Oral Glucose Tolerance (OGT) Test during Pregnancy
OGT test will help to detect an early stage of diabetes Type 2
Pregnancy में पता चलने वाले diabetes को Gestational Diabetes (जीडीएम) कहते हैं। GDM का मतलब है कि आपके शरीर में टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा ज्यादा है। डिलिवरी के बाद प्रेग्नेंसी हॉर्मोन्स में गिरावट आने के कारण ब्लड शुगर लेवल नॉर्मल लेवल संतुलित हो जाता है, इसलिए एंटीडायबिटिक मेडिकेशन की जरूरत भी नहीं होगी, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा बना रहता है।
कई शोध के अनुसार जो महिलाएं जीडीएम की शिकार होती हैं, उनमें से 30 से 50 फीसदी महिलाओं में डिलिवरी के 5 से 10 वर्ष में टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है। अलग प्रेग्नेंसी में जीडीएम का खतरा 70 फीसदी तक रहता है। इस बीमारी का पता ब्लड टेस्ट से ही लग सकता है।
| OGT Test |
6 से 12 सप्ताह की Pregnancy के दौरान दो घंटे 75 ग्राम ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGT) कराना चाहिए। अगर 2 hour OGT Test का नतीजा negative आता है तो हर तीन वर्ष में टेस्ट दोबारा कराने को कहा जाता है।
सही समय पर इलाज न होने के कारण हाई ब्लड ग्लूकोज के कारण आंखों, पैरों या किडनी की समस्या हो सकती है। चूंकि आप जानते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज़ का रिस्क ज्यादा है, इसलिए बीमारी को कंट्रोल करना और भी जरूरी है। जिस महिला का वजन संतुलित होता है या जो ज्यादा एक्टिव रहती है, उसे टाइप-2 का खतरा कम होता है।
प्रेग्नेंसी में वॉक करना या संतुलित आहार खाने से बच्चे में टाइप-2 का खतरा टल जाता है। इन समस्याओं से दूर रहने के लिए रेगुलर स्क्रीनिंग कराएं। प्री-डायबिटीज़ का पता चलने पर भी टाइप-2 का खतरा टल सकता है।
टेस्ट पूरे होने के बाद अगर डायबिटीज़ का पता चलने पर ब्लड ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है। इससे अगली प्रेग्नेंसी में कोई समस्या नहीं आती है। सही वक्त पर diagnose न होने पर और ब्लड शुगर बढने से नवजात पर बुरा असर पड़ेगा। अच्छी डाइट और लाइफस्टाइल में थोड़े बदलाव के साथ सही ट्रीटमेंट से समस्या का हल निकल सकता है, इसलिए OGT Test समय पर कराएं।
डॉ॰ एसके वॉन्गनू
एंडोट्रायनोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल
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