एंटीबॉयोटिक्स के बारे में कुछ गलत धारणाएं - Misconception and Myths about Antibiotics
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सर्वे में एंटीबॉयोटिक्स दवाइयों के संबंध मे व्याप्त गलतफहमियों का खुलासा हुआ है। सर्वे में 12 देशों के लगभग दस हजार लोंगों की राय जानी गई थी। कुछ आम गलत धारणाओं पर गौर कीजिए।
गलतफहमी 1 - डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीबॉयोटिक्स की पूरी खुराक लेने की जरूरत नहीं है। 32% लोग मानते हैं, अच्छा महसूस करने के बाद एंटीबॉयोटिक्स बंद कर देना चाहिए। लेकिन, पूरा कोर्स नहीं लेने का अर्थ है कि इन्फेक्शन का पूरी तरह इलाज नहीं हो पाएगा। प्रतिरोध पैदा हो सकता है।
गलतफ़हमी 2 – एंटीबॉयोटिक्स प्रतिरोध यानी शरीर पर दवाइयों का असर नहीं होता है। 76% लोग सोचते हैं, यह सच है। जबकि सचाई यह है कि बैक्टीरिया प्रतिरोधी हो जाता है और बीमारी फैलाता है।
गलतफ़हमी 3 - नियमित तौर पर एंटीबॉयोटिक्स का उपयोग करने वाले लोगों को ही खतरा रहता है। 44% लोग इस पर विश्वाश करते हैं। लेकिन, किसी को भी ऐसा इन्फेक्शन हो सकता है जो एंटीबॉयोटिक्स का प्रतिरोधी है।
गलतफ़हमी 4 – एंटीबॉयोटिक्स से सर्दी, फ्लू का इलाज संभव है। 64% लोगों का मानना है, एंटीबॉयोटिक्स से सर्दी भागती है। सर्दी वायरस से होती है। एंटीबॉयोटिक्स का उपयोग केवल बैक्टीरिया के खिलाफ होता है।
No comments:
Post a Comment