Tuesday, 1 September 2015

इलेक्ट्रिक प्लास्टर

Research - इलेक्ट्रिक प्लास्टर से होगा इलाज

इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों ने एक इलेक्ट्रिक प्लास्टर बनाया है जिससे पैरिफेरल आर्टरी डिजीज का उपचार किया जा सकेगा। शोधकर्ताओं के अनुसार गीको नाम का यह प्लास्टर रिस्ट वॉच के आकार जैसा है जो पैर में बांधने पर इलेक्ट्रिक तरंगें इस अंग मे भेजता है। पैरिफेरल आर्टरी डिजीज में रक्त नलियों में खून का थक्का बन जाता है जिससे पैरों में अल्सर, सूजन या दर्द की शिकायत होने लगती है। यह प्लास्टर रक्त के इसी जमाव को कम करने का काम करता है। इस प्लास्टर से व्यक्ति को इलेक्ट्रिक शौक मिलते हैं जो दर्द रहित होते हैं।

skin diseases home remedy -चर्म रोग में फायदेमंद मलहम व लेप

Natural home remedies for skin Diseases 

चर्म रोग में फायदेमंद मलहम व लेप

शरीर पर कई बार घाव, कट व कुछ ऐसे त्वचा रोग हो जाते हैं जो काफी इलाज के बाद भी ठीक नहीं होते। ऐसे में जड़ीबूटियों से तैयार मलहम व लेप काफी कारगर हो सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-

फोड़े फुंसी व घाव : 4 चम्मच नीम के पत्तों का रस, 1 चम्मच गाय का घी, 250 मिलिग्राम रसकपूर, 2 ग्राम मोम लें। मोम को थोड़ा गर्म करके पिंघलाएं व आंच से उतारने के बाद उसमे बाकी सामग्री को अच्छे से मिलाकर मलहम तैयार करें। ठंडे होने पर प्रयोग करें।

कुष्ठ रोग : करंज, नीम व खैर की छालयुक्त लकड़ी समान मात्रा में लेकर जलाएं। इसको पीसकर गोमूत्र मे मिलाकर उबालें। गाढ़ा होने पर आंच से उतारकर ठंडा कर लें, फिर इसमें इसके वज़न का दसवां भाग गाय का घी डालें (अगर वजन 10 ग्राम है तो 1 ग्राम घी)। अब इसे वापस थोड़ी देर गर्म करके मिलाएं। मलहम बनने के बाद ठंडा करके प्रयोग करें।

दाद : चिरविल, आंक, थोर, अमलतास व जई के पत्तों का समान मात्रा में रस निकालें। गोमूत्र को शुद्ध करें। शुद्ध गोमूत्र में पत्तों के रस को मिलाकर उबालें व गाढा होने पर आंच से उतार लें। ठंडा होने पर प्रयोग करें।

ऐसे शुद्ध करें गोमूत्र : इसे एक बर्तन में लेकर आंच पर तब तक उबालें जब तक इसमें झाग आना बंद न हो जाएं । झाग न आने पर यह शुद्ध हो जाता है।

नाड़ी वैद्य शंभू शर्मा, वनौषधि विशेषज्ञ

Stretching methods to Relieve Pain दर्द से बचने के लिए स्ट्रेचिंग के सही तरीके

Stretching methods to Relieve Pain 
दर्द से बचने के लिए स्ट्रेचिंग के सही तरीके


कमर के नीचे के हिस्से में दर्द रहने से शरीर के बाकी जोड़ों में भी दर्द होने लगता है। एक निश्चित उम्र में महिलाओं का ज्यादा देर तक एक अवस्था में बैठना परेशानी का सबब बन सकता हैं। स्ट्रेचिंग और स्ट्रेथानिंग कर इससे  बचा जा सकता है। ऐसे में रनिंग, जम्पिंग और मार्शल आर्ट्स जैसी एक्टिविटी नहीं करना चाहिए।

दर्द को ऐसे कर सकते हैं कम-

स्टेन और प्रेशर से हिप पेन हो सकता है। इससे आरआईसीई मैथड़ से दूर कर सकते हैं।

आर-रेस्ट: जोड़ों को दो तीन दिन रेस्ट दें। हर तरह के व्यायामसे दूर रहें, जिससे स्ट्रेचिंग भी शामिल हैं।

आई-आइस: आइस पैक हिप जॉइंट के के दर्द में फायदेमंद है। दिने में दो तीन बार 10 मिनट सेकें।

सी-कंप्रेस: जॉइंट को बैंडेज से कंप्रेस करें। ऐसा दो तीन रोज करने से जॉइंट को सपोर्ट मिलेगा।

ई-एलिवेट: लेटने के दौरान पिलो या लोड शरीर के नीचे रख हिप को उठाएं। इससे लोअर बैक और हिप जॉइंट का स्ट्रेस खत्म होगा।

स्ट्रेच करने करने का सही तरीका

स्ट्रेचिंग करने से हिप एरिया और टाइट मसल्स को राहत मिलेगी। इसके लिए टेनिस बॉल और फ़ोम रोलर की जरूरत होगी।

टेंडर स्पॉट्स को आराम: मैट पर बैठकर दोनों घुटनों को मोड दें। अब दायां पैर बायें घुटने पर रखें। अब लेफ्ट हिप के नीचे फ़ोम रोलर रखें। अब हिप को बॉल पर रोल करें। गहरी सांस लेते हुए दो से तीन मिनट ये करें।

स्पाइन को स्ट्रेच करें

एक मोजे में दो टेनिस बॉल डालकर एक बॉल रोलर बना लें। अब पीठ के बल लेट जाएं। पीठ के निचले हिस्से में इसे रखें। रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर। अब इसे धीरे-धीरे दो से तीन इंच ऊपर और नीचे की ओर रॉल करें।

पिंडलियों को दें आराम

पिंडलियों की टाइट मसल्स से वजन हिप्स में पहुंच कर दर्द पैदा कर सकता है। पिंडलियों को स्ट्रेच करने के लिए मैट पर बैठें। दोनों पैरों को सीधा करें। एक पैर की पिंडली के नीचे फ़ोम रोलर रखें। दूसरे पैर को मोड़कर बॉडी को सपोर्ट दें। अब धीरे-धीरे रॉल करें। दोनों पैरों से इसे दोहराएं।

निशा वर्मा, फिटनेस ट्रेनर, नई दिल्ली।

Gokhru Health benefits - गोखरू

Gokhru Health benefits -गोखरू के फायदे


-आयुर्वेद औषधियों में प्रयोग किया जाने वाला गोखरू बड़ा व छोटा दो प्रकार का होता है। ज़्यादातर दवाओं में बड़े गोखरू का प्रयोग किया जाता है। आइए जानते हैं इसके प्रयोग के बारे में-

-किडनी की छोटी पथरी में राहत देता है गोखरू

-गोखरू व पुनर्नवा की जड़ की समान मात्रा व चौथाई मात्रा में जवक्षार लेकर चूर्ण बनाए। सामान्य पानी से सुबह-शाम एक से डेढ़ चम्मच लें। 

-पेशाब में जलन, पेशाब कम आना व किडनी की छोटी पथरी (2-3 एमएम) में लाभकारी है।

-कौन न लें : मधुमेह व अधिक पेशाब आने पर इसे न लें।