Tuesday, 4 August 2015

सफ़ेद कद्दू के कई गुण

सफ़ेद कद्दू में छीपे कई गुण


सफ़ेद कद्दू (कुम्हेड़ा) या पेठे को पूरे भारत मे अलग-अलग तरह से खाया जाता है| दक्षिण में जंहा इसकी सब्जी बनाई जाती है वंही उत्तर भारत मे इससे तैयार पेठा खाया जाता है| जानते है इसके फायदे के बारे में -  

तनाव घटेगा : इसे ब्रेन फूड कहते है क्योंकि यह तनाव घटाकर मिर्गी, उत्तेजना व भ्रम आदि को नियंत्रित करता है|

पेट रहेगा फिट : यह पेट के एसिड को कम कर अल्सर व जलन मे आराम पंहुंचाता है| सफ़ेद कद्दू का एक गिलास ताजा रस पीने से किडनी की पत्थरी मे आराम मिलता है| इसमे मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने मे मदद करता है| इसकी पत्तियों को खरोच या चोट पर लगाने से घाव जल्दी भरता है|

मोटापा नहीं सताएगा : सफ़ेद कद्दू में 96 प्रतिशत पानी होता है| यह अधिक कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थों का बेहतर विकलप है जो वजन नियंत्रित रखने मे मदद करता है| दुबले लोग भी इससे स्वास्थ लाभ ले सकते है|

उपलब्धता : सफ़ेद कद्दू की फसल 24-31 डिग्री सेल्सियस के बीच उगाई जाती है| जिसका प्रयोग सर्दी के दिनो मे किया जाता है| इसकी खेती तमिलनाडू, केरल, आन्द्र्प्र्देस, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के भरतपुर जिले में की जाती है|


फायदे ही फायदे : आयुर्वेद मे सफ़ेद कद्दू का प्रयोग चटनी व पाक के रूप मे किया जाता है| अगर छह माह तक इसे काटा न जाए तो भी यह खराब नहीं होता आगरा का मशहूर पेठा इसी कद्दू से बनाया जाता है|


येँ चीजे देंगी भरपूर कैल्शियम

येँ चीजे देंगी भरपूर कैल्शियम

हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम का नियमित सेवन जरूरी है| लेकिन अक्सर लोग सोचते हैं की यह दूध, दही व पनीर जैसे डेयरी उत्पादो में ही मिलता है| कई लोंगों को डेयरी उत्पाद पसंद नहीं होते या फिर उन्हे इनके प्रयोग से दिक्कत होती है| ऐसे में कैल्शियम के और भी कई बेहतर स्रोत हैं

एक सूखी अंजीर में 130 मिलीग्राम कैल्शियम होता है|

ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी व शलगम आदि में भी कैल्शियम होता है| 26 ग्राम बादाम मे 60 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है|

तिल भी कैल्शियम का समृद्ध श्रोत हैं 100 ग्राम तिल के लड्डू से 550 मिलीग्राम कैल्शियम मिल जाता है|

Friday, 31 July 2015

Hepatitis Ayurvedic Treatment in Hindi

हेपेटाइटिस - लाभदायक आयुर्वेदिक उपाय 

हेपेटाइटिस को पीलिया की दूसरी स्टेज माना जाता हैइसे गंभीरता से लेने पर व्यक्ति को किडनी संबंधी रोग, सिरोसिस ऑफ लिवर या जलोदर (पेट में पानी) भी हो सकता हैI  आइये जानते है इससे जुड़े कुछ देसी उपायों के बारे में |

आयुर्वेदिक चूर्ण: पुनर्नवा जड़, मकोय, बड़ा गोखरू, रोहड़े की छाल, कालमेघ पंचांग चिरायता को 50-50 ग्राम लें इसमें 25 ग्राम कुटकी मिलकर चूर्ण बना लें| ऐसे एक-दो चमच्च आठ घंटे के अंतराल पर दो बार सामान्य पानी से लें. छोटे बच्चों को आधा चम्मच दें| ऐसा एक माह तक करें, लाभ मिलेगा | 

एलोवेरा जूस: 200 मिलीलीटर जूस दिन में 2-3 बार लें| 

ये भी हैं लाभकारी: दिन में 2-3 बार नारियल पानी, लौकी, सेब गन्ने का रस लेने से लिवर की सूजन ठीक होती हैI

ध्यान रहे: इस रोग में दवाओं के साथ परहेज करना बेहद जरुरी है ऐसा करने पे दवाएं असरहीन हो जाती हैं रोग ठीक नहीं होता |

परहेज: उरद, हींग, सरसों का तेल, घी, तेज मिर्च-मसाले, खट्टे पदार्थ, जंक फ़ूड नशीले पर्दार्थों का सेवन करें|


वैद्य पदम जैन, आयुर्वेद विशेषज्ञ, जयपुर