What is Urinary Incontinence Treatment Causes Hindi
In Hindi यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की समस्या और इलाज
यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस एक ऐसी बीमारी है, जो महिला को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर प्रभावित करती है। इसमें यूरिन के निकलने पर शरीर का नियंत्रण नहीं रह जाता| इसे इंकॉन्टिनेंस नाम दिया गया है। यह बेहद मुश्किल भरा हो सकता है। यह हर आयु की महिलाओं को प्रभावित कर सकती है। इसकी आशंका गर्भवती या 18 से 40 आयु वर्ग की महिलाओं में ज्यादा होती है।
बीमारी की बड़ी तादात के बावजूद इसको लेकर लोंगों में जागरूकता नहीं है। इसकी बढ़ी वजह महिलाओं का इस बीमारी की अनदेखी कर डॉक्टर्स की मदद नहीं लेना है। इसमें हंसने, खासनें या छिकनें के दौरान लीकेज होता है। इसकी वजह ब्लैडर मसल्स की ओवर एक्टिविटी होती है। पेल्विक फ्लोर की कमजोरी की वजह से इसे स्ट्रेस यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस भी कहा जाता है।
इसलिए होती है- ब्लैडर मसल्स की ओवर एक्टिविटी की कई वजह हैं। जैसे कम पानी पीना, कॉफी, चाय या फ़िजी ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन, यूरिनरी स्टोन या ब्लैडर में अर्ली कैंसर। ब्लैडर कैंसर की वजह एक्टिव और पेसिव स्मोकिंग भी है।
यह है इलाज- इसके लिए कई तरह के ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं। ब्लैडर ड्रिल (ब्लैडर मसल्स की एक्सरसाइज) फिजियोथेरेपी के साथ काफी मददगार है। इसके लिए ओरल मेडिसिन भी दी जाती है, जिन्हे इससे फायदा नहीं होता उन्हे ब्लैडर मसल्स में बोटोक्स के इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। इससे करीब एक साल तक आराम रहता है। यह प्रक्रिया कम समय में पूरी हो जाती है। इसके लिए अस्पताल में रात रुकने की भी जरूरत नहीं होती है।
पेल्विक फ्लोर की कमजोरी की वजह से यह बीमारी बच्चे को जन्म देते वक्त, मुश्किल डिलीवरी या मेनोपॉज की वजह से भी होती है। कम उम्र में हिस्टेरेक्टॉमी (यूटेरस निकलवाना) भी इसकी वजह बनती है। कई बार यह परेशानी आनुवांशिक भी होती है। पेल्विक फ्लोर की स्ट्रेनथनिंग की एक्सरसाइज़ इसके लिए फायदेमंद है। बीमारी की गंभीरता के मुताबिक इसमें सर्जरी की जरूरत भी पड़ती है। यह छोटी सी प्रक्रिया 5 में से 4 महिलाओं में सफल रहती है। फिर दोबारा अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ता है।
डॉ॰ मीरा राघवन
कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रीशियन, अपोलो हॉस्पिटल
कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रीशियन, अपोलो हॉस्पिटल
No comments:
Post a Comment