant Surgery in hindi हार्ट ट्रांसप्लांट

Understand Heart Transplant Surgery in hindi
Tips for heart Transplant in Hindi 
हार्ट ट्रांसप्लांट


एक बुझता हुआ चिराग कई चिराग रोशन कर सकता है। जयपुर में हुआ पहला हार्ट ट्रांसप्लांट भी इसका उदाहरण है। ब्रेन डेथ के बाद डोनर का हार्ट सिर्फ चार घंटे में पेशेंट में ट्रांसप्लांट करना होता है। इसके लिए हार्ट को एजटीके सॉल्यूशन में डालकर ठंडा करके प्रिजर्व किया जाता है। प्रिजर्व के दौरान हार्ट में ब्लड नहीं होता। इसी दौरान हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारीयां जारी रहती हैं। पेशेंट यानी रिसिपिएंट का हार्ट खराब होने की वजह से साइज बड़ा हो जाता है। इस हार्ट को निकालने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। प्रिजर्व किए गए हार्ट को लगाने से पहले उसकी पूरी हवा निकाल दी जाती है। पांच सूचर लाइनों को मद्देनज़र रखते हुए हार्ट को पिछले भाग से जोड़ते हुए आखिर में अयोट यानी बड़ी धमनी से जोड़ा जाता है। फिर हार्ट फंक्शन करना शुरू कर देता है।

ट्रांसप्लांट के लिए बॉडी साइज मैच करना जरूरी-

हार्ट ट्रांसप्लांट में डोनर और पेशेंट का बॉडी साइज मैच करना जरूरी है। दोनों के बॉडी साइज में तीस परसेंट से कम का अंतर होना चाहिए। यानी रिसिपिएंट का वजन 50 किलो है तो डोनर का वजन 65 किलो होना चाहिए। बॉडी साइज या वजन में तीस परसेंट से कम का अंतर होने पर एडल्ट में बच्चे का हार्ट भी ट्रांसप्लांट हो सकता है। ट्रांसप्लांट के लिए लंग्स का हेल्दी और मजबूत होना जरूरी है। 

ट्रांसप्लांट के लिए 60 साल तक की उम्र -

पश्चिमी देशों में ट्रांसप्लांट के लिए रिसिपिएंट की उम्र 65 साल होनी चाहिए। लेकिन इंडिया में उम्र 60 साल है। हार्ट फेलियर के जिन पेशेंट्स में एक साल से कम लाइफ एक्सपेक्टेंसी है, उनमे ही ट्रांसप्लांट किया जाता हैं।

किन पेशेंट्स में होता है ट्रांसप्लांट-

हार्ट अटैक से मसल्स कमजोर होने, वाल्व खराब होने, वायरल इंफेक्शन की वजह से हार्ट खराब होने पर ट्रांप्लांट होता है। दवाइयों से भी जिन हार्ट फेलियर केसेज में रिलीफ़ नहीं मिल पाता। उन पेशेंट्स में ट्रांसप्लांट होता है।

आइडेंटिकल टिवंस के हार्ट में रिजेक्शन नहीं-

ट्रांसप्लांट के लिए आइडेंटिकल टिवंस का हार्ट या दूसरे ऑर्गेन बेहतर होता है। इनमें जीन एक समान होने की वझ से ऑर्गेन रिजेक्शन की संभावना नहीं रहती, जबकि बाकी रिसिपिएंट्स में ट्रांसप्लांट के बाद करीब एक साल तक में एंटी रिजेक्शन इंजेक्शन देने जरूरी होते हैं।

ट्रांसप्लांट पर आने वाला खर्च अभी तय नहीं-

हार्ट ट्रांसप्लांट में आने वाला खर्च अभी तय नहीं हुआ है। चेन्नई और अन्य सेंटरों पर करीब दस से पंद्रह लाख का खर्चा आता है। हालांकि, चेन्नई गवर्नमेंट की और से ट्रांसप्लांट के बाद एंटी रिजेक्शन दवाइयां फ्री दी जाती हैं। इंडिया में हार्ट फेलियर केसों में मैकेनिकल हार्ट डिवाइस और आर्टिफ़िशियल हार्ट सफल नहीं है। क्योंकि मंहगे होने के अलावा इनसे जुड़े कॉम्पलिकेशन बहुत ज्यादा है। वंही, इसकी तुलना में ट्रांसप्लांट सस्ता है। रिजल्ट भी बेहतर है।

डॉ. एम. ए. चिश्ती, हार्ट ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट 

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