Tuesday, 8 March 2016

What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments

What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments

What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments: What Is Bronchitis? न थमने वाली खांसी का दौर शुरू हो गया है। खांसी के साथ बलगम की शिकायत है। ये बलगम की मात्रा जाड़े मे सुबह के समय ज्यादा होती हो। ये सब लक्षण फेफड़े की Bronchitis नामक बीमारी के है।
What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments
What Is Bronchitis? Causes, Symptoms and Treatments
ब्रॉनकियकटेसिस फेफड़े के अंदर स्थित श्वास की नलियों की सूजन व मियादी इंफ़ेक्शन है। इसमें श्वास नली की दीवारें इंफ़ेक्शन व सूजन की वजह से अनावश्यक रूप से कमजोर हो जाती है, जिसकी वजह से इनका आकार नलीनुमा न रहकर गुब्बारेनुमा हो जाता है, जिसका परिणाम यह होता है कि श्वास की नालियों में गाढ़े बलगम का भयंकर जमाव हो जाता है, जो नालियों में रुकावट पैदा कर देता है। इस रुकावट की वजह से नालियों से जुड़ा हुआ फेफड़े का अंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर सिकुड़ जाता है। क्षतिग्रस्त भाग में स्थित फेफड़े को सप्लाई करने वाली धमनी और गिल्टी भी आकार में बड़ी हो जाती है। इन सबका मिला जुला परिणाम यह होता है कि क्षतिग्रस्त फेफड़ा और श्वास नली अपना कार्य सुचारु रूप से नहीं कर पाते और मरीज के शरीर में तरह तरह की जटिलताएं पैदा हो जाती हैं।

Cause of Bronchitis : ब्रॉनकियकटेसिस बीमारी होने का मुख्य कारण छाती में स्थित श्वास नली व उसकी शाखाओं में होने वाला बार बार इंफ़ेक्शन है। इन फेफड़े के बार-बार होने वाले इंफ़ेक्शन में निमोनिया का इंफ़ेक्शन प्रमुख है। अगर इस infection को शुरूआती दिनों में प्रभावी ढंग से रोका नहीं गया तो ब्रॉनकियकटेसिस होने की संभावना होती है। दूसरा कारण TB का infection है। समुचित दवा के बाद टीबी का इंफ़ेक्शन तो नियंत्रण में आ जाता है, पर फेफड़ा व उसमें स्थित श्वास नली पर जाते-जाते स्थिर प्रभाव छोड़ जाता है। इसकी वजह से श्वास नली व फेफड़े की संरचना में बदलाव आ जाता है, जिससे दूसरे किस्म के किटाणु वहां अपना डेरा जमा लेते हैं। धीरे-धीरे श्वास नली के कार्य में बाधा डालते हैं और यहीं से ब्रॉनकियकटेसिस की शुरुआत होती है। 

कुछ लोगों में ब्रॉनकियकटेसिस की बीमारी जन्मजात होती है, जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस रोग बच्चों में होने वाली ब्रॉनकियकटेसिस का एक कारण है। कभी-कभी खून में एक जरूरी तत्व ऐल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन एंजाइम की कमी होना, रयूमेटाइड आर्थराइटिस और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां भी ब्रॉनकियकटेसिस के उत्पन्न होने का बड़ा कारण है। कभी-कभी बच्चे अंजाने में चना, मटर या सिक्का या कोई अन्य छोटी वस्तु मुंह में डाल लेते हैं। जो भोजन की नली में न जाकर कभी कभी श्वास नली में चली जाती है और नीचे जाकर फेफड़े में स्थित श्वास नली में जाकर अटक जाती है। यहीं से उस बंद श्वास नली से जुड़े हुए फेफड़े के हिस्से में ब्रॉनकियकटेसिस की शुरुआत होती है। 

ब्रॉनकियकटेसिस Symptoms: 
  • छाती में इंफ़ेक्शन होते रहना। सांस फूलना। 
  • न थमने वाली और काफी देर तक चलने वाली खांसी जो बेहाल कर दे।
  • खांसी के साथ गाढ़ी बलगम का आना। 
  • केवल सूखी खांसी का निरंतर आना। 
  • सांस लेते समय छाती में गड़गड़ की आवाज होना। 



ब्रॉनकियकटेसिस के प्रभावी इलाज के लिए उसके कारणों को ढूंढ कर उन पर नियंत्रित किया जाए। इस मर्ज के इलाज के लिए antibiotics का सही ढंग से इस्तेमाल होना चाहिए। क्षतिग्रस्त श्वास नली में जमे हुए गाढ़े बलगम को निकालने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। कुछ विशेष दवाएं कारगर सिद्ध होती हैं। कुछ विशेष शारीरिक मुद्राएं और physiotherapy भी बलगम को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इसके इलाज में ऑपरेशन की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। 

डॉ. केके पाण्डेय
सीनियर वैस्कूलर व
कार्डियो थोरेसिक सर्जन अपोलो अस्पताल, दिल्ली।

ओवोसाइट इनोवेटिव टेक्नोलॉजी Egg (oocyte) freezing Innovative Technology

ओवोसाइट इनोवेटिव टेक्नोलॉजी Egg (oocyte) freezing Innovative Technology 

Many times female, अधिक उम्र की होने के बावजूद baby plan नहीं कर पाती है। उन्हें यह चिंता सताने लगती है कि क्या वह अधिक age में पहुंचकर सेहतमंद baby को जन्म दे पाएंगी या नहीं? उन्हें ये चिंता भी रहती है कि क्या वे अपने Eggs को freez कर सकती हैं। इसका जवाब है कि ओवोसाइट प्रिजर्वेशन से अंडे को freez करना मुमकिन है। 


ओवोसाइट इनोवेटिव टेक्नोलॉजी है। इस तकनीक की मदद से महिला ज्यादा उम्र में बच्चा पैदा करने के सक्षम बनती है। यह तकनीक उन महिलाओं के लिए और भी ज्यादा फायदेमंद है, जो किसी बीमारी के चलते या पढ़ाई-लिखाई के लिए या फिर कॅरियर डेवलपमेंट के कारण बच्चा लेट प्लान करती है। 
इसका प्रोसेस पूरी तरह से इन-विट्रो फर्टेलाइजेशन (आईवीएफ़) या टेस्ट ट्यूब बेबी जैसा है। इसमें महिला को कुछ दिनों तक हॉरमोन इन्जेक्शन दिए जाते हैं, जिससे multiple egg पैदा किए जा सकें। ultrasound गाइडेड नीडल से वजइना अंडर सिडेशन के जरिये अंडो की ओवरी से निकाला जाता है। अंडे को शरीर से निकलते ही उन्हें कई वर्षो तक फ्रिज किया जाता है। 
हाल ही में एक नई रेपिड फ्रीजिंग टेक्नीक, विट्रिफिकेशन ड़ेवलप की गई है। इसके जरिए ओवोसाइट का सर्वाइवल काफी अच्छा है और महिला के गर्भवती होने की संभावना भी IVF टेक्नीक से ज्यादा बेहतर होती है। इस तकनीक के जरिये वर्ष 1986 में पहली बार महिला गर्भवती हुई थी। इस तकनीक की मदद से अब तक दुनियाभर में एक हजार से ज्यादा बच्चों का जन्म हो चुका है। इसमें बच्चे और मां को किसी तरह का कोई खतरा नहीं रहता, लेकिन एग बैंकिंग करने के बारे में 35 वर्ष से पहले सोचना ज्यादा जरूरी है। इससे बेहतर नतीजे मिलते हैं। अंडे की बैंकिंग जितनी जल्दी होगी, बच्चा उतना ही स्वास्थ पैदा होगा। बायोलॉजिकल उम्र के अलावा जीवनशैली से भी अंडे की क्वालिटी प्रभावित होती है। जितनी अच्छा जीवनशैली, उतने हेल्दी अंडा होता है। कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखें, जैसे- स्ट्रस से दूर रहना, धूम्रपान न करना, फल-सब्जियों का सेवन ज्यादा और वजन को काबू में रखने से क्वालिटी अंडे मिलते है।

डॉ॰ कामिनी राव 
फर्टेलिटी स्पेशलिस्ट और मेडिकल डायरेक्टर, मिलान फर्टेलिटी सेंटर, बेंगलुरु 

शरीर में कैल्शियम Calcium Intake and Bone Mineral Density BMD

What is BMD (Bone Mineral Density)
शरीर में कैल्शियम Calcium Intake and Bone Mineral Density BMD
बुजुर्ग व्यक्ति दिन में एक हजार एमजी कैल्शियम ही लें -
खाने की चीजों से ही शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ाने से होगा फायदा

What is BMD : बीएमडी से मतलब है कि प्रति स्क्वेयर सेंटीमीटर बोन में कितना मिनरल मैटर मौजूद है। यह ओस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का पतले होनी) की निशानी भी है। BMD कम होने से फ्रैक्चर की संभावना भी बढ़ जाती है। थोड़ा-सा पैर मुड़ने या गिरने पर फ्रैक्चर आ सकता है। इससे भी कुछ फ्रैक्चर आम हैं, जैसे लोअर बैक, हिप या थाई बोन का फ्रैक्चर। हड्डियों में कमजोरी होने के कारण फ्रैक्चर जल्दी ठीक नहीं होता और व्यक्ति डिसएबल भी हो सकता है। 

Recommandation : बुजुर्ग लोगों को प्रतिदिन एक हजार से 12 सौ एमजी कैल्शियम टेबलेट खानी चाहिए। इस लेवल को हासिल करने के लिए सप्लीमेंट खाने की सलाह दी जाती है। जबकि समान्य व्यक्ति को प्रतिदिन 600 से 800 एमजी कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। 

BMD Level and calcium: इस विषय पर कई शोध हो चुके हैं कि डायटरी कैल्शियम या सप्लीमेंट्स का सेवन बढ़ाने से कोई खास लाभ नहीं होता है, डायटरी कैल्शियम बढ़ाने से बीएमडी सिर्फ 0.6 से 1.0 फीसदी ही बढ़ पाता है, जो कुछ खास नहीं है। इतना अंतर भी एक साल तक डायटरी कैल्शियम लेते रहने के बाद आता है। कैल्शियम सप्लीमेंट लेने के एक वर्ष बाद बीएमडी सिर्फ 0.7 से 1.8 फीसदी बढ़ता है। इसका फ्रैक्चर होने के खतरे में कोई विशेष असर दिखाई नहीं देता है। कैल्शियम को विटामिन-डी के साथ लेने से कोई फायदा नहीं होता। फायदा सिर्फ विटामिन-डी का ही होता है। 

कैल्शियम टेबलेट या सप्लीमेंट की बजाय खाने-पीने की चीजों से शरीर में कैल्शियम बढ़ाएं। जैसे ज्यादा दूध पीए। दही, संतरे, ब्रोकली आदि खाएं। इन चीजों का सेवन तभी बढ़ाएं, जब ब्लड कैल्शियम लेवल, समान्य से कम हो। 

सप्लीमेंट्स की तरफ झुकाव इसलिए कम होना चाहिए क्योंकि इनका कोई खास फायदा नहीं होता है, लेकिन साइड इफेक्ट ज्यादा होते हैं। जैसे- भूख कम होने लगती है। कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। मुंह हमेशा सूखा-सूखा रहता है। प्यास बढ़ जाती है। गुर्दे में पथरी की समस्या आम देखने को मिलती है। साथ ही पेट की समस्याएं होने लगती हैं।  

डॉ. चंद्रा एम. गुलाटी
ड्रग एक्सपर्ट, नई दिल्ली।

विटामिन डी Vitamin D Health Benefits in Hindi

 विटामिन-डी की कमी से होती हैं बीमारीयां -
विटामिन डी Vitamin D Health Benefits in Hindi-Vitamin D Ke Fayde

रोज पंद्रह मिनट धूप (Sun Light) में बैठने से शरीर में होगा विटामिन-डी का उत्पादन 

हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन-डी खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन विटामिन-डी का सिर्फ इतना ही काम नहीं है। यह शरीर के बाकी अंगो के लिए जरूरी है। धूप में बैठने से शरीर में विटामिन-डी का उत्पादन शुरू होता है। जबकि ज़्यादातर ऐसा करते नहीं हैं। देश में 80 फीसदी गर्भवती महिलाओं में विटामिन-डी का रक्त काम पाया जाता है। हाल ही में हुए शोध के अनुसार दुनिया में करीब 1 बिलियन लोगों के शरीर में विटामिन-डी की कमी है। 
Vitamin D Health Benefits in Hindi
Vitamin D Health Benefits in Hindi
According to research - शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी होने से कैंसर, ह्रदय रोग, डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, बोन फ्रैक्चर आदि का खतरा कम हो जाता है। महिलाओं को विटामिन-डी के बारे में ज्यादा सचेत रहना चाहिए, क्योंकि ब्रेस्ट मिल्क में इसका अहम योगदान है। गर्भवती महिला में विटामिन-डी का लेवल कम होने के कारण नवजात शिशु में कई बीमारियां जैसे- इन्फेक्शन, अस्तमा, सांस लेने की दिक्कत आदि हो सकती है। 

How to get Vitamin D : अगर प्रतिदिन मात्र 15 से 30 मिनट के लिए बाजू और टांगों पर धूप गिरती रहे तो इतने वक्त में शरीर विटामिन-डी बनाने के सक्षम बनता है। अगर ऐसा संभव नहीं हो पा रहा तो जिन खाने की चीजों में विटामिन-डी पाया जाता है, जैसे- फिश लिवर से बने खास किस्म के ऑइल या सैलमन जैसी मछलियों का सेवन करें। 

कुछ मशरूम जो सूर्य की रोशनी में बढ़ते हैं, उनमें भी विटामिन-डी भारी मात्रा में पाया जाता है। कुछ देशों में विटामिन-डी को खाने में फोर्टिफाय किया जा रहा है। शोध के अनुसार- हाई बेकिंग टेम्प्रेचर पर विटामिन-डी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इसलिए इसे उसी फॉर्म में आसानी से खाया जा सकता है। ऐसे में ब्रेड को विटामिन-डी के लिए फोर्टिफाय किया जा सकता है। 

शरीर में विटामिन-डी की कमी के कारण हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में हुए शोध के अनुसार जिन लोगों के शरीर में विटामिन-डी की कमी होती है, उनका ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है। शरीर में 10 फीसदी विटामिन-डी कंसन्ट्रेशन बढ़ने से हाइपरटेंशन की समस्या कम हो सकती है। यह शोध यूरोप और उत्तरी अमेरिका के करीब 1.55 लाख लोगों पर किया गया था। इसलिए खान-पान की ओर विशेष ध्यान दें।         

डॉ॰ विकास साहनी, क्लीनिकल 
कार्डियोलॉजिस्ट व रिसर्चर, 
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल